चल यार, आज कुछ नया करते है

एक नया रास्ता, नई मंजिल चुनते है,
चल यार, आज कुछ नया करते है,

बहुत भटक लिए, अनजान राहों पर,
अपने से बेगाने, इंसानों से, जरा दूर चलते है,
चल यार, आज कुछ नया करते है,

इंतेज़ार, एक हद तक, करती है जिंदगी भी,
जिन्हे ऐतबार नहीं, उनके लिए नहीं रुकते है,
चल यार, आज कुछ नया करते है।।

देव

चांद भी कुछ, उसकी तरह, लुका छिपी खेल रहा है

चांद भी कुछ, उसकी तरह,
लुका छिपी खेल रहा है,
कभी चांदनी से अपनी, मुझे,
नहला रहा है,
कभी, बादलों के पर्दे,
के पीछे छिप, बहला रहा है,

मैं भी, थोड़ा ढीठ हूं,
जब वो सामने आता है,
तो एकटक निहारता हूं,
और जब नहीं दिखता, तो
एक नजर भर देखने की,
दुआ मांगता हूं।।

देव

5 June 2020

बादल बरस तो गए

बादल बरस तो गए,
मगर उड़ते भी गए,
और मैंने कुछ कर डाला,
इन बादलों पे कुछ लिख डाला,

संदेश, मेरे यार को,
कुछ दुआएं भी भेजी है,
उसकी ख्वाहिशों का एक बंडल,
लटका कर, यूं बूंदों में,
जो बरसने को बेताब हैं,
मगर, उन्हें भी किसी का,
इंतेज़ार है,

लिपटा कर, मेरे जज्बातों को,
बरसेंगी, मेरे यार पर,
कुछ खुशियां, कुछ अफसाने,
बताएंगी, लौट कर आने के बहाने।।

देव

4 June 2020

ये तो वही सब्जी वाली आंटी हैं

This is what came to my thought last night, based on a lady used to come to our colony to sell vegetables, from a village around fourteen km away….

बात तो पुरानी है,
मगर लगा जरूरी बतानी है,
फिर उसी गांव में गया था,
जहां सालो मेरी मां ने काम किया था,
अचानक एक घर की ड्योढ़ी से,
एक चेहरा दिखा,
कुछ जाना पहचाना,
और जेहन में याद आ गया,
बचपन का जमाना,
ये तो वही सब्जी वाली आंटी हैं,
रोज कालोनी में सब्जियां बेचने आती थी,
सिर पर एक बड़ी सी, टोकरी उठाती थी,
वजन रहा होगा, लगभग बीस से तीस किलो,
सुबह से शाम तक, हर गली में,
सब्जी लो सब्जी, की आवाज लगाती थी,
मम्मा से पूछा, अरे ये तो वही आंटी है,
जो मुझे रोज अकर दुलारती है,
और बड़े प्यार से, कभी टमाटर,
तो कभी गाजर खिलाती है।
मम्मा ने कहा, हां बेटा, ये यही रहती है,
रोज गांव में खेत से, सब्जियां इकठ्ठा करती है,
दस बजे की लोकल ट्रेन से,
अपने शहर का सफर करती है,
दिन भर, सर्दी गर्मी की परवाह किए बिना,
रोज दस से बारह किलोमीटर,
अपने सर पर रख कर, गृहस्थी का बोझ,
घर घर सब्जियां बेचती है,
शाम, कभी कम कभी ज्यादा का,
गल्ला लेकर, फिर गांव को,
सफ़र करती है,
मेरी आंखे आश्चर्यचकित हो गई,
और मन ही मन, मेरी गर्दन,
श्रद्धा से झुक गई,
मगर एक प्रश्न कौंधा,
जब ये जाती है, तो बच्चे कौन पालता है,
जवाब में मां का इशारा,
उनके पति की ओर जाता है,
जो दिन में खेती में हल चलाता है,

किस्सा बस यही तक नहीं था,
जानने को अभी बहुत कुछ था,
मुझे देख कर, वो खुश हुई,
अपने पास बुलाया,
कुछ देर मेरी दुलार हुई,
हमे बैठाया, एक बच्चे को बुलाया,
सुन, काका को बोल, बाईजी आईं है,
चाय बना ला,
साथ में एक गिलास, ताज़ा दूध का ला,

तब छोटा था, मगर अब समझ में आता है,
आज भी, शादी करने पर,
लड़के वालों की तरफ से,
दहेज दिया जाता है,
आज भी, गांवो में, स्त्री पुरुष में,
बराबरी का नाता है।

देव

4 June 2020

ना इकरार किया, ना ऐतबार किया

ना इकरार किया,
ना ऐतबार किया,
मेरे हर जवाब पर, उसने,
एक और सवाल किया,

हकीकत कहते रहे हम,
नसीहत देते रहे वो,
बस, कुछ पल बात करी,
लंबा अंतराल दिया,

गलत ना वो थी कभी, और
शायद, गलत मैं भी ना था,
दोनों ने अपनी समझ का,
ना सही इस्तेमाल किया।।

देव

जिंदगी है, पल को मिली थी

वो फिर से चल पड़ी,
उसी राह पर, जो
कभी पीछे छोड़ आईं थी,
तन्हा थी अब तक,
अब महफ़िल में उसकी,
फिर से, जवानी छाई है,
कह रही थी, कब तक,
रहूंगी में यूं तन्हा,
मेरे भी सपने थे कुछ,
कुछ थी मेरी भी ख्वाहिशें,
चंद पूरी हुई, मगर
ना रास्ते मेरे थे, ना मंजिले,
बाकी, बस रह गई,
कुछ ओस बन कर उड़ गई,
कुछ बर्फ सी जमती गई,
मैं, जहां थी, बस,
वही खड़ी राह गई,

जिंदगी है, पल को मिली थी,
पल में, रुखसत कर गई।।

देव

2 june 2020

है पास मेरे, मगर, दूर बहुत रहती है।

नज़रे जो बयां करती है, वही
मुस्कान कहती है,
लब है, जो बंद है, मगर
बोलते है बहुत कुछ,
तेरी तस्वीर भी, तेरी तरह,
बर्ताव करती है,
है पास मेरे, मगर,
दूर बहुत रहती है।।
देव

2 june 2020

जरा दिल पर भी, यकीं कर

मेरे कहने पे ना जा,
वो कर जो, तेरा दिल कहे,
अपनी जिंदगी, तू
अपनी तरह जीले।

जमाना तो यूं ही,
बनाता है किस्से,
मगर ये भी नहीं कहता,
तू मुझ पर यकीं कर।

जद्दोजहद, दिमाग और दिल में,
चलती रहेगी ताउम्र,
इश्क़ का लुत्फ लेना है तो,
जरा दिल पर भी, यकीं कर।।

देव

2 june 2020

थाम लू, जिंदगी भर को

वक़्त गुजरता जा रहा है,
पर साथ नहीं मिलता,
थाम लू, जिंदगी भर को,
वो हाथ नहीं मिलता।।

अब तो आदत भी,
तन्हाई की हो गई है,
है तो बहुत, मगर,
कोई पास नहीं मिलता।

रातें भी , आंखों ही,
आंखो में, निकल जाती है,
नींद तो आती है अक्सर,
मगर ख्वाब नहीं दिखता।

थाम लू, जिंदगी भर को,
वो हाथ नहीं मिलता।।

देव

2 june 2020

ना वो बोले हां, ना, ना बोले

दरवाजे बंद रखे, या खोल दें,
जिरह कुछ इस तरह हुई,
वो खड़े भी है, मगर
खटखटाहट भी ना हुई।

बेतरतीब सी जिंदगी को,
सवाराने में लग गया कोई,
आइना जिसको था समझा,
नजर से दूर थे वो भी।

