बे तरतीब सी रखी है,ख्वाहिशें भी,

बड़ी कष्मेकश सी है जिंदगी,
कहीं सांसे थम रही है,
और कहीं धड़कने,

कुछ छूट सा रहा है हर तरफ,
किसी की जान निकल रही है,
और किसी की जां

वक़्त भी, एक अलग ही,
खेल दिखता है
जब करीब होने का सोचते है,
मीलों दूर ले जाता है,

बे तरतीब सी रखी है,
ख्वाहिशें भी,
जमाएं या छोड़ दे,
कुछ समझ नहीं आता,

देव

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