लगता है, जैसे तेरी दस्तक है….

आज फिर, तेरी तस्वीर मैंने निकाली
अपनी यादों के एल्बम से
वहीं जब थी तू मुस्कुरा रही थी
अपने सितारे के शुभ दिन पे

यकीन नहीं होता, नहीं होगी
तू सामने मेरे फिर यूं ही
पर महसूस कर रहा था तुझे आसपास
जब मना रहे थे जश्न तेरी परछाई का

देख, कहीं कुछ कमी तो नहीं
रखी मैंने, परवरिश में उसकी
तू नहीं, अब मैं ही कर रहा हूं
कमी पूरी तेरे ख्वाबों की

बस, एक बार, देख ले कर
अब भी बस तेरी चाहत है
खोलता हूं दरवाजा, हर आहट पे
लगता है, जैसे तेरी दस्तक है

देव

क्या है गुनाह इस, मासूम मौसम का।।

बारिशें, थोड़ा भिगो गई,
थोड़ा रुला गई।
आज, इस मौसम में,
फिर उसकी याद आ गई।।

बड़ी शिद्दत से करते थे,
मौसम के भिगोने का, इंतजार।
जब बरसता था सावन,
हो जाता था दिल बेकरार।।

अब बरस भी रहा है,
तो कुछ कमी सी है।
बाहों में वो नहीं,
नाही वो तपन सी है।।

फिर भी, निकल ही गया,
चख तो लू, स्वाद,
टपकती नन्ही बूंदों का।।

क्यूं रहूं तन्हा,
क्यूं अधूरे ख़्वाब रहे।।
क्या है गुनाह इस,
मासूम मौसम का।।

देव

अब उसे मां होने का अफसोस नहीं है

वो बैठी, मुस्कुरा रही थी
कुछ बड़ बड़ा रही थी
मैं, जरा पास जाकर, सुनने लगा
उसकी हर सांस से, खुश रहना, आवाज आ रही थी

घर बहुत बड़ा,
बेटे का भी कमरा रखा है सजा
लगता है, रहता है दूर, सात समंदर पार
अब तो याद भी नहीं,
कब आया था पिछली बार
पर उस अब भी यही लगता है
अरे, सुबह ही तो दफ्तर गया है
खाना बना रखा है
शाम को वो थका मांदा घर आएगा
बाहर से ही पुकरेगा,
मां, भूख लगी है, कुछ खिला दो

इसीलिए वो आज भी रोज सुबह उठती है
नाश्ता, लंच, डिनर वक़्त पे तैयार करती है
अपने हाथो से उसे खिलाती है
बालों में अंगुलियों फेर आज भी सुलाती है

रात में अक्सर उठ जाती है
हर दस्तक पर, मुझे उठाती है
जरा देखना, मेरा लाल आया होगा
छोड़ो, तुम्हे कोई परवाह नहीं
बाहर, बारिश है, भीग गया होगा
तू जरा heater on कर दो
मैं टॉवेल निकालती हूं

पगली, किस दुनिया में रहती है
जागते हुए सपने देखती है
वो दूर नहीं, बहुत दूर जा चुका है
अपनी नई दुनिया बसा चुका है
नहीं, वो कहीं यूएस या कनाडा में नहीं
यही, इसी देश में ही रहता है
पर, फुरसत में नहीं जीता है
बस कभी, आजकल मेरी फोन पर बात हो जाती है
मीटिंग में हूं, या ड्राइव कर रहा हूं
चंद पलों में, बात खतम हो जाती हैं

और वो पहली, जाने क्या समझती है
मैंने भी अब समझाना बंद कर दिया
वो खुश है अपने ख्वाबों में
मुझे भी इससे सब्र है
कम से कम अब रोटी तो नहीं है
अब उसे मां होने का अफसोस नहीं है

देव

अभी भी खाली है, तेरी जगह बगल में..

It’s for my friend.. who lost his love few months back… And today is birthday of his son…

आज फिर, तेरी तस्वीर मैंने निकाली
अपनी यादों के एल्बम से
वहीं जब थी तू मुस्कुरा रही थी
अपने सितारे के शुभ दिन पे

यकीन नहीं होता, नहीं होगी
तू सामने मेरे फिर यूं ही
पर महसूस कर रहा था तुझे आसपास
जब मना रहे थे जश्न तेरी परछाई का

देख, कहीं कुछ कमी तो नहीं
रखी मैंने, परवरिश में उसकी
तू नहीं, अब मैं ही कर रहा हूं
कमी पूरी तेरे ख्वाबों की

खोलता हूं दरवाजा, हर आहट पे
तेरी दस्तक समझ कर
क्या पता, कब तू आ जाए
अभी भी खाली है, तेरी जगह बगल में

देव

खुद ही को ठीक करते है।।

शुक्रिया उनको अदा,
जो तन्हा मुझे छोड़ गए।
कुछ पहचान उनकी मिली,
बहुत खुद को पहचान गए।।

अब, करे भी तो क्या,
आइने में खुद को देखते है।
खुद में गलती दुंडते है,
खुद ही को ठीक करते है।।

देव

Random thoughts.