खुदा ने दिल तो दिया उसको,
और मोहब्बत भी दिल में थी उनके,
कश्म ए कश, जेहन की यूं थी कुछ,
ना वो बोले हां, ना, ना बोले।।

देव

1 june 2020

मेरी ख्वाहिश, मेरा अहसास है तू

दूर होकर भी, कितनी पास है तू,
मेरी ख्वाहिश, मेरा अहसास है तू,

तुझको मुझमें, महसूस करता हूं,
हर सांस में, तेरा आभास करता हूं,
मेरे चेहरे की, मुस्कान है तू
मेरी ख्वाहिश, मेरा अहसास है तू,

कुछ पल ही सही, पलकें जब बंद करता हूं,
पल में बस तेरा, दीदार करता हूं,
मेरे जीवन का, प्यार सा ख्वाब है तू,
मेरी ख्वाहिश, मेरा अहसास है तू।।

देव

1 june 2020

जिस राह से गुजरे, फूल बिछ जाएं

मुस्कुराहट तेरे चेहरे पर,
कायम रहे हरपल,
ख्वाहिशें तेरी, ना कम हो,
मिले जो चाहे, हरदम।

फिक्र का, ना नाम,
तेरे लबों तक आ पाए,
जिस राह से गुजरे,
फूल बिछ जाएं।

तेरी हकीकत, तेरे सपनों से,
हो वक़िफ,
तेरे अपनों की, आंखो का,
नूर तू हरदम रहे।।

देव

तुम क्या रूठी, मैं, मुझसे जुदा हो गया

तुम क्या रूठी,
मैं, मुझसे जुदा हो गया,
जैसे, मुझमें से, मैं खो गया।।

सपनों में मेरे, तेरा है बसेरा,
नज़रों में बसा है, चेहरा बस तेरा,
मुझे, मैं याद था ना रहा,
पर तुम क्या रूठी,
नींद और चैन, उड़ सा गया,
जैसे, मुझमें से, मैं खो गया।

तू नहीं थी करीब,
मगर, करीब बहुत थी,
तेरे चंद लब्जो में, हो जाती
बातें बहुत थी,
पर तुम क्या रूठी,
बातों से वास्ता टूट गया,
जैसे, मुझमें से, मैं खो गया।

यकीं है मुझको, जरा खुद पर,
बहुत तुझ पर,
फिर आयेगा दिन, मुझे देखकर
तेरे लबों पर वही मुस्कान होगी,
तुझसे फिर मुलाक़ात होगी,
तुम्हे इक दिन, माना लूंगा,
जो खो गया कहीं,
जिंदगी के सफ़र में,
फिर से पा लूंगा,
मैं, इक बार फिर से,
मुझसे मिलूंगा।।

देव

दुआ है सबकी, बढ़ो,तुम बढ़ते रहो

These lines are for Kailash।।
All the best Kailash।।

यूं तो वक़्त काफी,
बिताया है साथ तेरे,
पर हर बार, मुलाक़ात,
नई सी लगती है,
तुम्हारे साथ, हर शाम,
लेकर हाथो में जाम,
यादें कुछ खास,
जमा करती है।

अक्सर, हंसी मजाक में,
अक्सर, बातों बातों में,
कुछ खास कह जाते हो,
वक़्त ना हो, या बेवक्त हो,
तुम्हे हर जरूरत के वक़्त
साथ पाते है।

ये गुड बाय नहीं, हाय है,
एक नए वक़्त की, शुरुआत है,
अब तक, जो बात,
कहने में, झिझकते थे अक्सर,
बिंदास बात, वो तुमसे,
कुछ कर पाएंगे।

कौन कह रहा है, जा
रहे हो तुम,
कुछ और पास, हमारे,
आ रहे हो तुम
दुआ है सबकी, बढ़ो,
तुम बढ़ते रहो,
हर सफर में, साथ हमको,
हम सबको रखो।।

देव

29 may 2020

मगरुर इश्क़

यूं तो लोग प्यार करने वालो को,
दीवाना कहते है, मगर,
इस दीवानगी का भी,
कुछ और ही लुत्फ है,
मगरुर इश्क़ के, हां के
इंतेज़ार में, गुजरते लम्हों में,
कुछ और ही सुकून है।।

कभी घंटो, किसी ना किसी,
आस पास उसके गुजारना,
जब वो नहीं हूं, एक टक,
बैठे मोबाइल की स्क्रीन को घूरना,
व्हाटस अप में कोई मेसेज भेजना,
और फिर टक टकी लगा कर,
ऑनलाइन आने का घंटो इंतेज़ार,
जवाब आया या नहीं, मालूम
करने की लिए, उठाना मोबाइल,
सोने से पहले, हर बार।

मन भी तो, बड़ा पेचीदा है,
ना नहीं समझता है, हर हाल में,
बस यही उम्मीद करता है,
इंतेज़ार कर, कुछ झिझक होगी,
आज नहीं तो कल,
उसे तुमसे प्यार होना है,
बस, यू ही भटकता रहता है,
आस पास उसके, ये दिल
जब वो नहीं कहती कुछ,
सुनने को उसे, मचलता है ये दिल।

क्या करे,
यूं तो लोग प्यार करने वालो को,
दीवाना कहते है, मगर,
इस दीवानगी का भी,
कुछ और ही लुत्फ है,
मगरुर इश्क़ के, हां के
इंतेज़ार में, गुजरते लम्हों में,
कुछ और ही सुकून है।।

देव

29 may 2020

Random thoughts

जिसके लिए मैं, मैं ना रहा,
वही कहती है मुझसे आकर,
बहुत बदल गए हो,
तुम आजकल।।

देव

[02/06, 11:01 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: यूं ही नहीं, आती है हिचकी अक्सर,
खबर देती है, वो जिक्र मेरा करते है।।

देव
[02/06, 12:32 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: रंज ओ गम कहें, या अहसास ए खुशी,
वो मिले फिर से, बिछड़ने के लिए।।

देव
[02/06, 2:29 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: तेरी नजरो में, छिपे है, राज गहरे,
तेरे बंद लब बोल देते है, दास्तान तेरी,
मुस्कान भी अक्सर, झूठ ही बोलती है,
जिसे चाहगी तू, क्या होगी, किस्मत उसकी।।
[02/06, 2:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: कैसे तुझे, यूं ही, अपना लूं मैं अब,
तन्हाई से इश्क़, खुद से मोहब्बत जो ही गई।।

देव

[05/06, 1:10 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कब तलक, अपने जज्बातों को,
अपने ख्यालातों से, बांध कर रखेगी।
यकीं है मुझको खुदा पर, एक दिन,
मुझसे मोहब्बत है, वो जरूर कहेगी।।

देव
[05/06, 1:14 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कब तलक, अपने जज्बातों को,
अपने ख्यालातों से, बांध कर रखेगी।
यकीं है मुझको खुदा पर, एक दिन,
हां, तुझसे मोहब्बत है, वो जरूर कहेगी।।

देव
[05/06, 9:25 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: चाहत भी करो, तो खुदा की इबादत की तरह,
इतनी शिद्दत से चाहो, कि उसे खुद में महसूस करो।।

देव
[05/06, 9:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: वो खुदा में, और खुदा, मुझमें समाया है।
उसने भी तो, खुदा को, दिल में बसाया है।।

देव
[05/06, 9:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: उसकी तारीफ क्या करे, जो खुद तारीफ है,
मैं तो बस, अपने जज्बात लिखता हूं।।

देव
[05/06, 9:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: क्यूं बस, जबान को दिया है,
बोलने का ज़िम्मा,
थोड़ी बातें, नजरो से कर लिया करो।।

