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हां, तेरी बातें मेरे जेहन में आज भी कहीं रहती हैं।

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नन्ही सी थी तू,
जब पहली बार,
तूने मेरी बाजुओं मेंरख
सर अपना,
बड़ी मासूमियत से,
मुझे आवाज दी।
वो आवाज़ आज भी
मेरे कानो में गुंजाई देती है
हां, तेरी आवाज़ मेरे जेहन में
आज भी कहीं रहती है।

तेरा पहली बार
घुटनों पर खिसकते हुए
दरवाजे की चौखट पर कर
बगीचे में जाना,
झट से अपने छोटे हाथो से
मिट्टी को उठाना और
नज़रे बचा कर, चट कर जाना।
हौले से छिपते छिपाते
तेरे करीब आना
और तेरे गालों पे
प्यार भरे गुस्से से
हौले सी चापत मारना
फिर तेरा जी भर के रोना
आज भी कानो मे सुनाई देती है

हां, मासूम सूरत मेरे जेहन में
आज भी कहीं रहती है।

मेरी बातों को टटोलना
अपनी आवाज में इतरा
तुतला कर बोलना
तेरा रूसना, मेरा मनाना
तुझे बाइक पे आगे बैठा घुमाना
बड़े लाड़ से मुझे पटाना
अपने पसंद के खिलौने पाना
कभी, ना मिलने पर भी
बचपन में समझ जाना

हां, तेरी बातें मेरे जेहन में
आज भी कहीं रहती हैं।

देव

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