सुबह होने से पहले, जिंदगी जी लेना

हारे भी है तो क्या
जिताया भी उन्हीं को
जिन्हे समझा था अपना
वो चले भी जाएं तो क्या
हम अब भी यही है
जहां दिल है अपना

रास्ता अभी बाकी है
मंजिले और भी है
मिलेंगे अभी बहुत हमसफ़र रहो में
उदास ना हो
बस, इक रात ही तो निकली है
फिर दिन निकलेगा, शाम होगी
फिर महफ़िल जवान होगी
फिर तेरे हाथो में जाम होगा
फिर लबों पर किसी का नाम होगा

बस, इस बार, रात को गुजरने ना देना
कुछ यू, अपनी अदाओं का अंदाज रखना
उसकी आंखो से ओझल ना होना
मोहब्बत का अपनी इजहार करना
सुबह होने से पहले, जिंदगी जी लेना

देव

हुस्नरा है तू, दिलो पे राज करती है

तेरा नाम तेरी खूबसूरती बयां करता है
हुस्न तेरा तेरी आवाज से बरसता है

तू दूज के चांद सी दिखती है
तेरे चेहरे से चांदनी झलकती है

ये नज़रे देखने को तुझे तरसती है
दिल की धड़कन, बस तेरे लिए धड़कती है

यू ही नहीं, आशिकों की फौज तुझपे मरती है
हुस्नरा है तू, दिलो पे राज करती है

देव

क्या मिला , जो तुम इंजिनियर हो गए हो

पसंद को भुला, जरूरतों में खो गए हो।
ऐ मेरे यारो, तुम कहा को गए हो।।

कितने अरमानों से, सजाए थे सपने
रातों जाग जाग कर, पड़ते थे संग में
सुनते थे आनी मोहब्बत का फसाना
जिंदगी में कुछ तो है ,कर के दिखाना

अब कहा नौकरी के फेर में पड़ गए हो
ऐ मेरे यारो, तुम कहा को गए हो।।

वो डिफरेंशियल से निकल, इंटेगरेशन में फंसना
वो नींदों में क्वेश्चंस का सॉल्व करना
वो वॉल्व से लेकर माइक्रो प्रोसेसर का सफर
वो बाइनरी में गर्ल फ्रेंड को लिखना खत

तुम कहा ईमेल की दुनिया में फस गए ही
ऐ मेरे यारो, तुम कहा को गए हो।।

वो आशिकी में भी जब मिलते थे साइंस
केमिस्ट्री की इकुवेशन दिलो में लगाई
लैब के कोने में, वों कसमसाई
थके चेहरों से भी, निकली अंगड़ाई

कहा तुम कमाने की फ़िक्र में पड़ गए हो
ऐ मेरे यारो, तुम कहा को गए हो।

क्या मिला , जो तुम इंजिनियर हो गए हो
पसंद को भुला, जरूरतों में खो गए हो।
ऐ मेरे यारो, तुम कहा को गए हो।।

देव

पौशिका

नन्हे नन्हे हाथों को
बड़े सलीके से हिलाते हुए
चेहरे की पलकों को बनाते
आंखो को झिलमिलाते हुए
कभी होठो को मिचकाना
कभी थोड़ा रुक कर
कुछ सोच कर
कुछ और बोल जाना
उसकी लगातार चलती बातों का
ट्रेन की पटरी की तरह
दूर तलक जाना
और हर एक प्रश्न पर
बड़ा सा निबंध
उत्तर में पाना
फिर भी, किसी के माथे पर
हल्की सी शिकन का ना आना
जैसे, पैसों की बारिश में
बिना थके बटोरना
लगे थे सब उसकी तुतलती जबान में
उसकी सारी कहानी सुनना
कितनी, परवाह से हर बात को
बड़े गौर और सोच कर बताती है
वो हर बात समझने के लिए
ठहर सोच कर, शब्द लाती है
कभी सोचता हूं कितनी प्यारी सी
दिखती है ये
कभी सोचता हूं, हमसे बहुत आगे
निकली है ये
अभी उतरी पारियों के देश से
परी है ये
कोई और नहीं, नन्ही सी
प्यारी से, पौशिका है ये।

