वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है

वो आज भी मेरे पहलू में बैठा है
मैं आज भी उसकी बाहों में समाई हूं
वक़्त दूर, बहुत दूर ले गया उसे मुझसे
तो क्या, दिल में अब भी यादें समाई है

खोल लेती हूं अक्सर, मेरे यादों का पिटारा
कुछ फैला है, एल्बम में,
काफी शोक था उस फोटो खींचवाने का
और कभी खोल लेती हूं, अलमीरा उसकी
अब भी उसके कपड़ों में वहीं भिनी महक आती है
अब भी, मेरी हथेली, आज क्या पहनोगे
सोचते हुए, शर्ट निकलती है
अब भी, उसकी फोटो में उसकी हंसी सुनाई देती है
अब भी घर में अक्सर, जरा सुनना, की आवाज आती है

बस, यही बहुत है, मेरे अकेले जीवन को रंगीन करने को
अब दिल नहीं करता फिर से मोहब्बत करने को
करू भी कैसे, दिल तो एक बार लगा चुकी हूं मै
और वो ले गया हमेशा के लिए, किसी और दुनिया में
और छोड़ गया है यादें अपनी, ढेर सारी
हर अवसर पे अपनी तस्वीर दिखाने को
उसे पता था, अकेलापन बर्दास्त नहीं है मुझे
इसलिए छोड़ गया किस्से हजार, मन बहलाने को

देव

दिल में है जीने के अरमान, जी रहे है हम

आज फिर सुबह हुई, और मैं थोड़ा तफरी पर निकली
बगीचे में कुछ लोगो से का हुजूम दिखा
लगा गपशप में मगशूल होंगे
चलो हम भी शरीक होते है
कुछ सुनेंगे कुछ सुनाएंगे
थोड़ा हंसने बहुत हसाएंगे

बस, इसी उम्मीद से चल दी
उसी भीड़ में मिल गई
पर ये क्या, यहां तो शिकायतों का अंबार था
चिंताओं का विशाल पहाड़ था
नाम तो जानती नहीं में किसी का
पर कुछ को पहचानती हूं
सब्जी या दूध वाले की तरह
सबके नाम जानती हूं

झुमके वाली को अपने बच्चे की बड़ी चिंता है
कि वो बस दिन चार घंटे पड़ता है
पता नहीं, इस तरह उसका भविष्य क्या होगा
नहीं और पड़ेगा तो नौकरी में फिसड्डी होगा

और वो, ठुमकने वाली की थी चिंता निराली
उसका वजन कम हो गया है
लगाया है कमर में बाल भी पड़ गया है

टून टून्न आंटी को भी वजन की चिंता है
पूरा बदन उनका टायरो से बना है
बस दिन में 6 बार ही तो खाती हूं
फिर भी पतली नहीं हो पाती हूं
वैसे घर उनका बेलेंस है
पति के शरीर में मास का नहीं अवशेष है

हाय रे, अब इस सुंदरी को भी चिंता हो सकती है
इसी बात पार मेरी नज़रे टिकी है
पर वो भी परेशान है
पति उसका नहीं करता नज़रे चार है
जब देखो काम में व्यस्त रहता है
जब कहती हूं सुनो, एक और डायमंड दिला देता है

ये है हमारी, किटी, जिन्हे किटी पार्टी का शौक है
और औरतों के लिए होता उन्हें अफसोस है
कभी इसकी, तो कभी उसकी चुगली चलती रहती है
नहीं रुकती जुबां उनकी, चलती रहती है

कुछ देर इस कचर पचर में बीता
सोचा, मेरी जिंदगी कूल है
ना पति की परवाह, ना कुछ पाने का फितूर है
बच्चा है, पर उसे अपने हाल पे छोरती हूं
मैंने क्या उखाड़ लिया,
यही सोच उसे परेशा नहीं करती हूं
नहीं परवाह मुझे आज क्या होगा
और पति है नहीं, जिसके ना देखने पे अफसोस होगा
वजन कुछ कम ज्यादा हो भी गया तो क्या गम
दिल में है जीने के अरमान, जी रहे है हम
बस यही सोच, वापस घर चल दी
बैठ कर आराम से सोफे पर
सुनते हुए गाने मनपसंद,
लेने लगी कॉफी की चुस्की

देव

उनकी अमीरी देख आए ये विचार है।

ना घर में टीवी, ना हाथ में मोबाइल
ना खिलौनों की भरमार है
नटखट सी अठखेलियों में गुजरता है दिन
रात में सपने अपार है

ना फ़िक्र कुछ खोने की, बस पाने की चिंता
समझते है जिंदगी को करीब से
उम्मीद इनकी कायम है

आज एक और दिन गुजर जाए
बस, दो वक़्त का खाना मिल जाए
देख ले अपनों को चैन से सोते हुए
यही इनके जेहन में आते विचार है

बदन पर चंद कपड़े, पर खुशी अपार है
गुजारते है वक़्त, साथ में प्यार से, समझते है दिन चार है

हां, ये अमीर नहीं, जिनके पास बंगला है कार है
जिन्हे हम गरीब कहते है,
उनकी अमीरी देख आए ये विचार है।

