बस याद है तेरी

कुछ धुंधली सी तस्वीर, हो गई मेरी,
वक्त का असर, कुछ यूं हुआ,
बैठ कर आइने के सामने,
जब मैं, खुद से रूबरू हुआ।
भीड़ थी कभी, इस महफिल में,
रोशन थे गुलसिता, कभी गुलशन में,
जो खास बनते थे, कहा अलविदा,
खाली इमारतें है, अब बस मैं हूंँ।
यारो का काफिला, मंजिलों की बातें,
दिन सुनहरे थे और थी चांदनी रातें,
मंजिल जो बदली, और सब बदल गया,
मेरा हमसफ़र, अब बस मैं हूंँ।
ख्वाहिशें तेरी, थी मेरे सपने,
तुझ पर थे कुर्बान, ख्वाब मेरे,
अब तू कहीं, तेरी मंजिल कहीं
बस याद है तेरी, और बस मैं हूंँ।।
देव
09/02/2021, 11:55 pm

Leave a Reply