देव

मंजिल बस एक वो है

हजार राहें तेरी,
मंजिल बस एक वो है,
तेरी नज्मों में, लब्ज़ हजार,
नाम बस एक वो हैं,
जिसका नाम ना तू
लेता है, मगर,
दास्तान, हर ग़ज़ल में,
उसकी कहता है।।

देव

28 may 2020

फसाने छप गए

किसी से चांद बात क्या की,
अफसाने बन गए,
हमे पता भी नहीं चला,
और, फसाने छप गए।

मेरे ही अपने, मुझसे,
मेरा ख्याल पूछते है,
जो खबर नामालूम हमे,
उस पर सवाल पूछते है।

जो जान के अनजान थे हमसे,
वही पहचान, मेरी बताते है,
पर्चे मेरे इश्क़ के किस्सों के,
बाजारों में बांटते है।।

देव

28 may 2020

दूर जाने की कोशिश

दूर जाने की कोशिश, तुझसे,
तमाम कर डाली,
तेरे नाम पर, लगा तोहमत,
नफ़रत दिल में तेरे, भर डाली,

मगर, ये दिल, दिल ही तो है,
कहा मानता है,
हर कदम भी, तेरा गुलाम है,
तेरी गली से रोज गुजारता है,

दिमाग और दिल, का आपस में,
अब थोड़ा वास्ता है,
आंखो में तेरी, बस तेरी सूरत,
सांसों को बस, तेरा आसरा है।।

देव

27 May 2020

कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते

कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते,
जिंदगी खुद की, जी लेती,
भूल कर, हर जख्म, जो मिले,
कुछ पल, सांस ली होती।

हर कोई हक, जताने को है बैठा,
कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी,
और कभी मां का फ़र्ज़,
निभाने तक की है, यहां आशा।

मुझे मैं बनने का, मौका दिया होता,
अपने अफसानों में, मेरा नाम लिया होता,

मेरी ख्वाहिश, कभी पूछी होती,
मेरी धड़कने, क्या कहती है,
किसी ने आवाज तो सुनी होती।

कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते,
जिंदगी खुद की, जी लेती,
भूल कर, हर जख्म, जो मिले,
कुछ पल, सांस ली होती।।

देव

27 May 2020

दो लब्ज़ ही सही, वो कह तो जाएं

जिंदगी, कुछ आहिस्ता सी हो गई,
वो क्या रूठे, सांसे थम सी गई,
गुजरते हुए लम्हे, भी पूछने लगे,
क्या बात है, घड़ी क्यूं, रुक सी गई है।

अब तो बेजान है, महफ़िल,
कहा सुर ताल है, नगमो में,
ग़ज़ल, को ग्रहण लग गया है,
दर्द ही दर्द, भरा है, नज्मों में।

कदम उनके, पल को, थम जाए,
दो लब्ज़ ही सही, वो कह जाएं,
नखरे से सही, देख ले इक बार,
वीरान चेहरों पर, बहार आ जाए।।

देव

27 may 2020

दिल में प्यार उसका, बचाकर रख लेना

किस्से उड़ते है तेरे, यू ही, हवाओं में,
कुछ अफसाने, बचाकर रख लेना,

सपने कहीं ले ना जाए, नींद साथ अपने,
थोड़े अधूरे सपने, बचाकर रख लेना।

अश्क पोछने तेरे, नहीं है हाथ यहां,
कुछ बूंदे, नजरो में, बचाकर रख लेना।

प्यार पर, कुर्बान कर दी, दोस्ती सारी,
वक़्त है, थोड़ी यारी, बचाकर रख लेना।

उससे लेकर, नफरतों का, गुलदस्ता,
दिल में प्यार उसका, बचाकर रख लेना।।

देव

वो दिन ईद बन गया है।।

अब तो चेहरा उनका,
ईद का चांद हो गया है,
मुलाक़ात उनसे होना,
त्योहार हो गया है,

कुछ खता हमारी,
कुछ बेरुखी तुम्हारी,
कहीं इश्क़ झुलस गया है,
कहीं ऐतबार हिल गया है,

बेशक है कीमती,
ये तेरी मेरी यारी,
जब भी मिले है हम,
वो दिन ईद बन गया है।।

देव

क्या, ये दहेज नहीं कहलाता है।

दहेज, एक संकीर्ण परिभाषा बना हुए है। क्या बस लड़के के घरवालों द्वारा मांग ही दहेज है या हम सच में बहुत कुछ भूल रहे है। ये कविता आधारित है, इसी तरह की संकीर्ण मानसिकता पर, जहां एक तरफ तो हम स्त्री पुरुष समानता की बात करते है, वही दूसरी ओर अभी भी बस अच्छा कमाने वाला पुरुष ढूंढ़ते है।

दहेज, परिभाषा ही संकीर्ण है,
क्या बस, ये स्त्रियों की तौहीन है,
समझ नहीं आता, क्यूं समाज का ज्ञाता,
पुरुषों का अस्तित्व, नहीं देख पाता,

वर तो बाद में पसंद किया जाता है
पहले, उसके घर का, साइज देखा जाता है,
प्रतिष्ठा है या नहीं समाज में,
और वो कितना कमाता है,
क्या, ये दहेज नहीं कहलाता है।

हर लडकी के पिता के मुंह से,
एक प्रश्न जरूर, सुनने में आता है,
बेटा, मेरी बेटी को, खुश रखना,
और फिर गाड़ी कब लोगे, ये पूछा जाता है,
क्या, ये दहेज नहीं कहलाता है।

शादी के लंहगे की कीमत पर,
प्यार का हिसाब तोला जाता है,
ब्रैंड्स का टैग लगा है कपड़ों पर,
नज़रे चुरा कर, जाना जाता है,
क्या ये दहेज नहीं कहलाता है।

कैरियर की कंसल्टेंसी की कतार लग जाती है,
बेटा, इस शहर में कुछ नहीं,
मेट्रो में कब शिफ्ट होगे, बड़ी कंपनी
बड़ी पोजीशन कैसे और कब लोगे,
हर तरफ से सवाल यही आता है,
क्या ये दहेज नहीं कहलाता है।

देखो, पढ़ी तो बेटी भी है, मगर,
कमाने का जिम्मा तुम्हारा है,
बेटा, बीवी की कमाई खाओगे क्या,
उसके पैसे को हाथ नहीं लगाना है
क्या, ये दहेज नहीं कहलाता है।।

देव

Random thoughts may 2020

[04/05, 10:55 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: ए दोस्त, तेरे चेहरे पर,
कुछ अलग नूर चमकता है,
मुस्कुराती रहे, तू सदा,
हर नमाज में, दुआ करता हूं।।
[07/05, 9:41 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: अमावस का चांद, हो गई हो तुम,
करीब होकर भी, बस, नजर नहीं आती।।

देव
[09/05, 2:39 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: नशा ए शराब भी क्या रंग लाता है,
जब नशा ए इश्क होता है।।

देव
[09/05, 12:36 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: हर गुल से सुंदर है, गुलिस्तां हमारा,
ये है, हिंदोस्ता हमारा।।

देव
[09/05, 1:02 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: उसके हर तराने में,
मिलती है, कहानी मेरी,
मेरी हर नज़्म में,
जिक्र उसका होता है।।

देव
[09/05, 1:05 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: मानता हूं, वो चाहती है,
मुझको कुछ तो,
मगर इजहारे प्यार से,
उसको डर लगता है,

देव
[09/05, 1:06 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: सलाह भी उनसे करते है,
सलांखे ले है को बैठे।।
[09/05, 8:05 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: तस्वीर उसकी, उससे ज्यादा कह जाती है।
देव
[11/05, 12:26 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: वैसे भी, हम गुलज़ार नहीं है,
हममें, वो बात नहीं है,
मगर, हमारे चमन कि खुशबू भी,
उसके चमन से, कम खास नहीं है।।