देव

ये मोहब्बत सबको रास नहीं आती है।

ये मोहब्बत सबको रास नहीं आती है।
कुछ है जिन्हे, दिल की, आवाज नहीं आती है।

ना दर्द, बसता है दिलो में उनके।
ना इश्क़ का जुनून मिलता है।
प्यार के नाम पर, इस बाज़ार में।
हवस का हुनर मिलता है।

जिसे देखो, अपनी जरूरतें लेकर बैठा है।
अहम है साथ, और आस लगाए बैठा है।
मेरी जिंदगी को, अपनी समझ बैठा है।
अपने जिस्म और हुस्न का बाज़ार लिए बैठा है।

जिसे देखो, वहीं मगशूल है जमाने में।
भूल सपने अपने, लगा है कमाने में।
वक़्त की भीख मांगते है, अपने ।
दिलो अब कहा बचे है सपने।

अभी भी वक़्त है, जरा सम्हाल जाओ।
अपने दिल की आवाज सुनो, उठ जाओ।
पहचानो, प्यार को अपने, सपने पहचानो।
मोहब्बत कर को जरा, इश्क़ बरसाओ।
अपना बनाओ किसी को, किसी के हो जाओ।
कुछ वक़्त, अपनों के साथ बिताओ जरा।
पता नहीं वक्त , हो जाए पूरा।

देव

पूजा क्यूं था, क्यूं दी थी मुझे इज्जत इतनी

इस बार फिर से मुझे, बड़ी इज्जत से घर बुलाया गया।
अपने आंगन के मंदिर में, सजाया गया।
मन्नतों की बारिश, हर जुबान से हुई।
हर बंदे ने, मेरे चरणों में शीश नवाया।

किसी ने दो, किसी ने चार दिन का मेहमान बनाया।
ढोल, ताशो, नगाढो से जश्न बनाया।
बैठा मुझे पालकी में, कंधो पर घुमाया।
और अगले साल फिर बुलाने के अरमान लेकर,
पूरे सम्मान के साथ, मेरा विसर्जन कराया।

और फिर भूल गए, मुझे छोड़ कर
उस कीचड़ के दल दल में
जो बैठाते थे सिर पे कभी
बहाते है मैला, उसी दल दल में
जरा सी हया नहीं अाई
जो हाल ये मेरा किया उन्होंने
चंद ख्वाहिशों के खातिर
क्यूं कीचड़ में छोड़ दिया मुझे उन्होंने

पूजा क्यूं था, क्यूं दी थी मुझे इज्जत इतनी
किस आधार पर करू, मन्नते पूरी उनकी
बस, सब भीड़ में चले जा रहे है
खो कर सोच अपनी, अंधे हुए जा रहे है

देव

नई मंजिले, नए रास्ते

नई मंजिले, नए रास्ते,
कुछ पास है, कुछ में फांसले
कुछ बेफिकर, कुछ परेशान से
कुछ दूर चल, मिलेंगे और राह में।।

लोग देखते है, देखने दे
वो क्या चाहते है, ना फ़िक्र कर
नया दिन है ये, नया काम कर
कल भूल जा, नई शुरुआत कर

खुद पे यकीं, कर ले जरा
खुद खुदा ने, तुझको रचा
जो पल मिले, खुश हो जरा
जाने फिर कब, मिल जाए खुदा

मंजिले अपनी बना,
मुकाम की तलाश कर
हमसफ़र मिल जाएंगे
रास्ते इख्तियार कर

देव

तकिए से, कुछ बात हुई


सिरहाने रखें तकिए से, कुछ बात हुई
रातों में नींद क्यूं नहीं आती,
चर्चा की शुरुआत हुई
क्यूं मैं जागती हूं तन्हा रातों में
क्यूं नहीं आते है सपने सुहाने
क्यूं तैरते रहते है जेहन में, पुराने अफसाने

