ये इश्क़ नहीं तो क्या है

तेरी नज़रों का, उठना, उठ कर फिर गिरना
चेहरे पर गिरी जुल्फों का समेटना
कंपकपाते से होंठो से, दो लब्ज़ बोलना
चेहरे पर आती मुस्कान, को रोकना
पल्लू का, अंगुलियों में लपेटना
खोलना, और फिर लपेटना
कभी कभी, नज़रे बचाते हुए
आस पास टटोलना
माथे पर, हल्की सी शिकन
और कुछ पसीने की बूंदे
थोड़ा घबराते, थोड़ा शरमाते हुए
मुझको हैलो बोलना
मेरे बढ़ते हुए हाथो को तकना
तेरे हाथो का, हौले से हटना
फिर रुकना,
तू ही बता, ये इश्क़ नहीं तो क्या है

देव

क्या दमदार तेरी कहानी है


तुम नहीं, तो मैं, मैं नहीं
मेरी, हर ग़ज़ल, तेरी कहानी है
तू है, तो मेरे अल्फ़ाज़ है
तू नहीं, तो बेकार, जिंदगानी है

तू प्यार भी है, तू यार भी है
तू हर सुबह की मेरी, अंगड़ाई है
खुशनसीब हूं, मिले है यार मुझको
वरना, कौन कहता, देव, क्या बात,
क्या दमदार तेरी कहानी है

देव

औलाद मेरी, रहे खुश सदा…

मैं लाई हूं, सितारे जमी पर
तू यकीन तो कर, कुछ पल ही सही

तेरी जिंदगी, है मंजिल मेरी
मेरे परवरिश पर, तू ना शक कर जरा

जागी हूं राते, कि तू चैन से सो
तेरे ख्वाबों को, मंजिल अपनी बनाई

मानती हूं, तू बड़ा हो गया अब
तेरी मंजिले है, मुझसे जुदा

फिर भी दुआ, करती हूं खुदा से
औलाद मेरी, रहे खुश सदा

देव

बीता लो पल प्यार के, जो मिलते है अक्सर

मुसाफिर हूं, बस मंजिल की तलाश है
चला जा रहा हूं, जिंदगी की राहों पर

कभी मुड़ कर भी देख लेता हूं
छूटे है बहुत लोग, थे साथ जो कल तक

अफसोस नहीं, अभी और भी मिलेंगे
चलना है अभी, बहुत दूर तक

यही जिंदगी है, मिलना बिछड़ना
बीता लो पल प्यार के, जो मिलते है अक्सर

देव

तारीफ़

मेरे लफ्जो को पढ़कर,
उनका यू रों देना।
फिर पड़ना, और
तारीफ में हाल ए दिल लिख देना।।

मानता हूं, तुम्हे हंसाने की,
मेरी नाकाम कोशिश है ये।
पर शुक्रगुजार हूं, की मेरी,
कलम की तूने तारीफ करी।।

देव

लगता है, जैसे तेरी दस्तक है….

आज फिर, तेरी तस्वीर मैंने निकाली
अपनी यादों के एल्बम से
वहीं जब थी तू मुस्कुरा रही थी
अपने सितारे के शुभ दिन पे

यकीन नहीं होता, नहीं होगी
तू सामने मेरे फिर यूं ही
पर महसूस कर रहा था तुझे आसपास
जब मना रहे थे जश्न तेरी परछाई का

देख, कहीं कुछ कमी तो नहीं
रखी मैंने, परवरिश में उसकी
तू नहीं, अब मैं ही कर रहा हूं
कमी पूरी तेरे ख्वाबों की

बस, एक बार, देख ले कर
अब भी बस तेरी चाहत है
खोलता हूं दरवाजा, हर आहट पे
लगता है, जैसे तेरी दस्तक है

देव

क्या है गुनाह इस, मासूम मौसम का।।

बारिशें, थोड़ा भिगो गई,
थोड़ा रुला गई।
आज, इस मौसम में,
फिर उसकी याद आ गई।।

बड़ी शिद्दत से करते थे,
मौसम के भिगोने का, इंतजार।
जब बरसता था सावन,
हो जाता था दिल बेकरार।।