देव
[11/05, 5:39 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: ये वक़्त भी गुज़र जाएगा,
मगर एक छाप छोड़ जाएगा,
भागती हुई जिंदगियों को
चलना सीखा जाएगा।

देव
[15/05, 11:38 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: कागज पर लिखी स्याही,
उसके अश्क ने, कुछ यूं बिखरी,
वो कागज़ पर बनी तस्वीर, मेरे,
इश्क़ की तारीख बन गई।।

देव
[15/05, 6:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: यही तो उसकी अदा थी,
जिस पर मोहब्बत फिदा थी।।

देव
[15/05, 9:05 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जिंदगी से गिला,
क्यूं करते हो साहेब,
नसीब जिंदगी तब होगी,
जब इश्क बुलंद, हो खुद से।।

देव
[21/05, 3:55 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जाया ना कर जिंदगी,
बेकदरो के वास्ते,
तन्हा रह जाओगे, एक दिन,
सूने होंगे रास्ते।।

देव
[21/05, 4:06 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: जो मुड़ कर भी ना देखे मुसाफिर,
जिंदगी इंतेज़ार में, उसके जाया क्यूं कर दे,
जिसे हमारे रास्ते भी गैर लगते हो,
उसके साथ चलने का, इरादा क्यूं कर ले।।

देव
[21/05, 4:18 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: उसको आदत बना लिया,
यही तो हमने गलती की है,
अब आदत है, हुजूर,
एक दिन में, बदलती नहीं है,

देव
[21/05, 4:18 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com: भूल जाऊं, इसीलिए ना नशा,
ना इस्क करता हूं मैं,
मगर, जो इश्क को, बस खेल समझते है,
उनकी गली में भी, रुख नहीं करता हूं मैं।।

देव
[23/05, 12:06 am] Dev… Devkedilkibaat.Com: हां, अक्सर वो बैचैन हो जाता है,
अनायास ही, खयालों में, खो जाता है
फिक्र रहती है, उसको सबकी, और
खुद गुमनामियों में गुम हो जाता है,

Dev

मैं अक्सर, दर्द में भी, थोड़ा हंस लेता हूं

गैरों की हंसी में, खुशी अपनी, ढूंढ लेता हूं,
मैं अक्सर, दर्द में भी, थोड़ा हंस लेता हूं,

मंजर अक्सर, मेरे आस पास, खास नहीं होते,
आम महफ़िल में भी, खास तराने सुन लेता हूं,

वो शराब के नाम पर, पानी पिला देते है मुझको,
मैं पानी के नशे में भी, मस्त झूम लेता हूं,

मेरी किस्मत में भी, कुछ कम लिखा है खुदा ने,
जो दिया, उसका शुक्रिया, जी भर के करता हूं,

मेरी संगत, अब कहा रास आती है उनको,
फिर भी उनके नाम पर, नज़्में बोल देता हूं।।

देव

22 may 2020

It’s better not to fall, in love, sometimes

It’s better to be alone, sometimes,
It’s better to be yourself, sometimes,
You can’t win,every battle of life,
It’s better to learn from loss, sometimes.

Feel like, one dont exist anymore, sometimes
In the life of someone, one loved, sometimes,
Empty space, kills slowly sometimes,
Wanna cry a lot, but no shoulder, sometimes

Its better not to be loved, by someone
It’s better not to fall, in love, sometimes

Dev

21 may 2020

मशरूम से कटे बाल

मशरूम से कटे बालों के,
धरातल से, ताकती ये जमीं,
फेरता हूं जब हाथ तो,
लगती है कुछ हरियाली की कमी,

कंफ्यूज भी ही थोड़ा,
थोड़ा सरप्राइज्ड भी ही,
हो गया अब तो, जो होना था,
अफसोस में जरा भी नहीं हूं,

वर्जन वन से वर्जन थ्री
तक ट्राय कर डाले,
पापा की डांट से बचने के
जतन हजार कर डाले,

कुछ मजाक भी बना,
कुछ बाते भी निकली,
खुश हूं, गलती लग रही थी जो,
उससे भी, कुछ तो मुस्कान बिखरी,

देव

20 may 2020

लगती है वो, मेरी हमसफ़र सी

कभी बेखबर सी, कभी बेसबर सी,
लगती है वो, मेरी हमसफ़र सी,

बताती भी है, राज वो अपने,
सुनाती भी है, सपने वो अपने,
कभी रुसवा होती, कभी मुस्कुराती,
यूं तो है बड़ी शांत, अक्सर है घबराती,
कभी सुबह सी, कभी शाम सी,
लगती है वो, मेरे जज्बात सी,

पूछे वो कैसे, नहीं जानती जो,
मेरी हकीकत, की राजदार है वो,
किस्से बहुत है, मेरे बिखरे जहां में,
नहीं फिक्र, कहे कुछ भी, कोई तो आके,
कभी यार सी, कभी प्यार सी,
लगती है वों मेरी, कायनात सी।

देव

20 may 2020

मगर जीना कहीं भुला

कुछ कदम बढ़ते है,
फिर रुक जाते है,
ठिठक कर, ठहर जाते है,
मुड़ कर देखने पर,
फिर वही, रास्ते पाते है,
यूं तो बढ़ गए काफी,
मगर, जो छूटना था पहले,
हर कदम पर साथ पाते है,
जैसे, वक़्त बढ़ते हुए भी,
कुछ थमा सा है,
मंजिले सामने ही है,
मगर रुकी सी है,
जैसे, आसमा दिखता तो है,
जमीं से मिलता,
मगर वो छोर नहीं मिलता,
जैसे, जिंदगी तो मिली,
मगर जीना कहीं भुला।।

देव

20 may 2020

लाल लिबास

लाल लिबास, और
फोन पकड़ने का अंदाज़,
लगता है, कुछ खास है,
मुखड़े पर, कुछ अलग मुस्कान है,

तुम्हारे जेहन में भरे,
वो हजारों सवालात,
लबों से निकलती,
वो फुर्र फुर्र बात,
देखो है ये खुलने को बेताब
अभी भी ये लब,
बताते है अब भी,
है वहीं हालात,

मगर, अब नया अंदाज़ है,
यूं लगता है मानो,
तुम्हे किसी का इंतजार है,
बेसब्र सी आंखे, उससे
मिलने को बेकरार है,
शायद, इसीलिए,
मुखड़े पर, कुछ अलग मुस्कान है।।

देव

20 may 2020

पूर्णिमा

Just heard a narration, of true event, of Purnima, a 14 yrs old girl and her 6 yrs old sister, who were raped in front of their parents on 8 october, 2001 in Bangladesh. Reason was, even being part of minority, they were holding good wealth. I was so touched and written few lines.. here it is……

वो चिल्लाती रही,
बेबस लाचार,
और होता रहा,
उसकी नादान,
औलादों पर अत्याचार,

यूं आताताईयों पर था,
धर्म का जुनून सवार,
कहां रुके, कहां समझे,
इंसानियत हुई थी शर्मोसार,

बुरे और कम बुरे में,
वो भेद करती रही,
अरे, बच्ची है, थोड़ा रहम करो,
वो बिलखती रही,

आवाजे, उस नन्ही जान की,
चीरती हुई दीवारों,
ईमान बेच, हैवान बन चुके,
समाज के कानो में भी पड़ी,

सिस्क्यों, और,
बेपनाह दर्द भरी,
उन कराहंटो में,
लथपथ वो पड़ी रही,

सवाल खुदा से,
इंसानियत ये करती रही,
खुदा कहूं कैसे तुझे,
जब नाखुदाई, तेरे नाम पर बिखरी।।

देव

19 may 2020

सपना मेरा, पल में, टूट गया

उसके लिए तो बस, वो कुछ शब्द थे,
और मेराअरमान, चूर हो गया,
सपना मेरा, पल में, टूट गया।

