बादल बरस तो गए

बादल बरस तो गए,
मगर उड़ते भी गए,
और मैंने कुछ कर डाला,
इन बादलों पे कुछ लिख डाला,

संदेश, मेरे यार को,
कुछ दुआएं भी भेजी है,
उसकी ख्वाहिशों का एक बंडल,
लटका कर, यूं बूंदों में,
जो बरसने को बेताब हैं,
मगर, उन्हें भी किसी का,
इंतेज़ार है,

लिपटा कर, मेरे जज्बातों को,
बरसेंगी, मेरे यार पर,
कुछ खुशियां, कुछ अफसाने,
बताएंगी, लौट कर आने के बहाने।।

देव

4 June 2020

Leave a Reply