जीने की उम्मीद

दूर, निकल चला था मैं,
कि फिर से उसने दस्तक दे दी,
जिन्दगी, जो ठहरी सी थी वक्त से,
फिर जीने की, एक उम्मीद दे दी।
देव
02/02/2021, 10:53 pm

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