कुछ ही तो वक़्त हुआ था,
उसने मुझे लव यूं, कहा था,
और में छोड़ कर सब,
उसके आंगन में आईं थीं,
अभी तो मेहंदी भी कहा,
रंग छोड़ पाई थी, कि,
उसका रंग पता चल गया,
सपना मेरा पल में टूट गया।

यूं तो, इज्जत का बोझ भी था,
कुछ, समाज का डर भी था,
दर्द भी सहना है, उफ्फ नहीं करना है,
बचपन से सिखाया यही था,
मरती थी रात में हर,
दिन साल जैसा गुजरा,
नन्ही जान लिए गोदी में,
वो घर, एक दिन था छोड़ दिया,
सपना मेरा, पल में टूट गया।

कितना तोड़ोगे, बहुत टूट गई,
अब तो बस है जुड़ना,
जख्मों को नहीं भरा मैंने,
वो देते है, मुझे चेतना,
अब मैं हूं, और बस मैं हूं,
मुझको नहीं किसी से घृणा,
खुश हूं मै, आजाद हूं,
खुद के लिए है अब जीना,
अब देखती भी हूं,
और जीती भी ही,
जो सपना, मेरा था पल में टूट गया।

देव

19 may 2020

हां, अब वो बदल गई है

हां, अब वो बदल गई है,
अब उसकी, मुश्किलें कम हो, गई है,

वक़्त था, जब वो, मजबूर हुआ करती थी,
साथ तो यूं, सब थे, मगर तन्हा रहा करती थी,
दर्द को उसके, समझे, कोई था ना वहां,
उसके वजूद की परवाह, थी है किसे,
मगर,
हां, अब वो बदल गई है,
अब उसकी, मुश्किलें कम हो, गई है।

बहाने अब नहीं, अब वो सच बोलती है,
जो गलत है, गलत है, नहीं चुप रहती है,
जिंदगी उसकी है, अब वो ही मंजिले चुनती है,
हर राह पर, अकेले चलती है, नहीं तन्हा रहती है,
क्यूं की,
हां, अब वो बदल गई है,
अब उसकी, मुश्किलें कम हो, गई है।

देव

18 may 2020

अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है

कोशिश करी बांधने की,
बंध नहीं पाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

कभी सुन कर हाल ए दिल
यारो का,
कभी, किस्से मोहब्बत के
मारो का,
सब्र नहीं रख पाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

दर्द छिपा है, यहां,
हर नजर में,
हर नजर, सैलाब है,
आंसुओ का,
अक्सर, बह जाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

जीता भी हूं मैं,
कभी हारा भी हूं,
चुप चाप रहा, हरदम
कुछ ना कहा,
अब बहक जाते है
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

देव

15 may 2020

इंतेज़ार तो उन्हें भी है

इंतेज़ार तो उन्हें भी है,
मुलाक़ात का हमसे,
ना वो इकरार करते है,
ना इजहार करते है।

पढ़ लेते है अक्सर, जेहन में,
मंडराते सवालतों को,
ना वो पूछते है
ना जिक्र करते है।

मोहब्बत है, उन्हें भी,
इश्क़ है हमसे उन्हें,
ना वो कहते है,
ना खत में लिखते है।।

देव

16 may 2020

अक्स

अक्स देख कर पूछा मैंने,
तू तन्हा क्यूं है,
जब जिंदगी है, तेरे पास,
तो रुसवा क्यूं है,

अक्स बोला,
जब भी देखता हूं, तो बस
तू ही दिखता है,
तू भी सच है या बस
एक धोखा है।।

देव

15 may 2020

आइना

यूं तो आइना, रोज ही देखती है,
मगर, काफी अरसे बाद,
आज, वो घर से बाहर जा रही है,
शायद, उससे मिलने की,
घड़ी आ रही है,

थोड़ी बैचैन, और बहुत खुश है,
माथे पर, हल्की सी शिकन है,

कभी इस दराज,
तो कभी उस दरवाजे को खोलती,
कभी पास में बनी अलमारी के,
कपड़ों को खंगेलती,

एक एक ड्रेस को,
खुद पर लगाती,
नपंदागी का अंदाज, चेहरे पे दिखा,
बिस्तर पर कपड़ों का ढेर बनाती,

सारी , सूट, जींस- टॉप, फ्यूजन,
क्या क्या ना निकाल डाला,
पिछला हफ्ता था उसने,
आज की खरीददारी में निकाला,

थकहार कर, जब बैठी,
लगी सोचने याद उसकी,
नजर पल में पड़ी,
उन्ही कपड़ों पर पड़ी, नजर उसकी,

ये तो वही सलवार कुर्ता है,
जिसे पहन, पहली बार, मिली थी उससे,
जब मिली नजर मुझसे, ना जाने
कितने ही मिनट तक, नहीं
थी हटी, नजर मुझसे,
और मैं भी, कुछ पल को,
खो सी गई थी,
शायद, उसके अहसास में,
सरोबार सी थी मैं,

कुछ ही पले, वो तैयार थी,
माथे पर छोटी से बिंदिया,
एक हाथ में कंगन, दूसरे में,
घड़ी और कुछ बंधन,

उसकी सादगी, ने उसकी
खूबसूरती और बड़ा दी थी,
उस खूबसूरती, हर लिबास,
को अमूल्य बना रही थी।।

देव

15 may 2020

तेरे इश्क़ ने मुझे, जीना सिखा दिया

तेरे इश्क़ ने मुझे, जीना सिखा दिया,
पहले उधेड़ना, अब बुनना सीखा दिया।

यादों के ताने बाने से, सिले है जो ख्वाब,
ख्वाबों को हकीकत में, बदलना सीखा दिया।

डर, डर मुझे भी लगता था, जुदाई का अक्सर,
तेरी बातों ने मुझे, निश्चल बना दिया।

देव

15 may 2020

मुझे सुकून मिलता है

लिखता हूं मैं, क्यों कि,
मुझे सुकून मिलता है,
पड़ते है वो, क्यों कि,
उन्हें खुशी मिलती है,

हां, अक्सर रूला भी,
देती है, कविता मेरी,
दर्द के किस्से अक्सर,,
जब लिख देता हूं।

देव

15 may 2020

रे अक्स को कागज पर, उंकेरूं कैसे

तेरे अक्स को कागज पर, उंकेरूं कैसे,
खुदा ने, रंग ही नहीं, वो बनाए,
तेरे हुस्न की तारीफ में क्या मैं लिखूं,
जो लब्ज़ मिले, वही कमतर नजर आए।

तू तो बस यू ही, कह देती है,
देखो, ये तस्वीर, अच्छी नहीं ली तुमने,
तेरी उसी तस्वीर से घायल,
दीवाने हजार नजर आए।

यूं ही नहीं, आते है हम महफ़िल में,
कुछ लब्ज़ सुन ले तेरे, तो कानो को,
सुकून आए, कुछ पल ही सही,
इक बार, दीदार तेरा हो जाए।।

