मुझे कुछ हो गया था

खुली जुल्फों को लहराते हुए,
झुकी पलको को उठा, हौले से,
तुमने जब देखा मुझे, मुस्कुरा कर,
सब कुछ तब ही बदल गया था,
मुझे कुछ हो गया था।

दबा कर ख्वाहिशों को, बैठा था कबसे,
जमाने में खोया था, लेकिन
ना थी मोहब्बत खुद से,
मिलकर तुझसे, कुछ पल,
मैं खुद से मिल गया था,
मुझे कुछ हो गया था।

कभी तलाश थी तेरी,
अब इंतेज़ार है तेरा,
तेरा तुझको पता होगा,
अब ये दिल नहीं मेरा,
तुझमें मेरा बहुत कुछ, खो गया था,
मुझे कुछ हो गया था।।

देव

29 जून 2020

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