नज़रों में नमी सी

ना जाने कब, मेरी आंखे,मेरे ज़हन के करीबी हो गई,जब भी याद तुझे किया,नज़रों में नमी सी हो है।देव12/02/2021, 1:22 pm

विश्वास है!

जब प्यार है, तो विश्वास है,जब विश्वास है, तो वादा क्यूं।और वादा है, तो मजबूरी भी है,जो मजबूर हो, वो प्यार क्यूं।।देव 11/02/2021, 11:45 pm

खुशियाँ

कभी पास आती सी, कभी बहुत दूर दिखती है,खुशियाँ अक्सर दिख कर, क्यूं मुंह फेर लेती है,फिर ढूंढता हूंँ यही कहीं, अपने मे फिर से,रहती है खुद में कहीं, बस छिपी रहती है।देव11/02/2021, 5:11 pm

मैं इंसान हूंँ, जमीं वाला

उसके हर गम, हर खुशी में, मैं शामिल हूंँ,मगर जब आंख मेरी, भर आए, मैं तन्हा क्यूं हूंँ।हाल ए दिल जानते है उनका,खबर हर पल की रखते है,आंसू जब बहते है मेरे,उन्हे ना पाऊं, होता क्यूं है।वो फरिश्ता है, मैं इंसान हूंँ, जमीं वाला,मेरे जों खवाब है, उनकी जिन्दगी का लम्हा है,उनकी खुशियों का जश्न … Continue reading मैं इंसान हूंँ, जमीं वाला

खुश रहने का, रहस्य।।

एक हाथ में लाठी, औरकमर पर बच्चा लिए खड़ा था,वो अपने वर्तमान औरभविष्य साथ लिए चला था।बाल उलझे, पावों से चप्पल नदारदबदन पर बस चंद कपड़े थे,मगर चेहरे पर मुस्कान,और हौसले उसके बड़े थे।शायद, पेट आज भी, आधा ही भरा था,बच्चा उसका कुछ कमजोर लग रहा था,मगर शिकन एक नहीं थी,जिंदा है, आज का दिन … Continue reading खुश रहने का, रहस्य।।

बस याद है तेरी

कुछ धुंधली सी तस्वीर, हो गई मेरी,वक्त का असर, कुछ यूं हुआ,बैठ कर आइने के सामने,जब मैं, खुद से रूबरू हुआ।भीड़ थी कभी, इस महफिल में,रोशन थे गुलसिता, कभी गुलशन में,जो खास बनते थे, कहा अलविदा,खाली इमारतें है, अब बस मैं हूंँ।यारो का काफिला, मंजिलों की बातें,दिन सुनहरे थे और थी चांदनी रातें,मंजिल जो बदली, … Continue reading बस याद है तेरी

लिखे थे खत, जो जला दिए

लिखे थे खत जो तुमको वो,जला दिए मैंने,मेरे नाम के किस्से, सबमिटा दिए मैंने।मेरे ख्वाबों में आती थी तू, अबसोता नहीं हूंँ मैं,तू टकरा जाये ना कहीं मुझसे, वहांरहता नहीं हूँ मैं।मिला सबकुछ तो है तुमको, नाम मेरे बस मोहब्बत है,घिरी है तू अपनो से, यहांयादों की महफिल है।देव09/02/2021, 3:02 am

मेरे ज़हन में, अब भी हैं

तन्हाइयो मे, मैंअक्सर रो लेता हूंँ,समझ कर हाथ उनके,आंसू खुद से पोछ लेता हूंँ।है टूटा सा ये दिल, मगर,ये दिल तो उसका है,मेरे ज़हन में, अब भीबसेरा उसका है।नहीं हैं इश्क़ उसको,ना मैं यू याद आता हूंँ,दुआ करता हूंँ उसकी,जब खुदा के दर पर जाता हूंँ।देव09/02/2021, 3:00 am

पैसे है, मगर दिल में जगह कम है।।

ये कविता आज सुबह की एक मुलाक़ात पर आधारित है।पैसे है, मगर दिल में जगह कम है।।सर्दी की ठिठुरती सुबह,और नई दिल्ली का रेलवे स्टेशन,यूं तो अक्सर, ओला या उबेर होती है,मगर, आज लगा, क्यूं ना,ऑटो मे थोड़ा घूमा जाए,ठंड का मजा लिया जाए।चहल कदमी कर, मेन रोड तक आया,इधर देखा उधर देखा, उसने बुलाया,दुबला … Continue reading पैसे है, मगर दिल में जगह कम है।।

ऐ यार, कमाल है ये मोहब्बत।

बेतहाशा हसीन है तो,बेइंतहा बेदर्द भी है,ऐ यार, यही तो है मोहब्बत।कभी जलती है पल में,कभी जलती है सदियों,ऐ यार, बारूद है ये मोहब्बत।रोते को हॅंसाती है तोकभी हंसते को,रुलाती है,ऐ यार, कमाल है ये मोहब्बत।उसकी ना में हाँ का छिपना,और हाँ मे ना का, छिप जाना,ऐ यार, तड़पाती है ये मोहब्बत।देव06/02/2021, 1:25 am

हर साल, एक छोटा सा!

थाम कर तुम्हारा हाथ,सफर यूं कट गया,जिन्दगी का हर मोड,मुस्कुराते गुजर गया।पच्चीस साल, जबबच्चों ने दिलाया याद,तो याद आया,हर साल, एक छोटा सा,दिन नजर आया,हर दिन का वो लम्हा,जब हम करीब थे,बड़ा छोटा पाया,और आज लगता है,शायद बहुत कम ही,वक्त मिल पाया।ना जाने कहाँ वक्त,पलक झपकते निकल गया।।नौकरी, बच्चे, घर,और पचास जिम्मेदारियाॅं,गुजर गए हसीन पल,थोड़ी … Continue reading हर साल, एक छोटा सा!

तुम अमली (प्रैक्टिकल) हो

ये तो शुक्र है कि अभी तुम अमली होऔर मैं संजीदा,कहीं यू ना हो, के वक्त गुजरे,फिर मैं अमली हो जाऊं,और तुम संजीदा।।देवयहां, अमली का मतलब प्रैक्टिकल04/02/2021, 10:47 pm