देव

15 may 2020

मेहंदी

देखो, तुम्हारे चेहरे की मुस्कुराहट जो कुछ देखते ही बनती है, इतने वक्त से तुम्हें देख रही हूं लेकिन पता नहीं तुम्हारे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई थी तुम ना जाने सबसे कब दूर हो गई थी,
आज बरसों बाद तुमने मुझे अपने हाथों में लगाया तुम नहीं जानती आज मैं कितना खुश हूं और मुझसे ज्यादा तुम खुश हो, क्यों मुझसे इतनी दूरी बना ली थी क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आई,
याद है याद है तुम्हें वह दिन जब पहली बार तुम्हें मैंने मुझे अपने हाथों में रचाते हुए बहुत खुश देखा था, हां मैं तुम्हारी शादी की बात कर रही हूं तुम बड़े अरमानों से मुझे अपने हाथों में रचा रही थी और अपना प्यारा सा गीत गुनगुना रही थी तुम्हारे चेहरे की खुशी देखते ही बनती थी, मुझे तो अभी भी याद है तुम धैर्य खोए हुए उसका इंतजार कर रही थी, और कहीं उस सुंदर से ताने-बाने के बीच में तुमने उसका नाम भी अपने हाथ पर लिखा था बड़े अरमानों के साथ, काफी दिनों तक मुझे अपने हाथों में शीश के रखा था, मैंने तो शायद तुम्हारे जीवन के उन पलों को भी देखा है जो शायद ही किसी ने देखा हो तुम्हें बड़े करीब से जाना भी है, वह भी देखा है जो देख कर मुझे भी काफी तकलीफ हुई थी, बड़े उत्साह के साथ तुमने मुझे फिर से करवा चौथ के दिन लगाया था अपना बहुत वक्त मेरे साथ बिताया था अपने चांद के इंतजार में पूरी रात मुझसे बातों में बताई थी और झर झर आंसू के साथ अगले 2 दिन तक रोती रही थी क्योंकि जिसके लिए तो मैं करवा चौथ रखा था वह तो कहीं और व्यस्त था और उसे तुम्हारा एहसास तक नहीं था।

मुझे याद है अपनी गोदी में अपनी नानी जान को लेकर तुम कितनी खुश थी और घर में कितना खुशी का माहौल था मगर जो होना होता है वही होता है बीच मझधार में छोड़ कर वह कहीं चला गया था आखरी बार था जब मैं तुमसे मिली थी और तुम्हारी आंखों के आंसू की धारा रुक नहीं रही थी तुम अपने हाथों से जिनको कि मैंने अपने रंगों से सजाया था कभी अपने आंसुओं को कभी उस नानी के आंसुओं को साफ करने में व्यस्त थी तुम्हारे बाल अस्त व्यस्त थे आंखें सूजी हुई, और कुछ खा भी नहीं थी तो बस उस नन्ही सी जान के लिए।

तब से आज तक तुम्हें मैं देखती आई हूं कई बार ऐसा हुआ है कि तुम मेरा घोल बनाकर बैठ जाती हो और फिर वही आशु धारा फिर से बहती रहती है तुम्हारे आंसुओं की बूंदों ने यहां तक कि मेरे गम को भी फीका कर डाला, अब तो मुझे भी अफसोस होता है खुदा ने मुझे क्यों बनाया, मैं हूं तभी तो तुम इतना रोती हो और अपनी किस्मत पर अफसोस करती हो, मगर आज मैं खुश हूं,‌ आखिरकार बरसों बाद तुम्हारे चेहरे पर फिर वही खुशी देख रही हूं हां मुझे पता है तुम क्यों खुश हो, तुम्हें कोई मिल गया है जो तुम्हें बहुत चाहता है जानती हूं जो हो गया उसे भूलना मुश्किल है लेकिन आगे पढ़ने के लिए कुछ पीछे छोड़ना पड़ता है, खुश हूं तुम मुझसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ रही हो, खुश हूं तुम्हें किसी की बेपनाह मोहब्बत मिल रही है, खुश हूं मैं तुम्हारे हाथों में फिर से रख रही हूं, खुश हूं मैं तुम्हारे चेहरे पर फिर से वही मोहब्बत देख रही हूं।।

देव

14 may 2020

जो सानिध्य तेरा पाया है

बड़े इत्मीनान से खुदा ने,
तुझे बनाया है,
बस,रूप ही नहीं, रूह,
को भी, तेरे सजाया है,

यूं ही नहीं, ये स्वरूप,
तूने पाया है,
खुदाई को, खुदा जमीं,
पर यूं लाया है,

और तूने जो, बांधे है,
कलाई में धागे,
उनकी किस्मत के धनी है,
जो सानिध्य तेरा पाया है,

देव

14 feb 2020

सब्र अब बचा कहा है

सब्र अब बचा कहा है,
ना वक़्त है ज्यादा अब,
फुरसत तो, है बहुत,
मगर तलबगार है कम,

रुखसत हो गई है मोहब्बत,
यारियां, कही छूट सी गई,
महफ़िल में शराब तो है बहुत,
जाम की आवाजे, गुम हो गई,

वादे, कहीं गुम हो गए,
बातें, हजार बाकी है अब,
कहना तो बहुत कुछ है,
सुनने के शौकीन, कम है अब।।

देव

14 may 2020

वक़्त का वादा नहीं

वक़्त मुनासिब हो, हर वक़्त,
वक़्त का वादा नहीं,
वक़्त पे मिलते है जो,
वक़्त पे छोड़ जाते भी है,

कभी भीड़ है, कभी अधीर है,
सब वक़्त का ही खेल है,
जो बेवक्त था, संग में खड़ा,
वही वक़्त का, भागीदार है,

वक़्त दिखा दे पहले, वक़्त से,
नहीं वक़्त कर सकता है ये,
वक़्त पर, वक़्त पहचान लो,
तो वक़्त पे, बचा लोगे तुम वक़्त।।

देव

14 may 2020

वो बचपन था, मगर कहा कम था

It’s not about, where you study, it’s all about with whom, and if we have done something, what makes you Lough, life long… Here is another part of my childhood…

वो बचपन था, मगर कहा कम था,
सरकारी स्कूल, पर थी बड़ी कूल,
यही कोई तीसरी या चौथी क्लास थी
मगर, मस्ती पूरी भरी, हुई थी,

थोड़ा क्लास में दब दबा भी था,
क्यों कि, पड़ने में थे अच्छे,
मैडम की आंखो में चढ़े हुए थे,

हम पांच के मजे थे,
मेरी क्लास के, योगी और कालिया
साथ में आभा और नीरज,
जो मैडम के बच्चे थे,

तकरीबन सौ मीटर की दूरी पर,
दो इमली के पेड़ हुआ करते थे,
दिन में बच्चे, और रात में तो बड़े भी,
वहां से गुजरने में डरते थे,

लेकिन, उस उम्र में, वो भी एक मजा था,
कालिया के साथ, कोई एक, वह जाता था,
डर तो लगता था, मगर, मजा बड़ा आता था,
कालिया पेड़ पर चढ़, इमलियां तोड़ लाता था,

कभी कभी, हम पकड़े भी जाते थे,
क्लास में ही, कान पकड़ कर,
कोने में खड़े किए जाते थे,

अब सब बड़े हो गए,
रास्ते सबके जुदा हो गए,
पर ना भूले उस माहौल को,
एक दूसरे की याद सबको है।।

देव

13 may 2020

तुम कहा गई, दिल में बसी हो अब भी

अभी, कल ही, की तो बात है,
मिली थी तुमसे, बड़े दुलार से,
हाथ फेरा था, सिर पर मेरे,
और हजार दुआए दे डाली थी पल में,

तुम्हारी मुस्कुराहट में, कोई,
भेदभाव नहीं था, तुम्हारे संवाद में,
बस प्यार ही प्यार भरा था,
और जब गले, तुमने मुझे अपने लगाया,
मेरे दिल को, बस इत्मीनान ही था,

तुम्हारे प्यार में बस, अपनापन था,
तुम्हारी, मुस्कान में, कुछ तो दम था,
थके चेहरों पर भी, हसीं ले आती थी,
पल में, सबको, अपना बना लेती थी

और यू ही, छोड़ चली, पल में,
वक़्त भी चुना ऐसा, ना आ पाए मिलने,
बस, तुम्हारा वही चेहरा, जेहन में है अब भी,
तुम कहा गई, दिल में बसी हो अब भी।।

