भीड़ बहुत है मगर, तन्हा है जिंदगी..

क्या सही क्या ग़लत
सोचने में गुज़ार ना तू जिंदगी
हस लो, हसा लो,
सबको अपना बना लो
थोड़ा बड़ा बना लो,
छोटी सी है बहुत ये जिंदगी

फिक्रो को रख कर ताक में
थोड़ा बगल में झांक ले
कई और भी है तेरे इंतज़ार में
कब से खड़ी है जिंदगी

जरूरी नहीं कि इश्क़ किया जाए हर बार
जरूरी नहीं कि मोहब्बत में पड़ा जाए हर बार
कुछ पल, अनजान के साथ भी गुज़ार
कुछ लम्हे, भूलने वाले भी निकाल
भीड़ बहुत है मगर, तन्हा है जिंदगी

देव

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