देव

अदा तेरी, कुछ कम ना थी

अदा तेरी, कुछ कम ना थी
उस पर, तेरा, जरा सुनना, बोलना
मेरा मुड़ना, तेरा एकटक देखना
फिर कुछ नहीं बोलना
मुस्कुराना, सिर को होले से झुकना
सारी का पल्लू, अंगुलियों में बांधना
फिर खोलना, फिर बांधना
मेरा पलटना, और तेरी हल्की सी खंखरना
बस, हर बार यही सिलसिला ही तो
मुझे दीवाना बनाता है
तेरे और करीब लाता है

तेरा नाम, मेरे फोन पे आना
मेरा हैलो बोलते हुए फोन उठाना
कुछ देर का सन्नाटा,
उसे चीर कर, तेरी सांसों की आवाज आना
धीमी आवाज में, कहा हो बोलना
और फिर बिना रुके दस और सवाल पूछना
मेरी आवाज़ से मेरा हाल जानना
ध्यान रखना अपना, मुझे ये बताना
बस, हर बार यही सिलसिला ही तो
मुझे दीवाना बनाता है
तेरे और करीब लाता है

घंटी बजने के पहले, दरवाजा खोलना
अंदर आने के पहले, लेट क्यूं ही गए पूछना
थक गए होगे, कह कर बैठाना, एक गिलास पानी पिलाना
साथ में बैठ, चुस्की चाय की लेना
चाय में मीठा भूल, अपनी अंगुली को हिलाना
मेरे माथे को रख गोदी में, सहलाना,
और मुझे देखते जाना
बस, हर बार यही सिलसिला ही तो
मुझे दीवाना बनाता है
तेरे और करीब लाता है

देव

आज फिर उसने पलट कर देखा

आज फिर उसने पलट कर देखा
मेरे जज़्बात को उलट कर देखा
नज़रों में ही हाले दिल बयां कर गई
मंजिल कुछ कदम और करीब आ गई

कोशिशों को मेरे एक मुकाम मिला
बेकार दिल को मेरे एक काम मिला
नींद कब की रुसवा बैठी थी मुझसे
सपने सजने का, कारोबार मिला

देव

मोहब्बत करने की कुछ वजह तो दो, क्यूं में बेवजह कर लूं।

मोहब्बत करने की कुछ वजह तो दो, क्यूं में बेवजह कर लूं।
पहले ही, क्या कम दाग़ लगे है हम पर, क्यूं मैं एक और गुनाह कर लू।।

अभी तो हरे है जख्म मेरे, जो दिए थे कभी, जान ने जान पे।
जान, ना निकली, ना छोड़ी, बेगैरत वो बला निकली।।

अभी भी मुलाकात होती है अक्सर, अभी भी ढूंढ़ते है वो अक्स मेरा।
मगर कौन समझाएगा उनको,
जिंदगी मिलती नहीं, बेजां सूखे दरखतो में।।

देव

कृष्ण बसे है मुझमें, तुझमें हर कण कण में।

कृष्ण बसे है मुझमें, तुझमें हर कण कण में।
फिर क्यूं ढूंढे तू खुदा के, मंदिर में मस्जिद में।।

मन ही मंदिर, मन ही मस्जिद, मन ही तो गुरुद्वारा है।
मूरत उसकी जहां बसा लो, वहीं समझो उपासना है।।

स्वयं को ढूंढ ले बंदे पहले, तू खुदा का साया है।
प्यार खुद से तो पहले करले, बाकी सब तो माया है।।

देव

तू हर वेश में जंचती है

तू हर वेश में जंचती है,
हर रंग तुझपे फबता है
तू फैशन नहीं करती
फैशन तुझसे निकलता है

ये पहली बार नहीं, देखा है पहले भी कभी
तेरी जुल्फों से तेरा हुस्न और निखरता है

नज़रे रुक जाती है, कदम थम जाते है
साडी का पल्लू, तेरे कंधे पर जब सिमटता है

तेरा अंदाज़, तेरा तीखापन, तेरा अफसाना
तेरी साड़ी की सलवटों में, झलकता है

देव

आशिकों की आज, दीवाली आई है

बला की खूसूरती, नजर आईं है
जैसे हूर खुद, जमीं पर उतर आई है

माथे पर बिंदी, हाथो में कंगन
और नीली सारी में, तुम पर खूब भाई है

माना महीना सावन का, गुज़र गया यू ही
तेरे लहरिए ने, कितनो पर बिजलियां गिराई है

बलखाई कमर को कस, कंधे से लटकते पल्लू ने
रास्ते में मजनुओं की, कतार लगाई है

घर से निकलना, जरा सम्हाल के हसीना
आशिकों की आज, दीवाली अाई है

देव

मेरे वजूद को रोशनी देती है

दूरियां भी कभी मायने रखती है
तुझे देखने का मौका देती है

पाने की ख्वाहिश मैं रखता नहीं
तुझे देख सकूं हर दिन, तमन्ना यही रहती है

निहार सकता हूं मैं तुझे बेपनाह
करीब नहीं, पर यही है उम्मीद बनी रहती है

तुझे छूकर आती रोशनी की किरणे
मेरे वजूद को रोशनी देती है

देव