देव

13 may 2020

जिंदगी है वो, कहा रुकती है वो

दिल ही तो है,
पल में बनता, पल में बिगड़ता है,
जो है नहीं करीब,
उन्हें याद करता है,
जो है, उनसे कहा बात करता है,

बेसब्री भी मुझमें,
दिल ने है तो दी है,
वरना कहा, इंतेज़ार करता था मैं,
वो रहती तो हमेशा,
है पास मेरे,
मगर, तसव्वुर से उसके,
डरता था मै,

कहीं, कहीं बुरा तो,
नहीं मान वो लेगी,
कहने से हाल ए दिल,
डरता था मैं,

उसके होने पर,
नर्वस होता था मै,
ना होती थी वो,
कहा होता था वहां मैं,

लुकाछिपी, अक्सर,
होती थी हममें,
मुझे खोजती थी वो,
ढूंढता, उसे था मैं,

जिंदगी है वो,
कहा रुकती है वो,
जब जरूरत थी उसकी,
ठहरती नहीं वो।।

देव

12 may 2020

राखी का धागा पाती हूं।

जाने कब से तमन्ना लेकर बैठी हूं,
कोई तो मेरे सपनो का राजा होगा,
उसके आने से, रोशन मेरा जीवन होगा,
मगर, कमबख्त, वो कसम याद आ जाती है,
जो कभी, बचपन में दिलवाई थी,
समस्त भारतीय मेरे भाई बहन है,
भरी स्कूल में, मास्टर साहब के,
कहने पर खाई थी,

सोच कर ही, परेशान हो जाती हूं,
सपने मोहब्बत के देखती हूं,
मगर अपने हाथो में,
राखी का धागा पाती हूं।

देव

12 may 2020

वो जाड़े की रातें

Every one has some story of childhood, same here, sharing few, one about my study, I had to study either in street or in a vacate horror house…

वो जाड़े की रातें,
होंठ कंपकपाते,
सूना मोहल्ला,
पेड़ों की बातें,

चबूतरे पर,
बिछा कर पलंग,
रजाईयो में खुद को,
घुसा, बन कर दबंग,

किताबों का पड़ना,
एक जज्बे का होना,
नहीं कोई और,
मकसद का होना,

काबिल मुझे,
बनना है एक दिन
मुझको भी कुछ कर
गुजरना है एक दिन,

मेरे घर में नहीं था,
कोई कोना ऐसा,
मगर जुनून पढ़ने का
था है कुछ ऐसा,

अंधेरे से लगता था,
डर काफी मुझको,
मगर एक खाली,
घर मिला था तब मुझको,

कहते थे भूतो का,
डेरा वहां पर,
नहीं जाता था कोई,
रातो में वहां पर,

डर था बड़ा, पर
जुनून भी बड़ा था,
उसी कोठरी में,
कई रातें पढ़ा था,

अब भी याद करता हूं अक्सर,
वो सुनसान राते, वो वीरान घर।।

देव

12 may 2020

उसको देखा, और खड़ा राह गया

बस, हक्का बक्का सा रह गया,
उसको देखा, और खड़ा राह गया,

सालो बाद उसे देखा था,
यूं तो काफी साल, पड़े थे साथ,
मगर, वो थी प्राइमरी की बात,
पड़ोस में ही रहती थी,
और स्कूल भी जाते थे साथ,
मगर वो बचपन था,
और अब वक़्त कुछ और था,
और बात कुछ और नहीं थी,
बस, एक लम्हा था,
उसका रूप अब कुछ और था,
हाथो की चूड़ियां बता रही थी,
शादी के बाद, पहली बार वो,
घर आ रही थी,
बस, यही दुआ दिल से आ रही थी,
सलामत रखे खुदा उसको,
नए रूप में वो, खूब भा रही थी।।

देव

12 may 2020

मैं बस, जिंदगी को घसींटता रहा

लोग समझते रहे,
और में चलता रहा,
कारवे भी पीछे छूटते रहे,
और मैं चलता है,
तलाश, बस एक मंजिल की थी,
और वो भी, मेरी कहां थी।

हुनर लिखने का मिला,
शायद, उसके लिए था लिखना,
कर सकूं जज्बात बयां,
जो कभी कह ना सका,
कह भी दिया बहुत कुछ,
मुस्कुराई तो वो भी थी,
अरमान, उसके कुछ और थे,
और वो भी, मेरी कहा थी।

कुछ ने कहा, इंतेज़ार,
बेमानी होता है,
कुछ ने कहा, वक़्त दो तो,
प्यार जरूर होता है,
उसने कहा, बड़ा मुश्किल है,
मुझे नहीं प्यार होता है,
मैं बस, जिंदगी को घसींटता रहा,
और वो भी, मेरी कहां थी।।

देव

11 may 2020

ना करना इश्क़ यारो, पछताओगे

ना करना इश्क़ यारो, पछताओगे,
अपने ही दिल के आगे,
पस्त हो जाओगे,
धड़कने, धड़कने तो फिर भी चलेगी,
बस जिंदा रखने को,
मगर हर धड़कन को, गैर पाओगे।

अहमियत, जिसे पता नहीं इश्क़ की,
बोलो, उसे कैसे समझाओगे,
और समझने से इश्क़ नहीं होता,
ये दिमाग नहीं, दिल का खेल है,
वो क्या करेंगे इश्क़,
जिनके दिल नहीं होता।

अब कर है लिया है, तुमने
भुगतना तो पड़ेगा,
इश्क़ में हर नखरे को,
सहना पड़ेगा,
एक तरफा इश्क़ है तो,
उस पाने कि जिद ना कर, वरना
जिंदगी भर, मखमल पर,
टाट के पैबंद बन, रहना पड़ेगा,

अगर, यकीं है अपने इश्क़ पर,
और खुद पर,
तो इत्मीनान रख,
तेरे दामन, में कुछ तो खास होगा,
एक दिन उसे भी, अहसास होगा,
तब तेरा इश्क़, तुझसे पूछेगा,
मोहब्बत है तुझसे,
क्या, मेरे नाम का दिल,
मुझे मिलेगा।।

देव

11 may 2020

जिंदगी है, इतनी आसान नहीं है।।

कुछ तो अलग अहसास था,
आज उसके नहीं पास था,
या कह दूं, वही दूर थी,
लेकिन वो तो कब से दूर है,
पास ही कब आईं थीं,
या आईं थी, तो मैंने,
महसूस नहीं किया,
या वो बिन बोले,
आईं, और चली भी गई,
या वो अब भी यही है,
मेरे आस पास,
और देख रही है मुझे,
मगर देख रही है,
तो बोल क्यूं नहीं रही,
या आज फिर मेरे,
बोलने का इंतेज़ार कर रही है,
मगर, में तो हमेशा ही,
बोलता हूं, चुप कहा रहता हूं,
वो भी यही तो बोलतीं थी,
मगर, आज चुप क्यूं है
या में बस यूं ही सोच रहा हूं,
वो कही नहीं है,

जिंदगी है, इतनी आसान नहीं है।।

देव

11 may 2020

आज बस यूं ही आंखे भर आईं

आज बस यूं ही आंखे भर आईं,
आज फिर मां की याद आई,
छोटा सा था, जाना पड़ा था उन्हें,
हमारी खुशी के लिए,
याद बहुत आती थी,
पर रो भी नहीं पाता था,
कुछ लम्हे, भीगी आंखों में,
गुसलखाने में बिताता था,
यूं तो सब थे घर में,
मगर मां, मां होती है,
कभी भूल नहीं पाता था,

फिर, कुछ वक़्त, बस मां और मैं थे,
सबसे दूर, मजबूरी में रहते थे,
वो दफ्तर जाती थी, मैं इंतेज़ार करता था,
रात की ड्यूटी में, हॉस्पिटल की,
स्ट्रक्चर पर भी सोता था,
डर तो बहुत लगता था, कि इस पर,
कोई मुर्दा निकाला गया होगा,
मगर, मां आस पास है,
सोच कर मस्त सोता था,

