मेरे अश्क है तो है,ये जरूत है मेरी,

मेरे अश्क है तो है,
ये जरूत है मेरी,
कभी तेरी या मेरी
कभी फरियाद में,
बहते है,
ये साथ हरदम, मेरे रहते है।

मेरे अश्कों तो,
यू ही नहीं,
बहने की आदत है,
नफ़रत में नहीं, बस
इश्क़ में ये बहते है,
जब तू था करीब मेरे,
अक्सर तुझे देख कर,
निकलते थे, और जब,
दर्द बयान करती थी
तुझे अपना, तेरे
कांधे को गीला करते थे,
तू हो, या ना हो करीब मेरे
ये साथ हरदम मेरे रहते थे।

जुदा जब तू हुआ,
बस ये ही तो थे,
दिन रात मेरा दर्द,
मुझसे सुनते थे,
ना जाने कितने,
दिन ये बहते रहे,
बन्द आंखो से चुप चाप,
यूं गुजरते रहे,
तू नहीं था, करीब मेरे
ये साथ हरदम मेरे रहते थे।

अब तू नहीं है,
नजर के सामने मगर
लगता है, तू है यहीं,
कहीं आसपास मेरे,
महसूस करती हूं अक्सर,
तेरे वो छू जाना,
आकर जरा फुसलाना,
तेरा कानो में मेरे,
महफ़िल हो या
मैं हूं तन्हा, हरदम
दो बूंद आंखो के
कोने में छिपे होते है,
ये साथ हरदम मेरे रहते थे।

मेरे अश्क है तो है,
ये जरूत है मेरी,
कभी तेरी या मेरी
कभी फरियाद में,
बहते है,
ये साथ हरदम, मेरे रहते है।

देव

25/10/2020, 5:32 pm

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