तकिए ने कहा: ये बस तेरी नहीं
हर किसी की कहानी है
फ़िक्र तुझे आज की नहीं
क्या हुआ कल, अफसोस की कहानी है
आंखे मूंदे तू, अपना वजूद ढूंढ़ती है
दिया जिनको तूने जीवन
उन्हें टटोलती है
हद से ज्यादा अहमियत दी है
हर किसीको
चाहे वो चाहते थे तुझे
या किसी और को
गलती तेरी नहीं,
खुदा ने बनाया ही कुछ ऐसा है
तेरे दिल में मोहब्बत है
ना शिकायत है ना धोका है
तेरी अहमियत ये तब समझेंगे
जब तू नहीं रहेगी
तेरी याद में तड़पेंगे

मैंने कहा, क्या करू ऐसा की चैन से सो पाऊं
हाल ऐसा भी नहीं की कुछ पल को मर जाऊं

तकिए ने फरमाया
निकाल कुछ पल, अपने लिए
कभी खुद से भी मिल
क्या पाना था तुझको
जरा, एक बार तो पूछ
ये सब, बस मुसाफिर है
आना जाना लगा ही रहता है
तू ठहर, कुछ सांस ले
अपने दिल की आवाज सुन

अभी जिंदगी और भी बाकी है
अभी तो शाम हुई है रात बाकी है
जवां दिल की धड़कने अभी भी है
तेरे चेहरे पे चमक अभी भी है

जो चला गया उसे भूल जरा
आज को जीलेे जरा
अफसाने और बनेंगे, तू बना तो सही
दिल फिर किसी को चाहेगा
तू मुड के देख जरा
तेरे सपनों में फिर से कोई आएगा
रखते ही सर तेरा मेरे पहलू में
तुझे सपनों के चमन में के जाएगा

देव

तू कोई और नहीं, मेरा ख्वाब है।

तू कोई और नहीं, मेरा ख्वाब है।
जुस्तजू जिसकी करी, वो मेहताब है।।

तेरे आने से रोशन, ये कायनात हुई।
दूज का चांद है और चौदहवीं की रात हुई।।

बरस पड़ी है कलियो की, बौछारें चमन में।
खिलखिलाहट निकली, जो तूने लबों से।।

इश्क़ छाया है हवा में, मोहब्बत की है बारिश।
तेरी सांसों की नमी से, फिजा बहकी सी है।।

बुझ दे जरा आकर तू मेरी बाहों में
जाने कब से, आग दिल में मेरे, लगी सी है।

देव

क्यूं लोग जजमेंटल हो जाते है

क्यूं लोग जजमेंटल हो जाते है
क्यूं नहीं सत्य को समझ पाते है

बस, कुछ पल ही सही
बाटने खुशियां, बटोरने गम जाता हूं
और भी है मेरे जैसे
जिन्हे सम्हालने में कुछ वक़्त बीतता हूं
पर कुछ लोग इमोशनल हो जाते है
क्यूं लोग जजमेंटल हो जाते है

बस एक ही रिश्ता,
नहीं रह गया आदमी और औरत के बीच
कुछ रिश्ते समझ से परे
गहराइयों तक जाते है
कम समझ के लोग अपने कयास लगाते है
क्यूं लोग जजमेंटल हो जाते है

तन्हा मैं भी हूं
तन्हा और भी है जहां में यहां
कुछ पल मिलते है
और सब अपने गम भूल जाते है
उन्हीं मुलाकातों के लोग किस्से बनाते है
क्यूं लोग जजमेंटल हो जाते है

छोड़ो, मुझे क्या मतलब
मैं मनमर्जिया, जीता हूं जिंदगी अपनी
खुदा ने दिया है सुख भी दुख भी
पर हर पल में, जीता हूं जिंदगी अपनी
छोर दिया सोचना, लोगो के बारे में
वो, कुछ लोग, जो जजमेंटल हो जाते है

देव