अब बरस भी रहा है,
तो कुछ कमी सी है।
बाहों में वो नहीं,
नाही वो तपन सी है।।

फिर भी, निकल ही गया,
चख तो लू, स्वाद,
टपकती नन्ही बूंदों का।।

क्यूं रहूं तन्हा,
क्यूं अधूरे ख़्वाब रहे।।
क्या है गुनाह इस,
मासूम मौसम का।।

देव

अब उसे मां होने का अफसोस नहीं है

वो बैठी, मुस्कुरा रही थी
कुछ बड़ बड़ा रही थी
मैं, जरा पास जाकर, सुनने लगा
उसकी हर सांस से, खुश रहना, आवाज आ रही थी

घर बहुत बड़ा,
बेटे का भी कमरा रखा है सजा
लगता है, रहता है दूर, सात समंदर पार
अब तो याद भी नहीं,
कब आया था पिछली बार
पर उस अब भी यही लगता है
अरे, सुबह ही तो दफ्तर गया है
खाना बना रखा है
शाम को वो थका मांदा घर आएगा
बाहर से ही पुकरेगा,
मां, भूख लगी है, कुछ खिला दो

इसीलिए वो आज भी रोज सुबह उठती है
नाश्ता, लंच, डिनर वक़्त पे तैयार करती है
अपने हाथो से उसे खिलाती है
बालों में अंगुलियों फेर आज भी सुलाती है

रात में अक्सर उठ जाती है
हर दस्तक पर, मुझे उठाती है
जरा देखना, मेरा लाल आया होगा
छोड़ो, तुम्हे कोई परवाह नहीं
बाहर, बारिश है, भीग गया होगा
तू जरा heater on कर दो
मैं टॉवेल निकालती हूं

पगली, किस दुनिया में रहती है
जागते हुए सपने देखती है
वो दूर नहीं, बहुत दूर जा चुका है
अपनी नई दुनिया बसा चुका है
नहीं, वो कहीं यूएस या कनाडा में नहीं
यही, इसी देश में ही रहता है
पर, फुरसत में नहीं जीता है
बस कभी, आजकल मेरी फोन पर बात हो जाती है
मीटिंग में हूं, या ड्राइव कर रहा हूं
चंद पलों में, बात खतम हो जाती हैं

और वो पहली, जाने क्या समझती है
मैंने भी अब समझाना बंद कर दिया
वो खुश है अपने ख्वाबों में
मुझे भी इससे सब्र है
कम से कम अब रोटी तो नहीं है
अब उसे मां होने का अफसोस नहीं है

देव

अभी भी खाली है, तेरी जगह बगल में..

It’s for my friend.. who lost his love few months back… And today is birthday of his son…

आज फिर, तेरी तस्वीर मैंने निकाली
अपनी यादों के एल्बम से
वहीं जब थी तू मुस्कुरा रही थी
अपने सितारे के शुभ दिन पे

यकीन नहीं होता, नहीं होगी
तू सामने मेरे फिर यूं ही
पर महसूस कर रहा था तुझे आसपास
जब मना रहे थे जश्न तेरी परछाई का

देख, कहीं कुछ कमी तो नहीं
रखी मैंने, परवरिश में उसकी
तू नहीं, अब मैं ही कर रहा हूं
कमी पूरी तेरे ख्वाबों की

खोलता हूं दरवाजा, हर आहट पे
तेरी दस्तक समझ कर
क्या पता, कब तू आ जाए
अभी भी खाली है, तेरी जगह बगल में

देव

खुद ही को ठीक करते है।।

शुक्रिया उनको अदा,
जो तन्हा मुझे छोड़ गए।
कुछ पहचान उनकी मिली,
बहुत खुद को पहचान गए।।

अब, करे भी तो क्या,
आइने में खुद को देखते है।
खुद में गलती दुंडते है,
खुद ही को ठीक करते है।।

देव