तलाश, तुझे भी है, मुझे भी
राहत ए दिल, हमसफ़र की

पर ना तू, देखती है, ना मैं पहचानता हूं
पर्दा अहम का, चढ़ा के जो बैठे

देव

बस, अपनी कलम से,
यारो की दर्द को,
काजग पर उकेरता हूं
कितनी नादान है वो
समझती है मैं
याद में उसकी लिखता हूं

देव

कब तक अपनी नाकामयाबियों का इल्ज़ाम।
वक़्त और हालात पे डालते रहोगे।।
कितनी बातो को भुलाते रहोगे।
कितनी यादों को मिटाते रहोगे।।

काश! तुम मैं, और मैं तुम बन जाऊं।
तू मेरा दर्द, मैं तेरी ख्वाहिशें समझ पाऊं।।

बख़्शी है, खुदा ने ज़बान तुमको,
नहीं अदा किया खुदा ने, ये हुनर हमको।
हम तो बस यूं ही, लकीरें बनाते है,
रंग भर जिंदगी, तुम करती हो अदा।।

देव

रूह मेरी, कोई जिन नहीं,
जो तू कैद कर ले जाएगी।।
बहता दरिया हूं में,
नादान, तू खुद ही बह जाएगी।।
देव

मौसम भी आजकल, धोका देता है
जब वो नहीं होती, हसीं होता है

देव

काश! तुम मैं, और मैं तुम बन जाऊं।
तू मेरा दर्द, मैं तेरी ख्वाहिशें समझ पाऊं।।

देव

शुक्रिया उनको अदा,
जो तन्हा मुझे छोड़ गए।
कुछ पहचान उनकी मिली,
बहुत खुद को पहचान गए।।

अब, करे भी तो क्या,
आइने में खुद को देखते है।
खुद में गलती दुंडते है,
खुद ही को ठीक करते है।।

देव

चलो, इस जहां में तो काफी उलझने है
सवारने में वक़्त क्यू गुजारे
सपनो में ही सही, पास तो है तेरे
आज फिर चलते है, मुसाफिर बनकर

देव

कब्बख्त, फिर भी हो जाता है
क्या करे, ऐतबार है, पर प्यार नहीं

देव

नजर बंद करके, देखो इकबार
तेरी गलियों के रहगार है हम
देव

जिंदगी अनमोल मिली है तुझको
मेरे इंतजार में, यू जायां ना कर
हर मोड़ पे मिलेंगे, हजार अफसाने
मेरे फसाने पे, ऐतबार ना कर
देव

चाशनी, जैसे तेरे लब्जो को
सुनने की ललक लगती है
जब भी चीनी काम होती है
तेरी बातों से चाई बनती है।

देव

अब डूब भी जाए तो क्या
जनाजे को, तेरे आशिक़ के,
कागज का ही सही
कफ़न तो नसीब होगा

देव

आवारगी भी क्या, अब सलीके से करे
सलीका था जब तक, तो हाल ये कर बैठे

देव

तेरी खुद्दारी की जो बात है
ईमान मुझमें भी बाकी है अभी

देव

बस, याराना रहने दे
इसे कुछ और ना बना
अक्सर,
पहचान बदलने से
लोग बदल जाते है

देव

प्यार, क्यूं यू ही कर ले

प्यार, क्यूं यू ही कर ले
आसान नहीं है, अब दिल को लगाना
दर्द, जो मिले है, अब तक
मुश्किल है बहुत, उन्हें भूल जाना

विश्वास है टूटा, घर है छूटा
झूठा है तेरा, मुझसे दिल लगाना
तेरे सपनो में आना मेरा
सच नहीं ये अफसाना

अब, किस पर, विश्वास करे हम
अब किसको, फिर दिल में बसाए
अब क्यूं हम, दिल अपना तोड़े
अब नहीं बनाना, हमे कोई तराना

देव

सुबह

क्यूं परेशा हैं इंसा
यूं ही नहीं मिली ये जिंदगी,
जीलेे इसे शिद्दत से
कुछ पल जो मिले है उधार
गुजार इन्हे हंसते हुए
रों लिया है तू बहुत मुद्दत से

हर रोज, नया दिन, नई रोशनी
नई किरण, नया जीवन
हर रोज करनी है, जीने की
फिर वही मेहनत
हर रोज, कुछ पलो में
झलकेगा बुढापा
हर रोज, करना पड़ेगा
जीने का स्यापा
हर रोज मौत आएगी
दर पर यहां तेरे
हर रोज मुलाकात होगी
खुदा से मेरे

फिर क्यूं उदास है
राते काली देखकर
कुछ पल सो जा चैन से
कुछ मर गुजार मौन के

सुबह फिर से आएगी
नया जीवन, नए सपने
नई खुशियां, नए अपने
ख्वाहिशें नई लेकर

देव

प्यार इक सजदा है

प्यार इक सजदा है,
जितना करो, कम लगता है।

इश्क़ एक जूनून है
जैसे जिस्म में रूह,
और शरीर में खून है

ये बात अलग है
जब दूध से जलते है
तो छाछ भी फुक कर पीते है
और इश्क से झुलसते है
तो नज़रे मिलाने में भी,
तौहीन समझते है

देव

या तो मुझे अपना ले, या कहीं दूर निकल जा।।

मेरे ख्यालों में, बसने वाले।
तेरे ख्यालों में, क्या मेरा बसर है।।
तू वक़्त के आगोश से, आया मेरी गलियों में,
तेरे मोहल्ले में, मेरा सफर है।।

जब शाम ढलती है, या दिन निकलता है।
मेरे अस्तित्व में हर पल, तू खिलता है।
क्या तुझे भी, मेरे होने का अहसास है।
या, यू ही मेरे सामने, तू दिखावा करता है।

पहले ही जिंदगी मेरी, ज़ख्मों से लदी है।
तू जो मिला, जीने की इक आस जगी है।
अब है नहीं मुमकिन, सम्हालू दिल को में अपने।
या तो मुझे अपना ले, या कहीं दूर निकल जा।।

देव