देश का सपूत

प्रियवर और प्राणप्रिए को छोड़,
प्राणों की आहुति को तत्पर,
खड़ा सीमा पर निडर, निश्चल,
पलक झपकते ना, वो पल भर,

ताप्ती धूप में, लावा सी रेत,
बंजर जमी, या लहलहाते खेत,
सर्द हवा और, जमी सी राते,
गलते पैर, भी नहीं हिलाते,

एक मां को छोड़, दुजी की चिंता,
सूखी नजरो से, राहें तकते पिता,
याद में जो, नन्हे से दिखते,
अब तक कभी, ना बढ़ते देखे,

हां, वही जो सबकी, रक्षा करता,
पल में जान, देश को देता,
न्योछावर तुझ पर है सब कुछ,
सलाम मेरा तुझे, देश के सपूत।

देव

Leave a Reply