मगर, एक बार फिर से वही दौर शुरू हुआ,
बस शनि की रात से, सोम की सुबह तक,
के वक़्त, मां का दीदार हुआ,
उन्हें भी डर तो लगता था,
मगर जीत जाती थी,
जब भी, डरावना अहसास रात में होता,
अगले दिन हमसे मिलने आ जाती थी,
और, सच में, किसी ना किसी को,
बीमार पाती थी,
पता नहीं, कैसा उनका दिल होता है,
पल में बच्चो की बीमारी का,
अहसास होता है,

वक़्त गुज़र गया काफी,
बड़े हो, सब अपने बच्चो में,
व्यस्त हो गए,
अब वो तन्हा रहती है,
और हम बाहर, वो आज भी,
पल में हमारे हाल जानती है,
और हम, आज भी बेफिक्र,
सोते है, हर रात में,
बस, अब वो हमे याद करती है,
और हम भूल जाते है,
जो नहीं है जरूरी,
उसमे खो जाते है,

अब भी वक़्त है, सम्हलने का,
उसके अहसास को, समझने का,
आज वो मां है तो क्या,
कल हम भी मां, होगे,
इसी दौर से गुजरेंगे,
और जब वो नहीं रहेगी,
थोड़ा पछतावा करेंगे,
बस, उसे याद करेंगे ।।

देव

10 may 2020

तूने मुझको मैं बनाया

तूने मुझको मैं बनाया,
मैं हूं, बस तेरा साया,
उंगली पकड़ कर चलना सिखाया,
मैं हूं, बस तेरा साया,
मैं हूं, बस तेरा साया,

सपनों की गलियों में जब भी,
डर कर मैं उठ जाता,
निंदो में गहरी, कितनी भी होते,
तूने सीने से अपने लगाया,
मैं हूं, बस तेरा साया,
मैं हूं, बस तेरा साया,

गलियों नटखट, बन मैं घूमा,
चोट लगी तो, बना मासूम सा,
छोड़ के सबकुछ, बस मुझे चूमा,
तूने ही, निवाला खिलाया
मैं हूं, बस तेरा साया
मैं हूं, बस तेरा साया

तूने मुझको मैं बनाया,
मैं हूं, बस तेरा साया
मैं हूं, बस तेरा साया

देव

10 may 2020

आज चांद से मुलाकात हुई

आज चांद से मुलाकात हुई,
उसने पूछा, क्या बात है,
आज तुमसे कैसे मुलाक़ात है,

मैंने कहा,
आज मेरा चांद खोया है,
लगता है, वक़्त पर सोया है,
या कहीं बादलों में छिप,
अठखेलियां कर रहा होगा,

चांद ने कहा,
जान सकता हूं, तुम्हारा हाल,
क्या बीत रही होगी,
जैसे अमावस की रात,
मुझे चुभती है, वैसे ही,
चुभन तुम्हे भी हो रही होगी,

मैंने कहा,
नहीं, मैं तो बस, इंतेज़ार में हूं,
आएगा जरूर मेरा चांद,
बस, वक़्त लगाता है, मगर
किसी ना किसी बहाने,
दिख जरूर जाता है।।

देव

10 may 2020

बस, इक बार, उसे, मेरी मोहब्बत दे दे

मुझको थोड़ी सी, खुदा मुद्दत देदे,
कुछ पल ही सही, उसकी सोहबत दे दे,
फिर बुला लें मुझे, शिकवा नहीं है मुझे,
बस इक बार, उसे, मेरी मोहब्बत दे दे।।

नही है आरजू मुझे, तख्त ओ ताजों की,
मगर, ख्वाहिश है उसे, आलीशान महलों की,
जरा इक बार, मुझे तेरी सल्तनत दे दे,
बस इक बार, उसे, मेरी मोहब्बत दे दे।।

सर्द रातों में, जम चुके है उसके पांव उसके,
जख्म कुछ है हरे, नहीं भरे उसके,
उसके जख्मी की, मुझे कोई मलहम देंदे,
बस इक बार, उसे, मेरी मोहब्बत दे दे।।

सुना है जन्नत में, बहुत कम है जगह तेरे,
गर थोड़ी सी भी नसीब में है, जन्नत मेरे,
मेरे हिस्से की भी, उसे जन्नत दे दे,
बस, इक बार, उसे, मेरी मोहब्बत दे दे।।

देव

9 May 2020

दीदार ए यार

भटकता हूं, तलाश में उसकी,
हर गली , मोहल्ले में,
नाम उसका मिलता है लिखा,
हर दरवाजे पर,
आवाज भी सुनाई देती है,
अक्सर उसकी,
बस, होता ही नहीं, दीदार ए यार,
उसका किसी झरोखे में।।

देव

9 may 2020

लौटकर, वो आयेंगे इक दिन

वक़्त, ठहरा हुआ सा है,
सांसे, उखड़ी हुई सी है,
मंजर, छू रहा है दिल को,
बेरुखी, बिखरी हुई सी है,

तूफान, बड़ता जा रहा है,
नीवें, उखड़ सी रही है,
नींद, ओझल है आंखो से,
रातें, लंबी लग रही है,

महफ़िल, अब कहा रही है,
नगमे, कौन गा रहा है,
दस्तक, अब नहीं कहीं है,
आंखे, पथरा रही है,

मगर,
प्यार, अब भी बड़ रहा है,
जिंदगी अब भी चल रही है,
इंसा, अब भी चल रहा है,
ख्वाहिशें, अब भी बची है,

और
सुबह, एक नई आएगी,
खुशियां, झोली भर लाएगी,
बिछड़े, फिर मिलेंगे इक दिन,
महफ़िल, फिर सजेगी इक दिन,

हसरतें, पूरी होगी फिर से,
सपने, जिएंगे दिल से,
कोपलें, फूल बनेंगी इक दिन,
गुलिस्ता, लह लगाएंगे फिर से,

हसीं, चेहरों पर आएगी,
बच्चे, फिर से मुस्कुराएंगे,
गले, फिर मिलेंगे मिलकर,
खुशी, के गीत फिर से गाएंगे,

लौटकर, वो आयेंगे इक दिन,
मिल, फिर उनसे पाएंगे,
बात दिल की, फिर से कहेंगे,
इश्क़, फिर से कर पाएंगे।।

देव

8 may 2020

ना ना करने का, तुझे गुरूर मिला होता

ना रास्ते मेरे,
तेरे रास्तों से मिलते,
ना इश्क़ हुआ होता,
ना ख्वाब देखता।

ना बेखुदी के आलम में,
यूं जल रहा में होता,
ना अफसोस का तुझे,
कोई अफसोस होता।

मगर ना जी रहा था मैं,
ना जिंदगी थी मुझमें,
ना तू मिलती मुझे,
ना मैं खुशगुवार होता।

ना मुस्कुराती तू,
देख तस्वीर खुद की,
ना ना करने का,
तुझे गुरूर मिला होता।।

देव

8 may 2020

ये फासले, मिटते नहीं

ये फासले, मिटते नहीं,
उनसे कदम, मिलते नहीं,

कुछ दूरियां, कुछ मजबूरियां,
रखती है हमको, उनसे जुदा,
उनकी खबर, अब मिलती नहीं,
उनसे कदम, मिलते नहीं।

ख्वाबों में उनको, बसाया है हमने
दिल भी उन्हीं से, लगाया है हमने,
ख्वाब मगर, दिखते नहीं
उनसे कदम, मिलते नहीं

ये फासले, मिटते नहीं,
उनसे कदम, मिलते नहीं।।

देव

8 may 2020