Random thoughts

[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरी नज़्में पढ़े, गर कोई,
अक्स तेरा दिखेगा,
तुझसे जुदा हुआ तो,
ना लब्ज़ एक बचेगा।।

देव
[19/06, 3:14 am] Lavya Airtel New:

जो चल रहे है,
मेरे जनाजे में आगे आगे,
जरा गौर से देख लो,
मेरा कत्ल करने वाले भी,
शायद यही है।।

देव
[19/06, 4:58 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

वक़्त होकर भी, कितना कम हो गया है,
लब्ज़ भी गिन कर, पढ़े जाते है।
देव
[20/06, 2:45 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

जब भी मुझ पर, है कुछ लिखा जाएगा,
जिक्र तेरा, पहले पन्ने पर आयेगा।।

देव
[20/06, 2:46 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरी गुस्ताखियां ही तो, तेरी अदा है,
यूं ही नहीं यार, तू सबसे जुदा है।
Dev
[20/06, 2:47 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरे लब्जो को, तेरी तलाश है कबसे,
तू बड़ तो सही, हम साथ है कबसे।

Dev
[20/06, 2:49 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

दम है तुझमें, सबसे जरा कम नहीं,
बेखौफ जीना तेरा, ये अदा भी कुछ कम नहीं।।
Dev
[20/06, 2:50 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

थम तो सही, ज़रा सांस तो लेने दे,
यार साथ है तेरे, नाम तो लेने दे।।
For Neeti
Dev
[20/06, 2:51 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

आवाज की मिठास, और खास अंदाज,
उस पर ये मिजाज, वाह जनाब।।
Dev
[20/06, 2:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

गाने के बोल, कुछ गुनगुना दो,
कुछ किस्से यारी के भी, अब बना लो।।

Dev
[20/06, 2:57 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

महफ़िल कहा महफ़िल, तेरे बिना,
शराब भी बेनशा है, गर तू नहीं।।

Dev
[20/06, 2:58 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

थिरकती सी आहटों से, पहचान लिया,
यार, तू है यही कही, ये जान लिया।।

Dev
[20/06, 3:00 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कुछ किस्से बिखेर कर, समेटता हूं,
तेरी हंसी के, पल जमा करता हूं।।

Dev
[20/06, 3:01 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कुछ तो समेटा सा, लगता है तू,
तेरी बातों में, कुछ बात तो है।।

Dev
[20/06, 3:05 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

समेटे जज्बातों का पहाड़, पर चलती है बिंदास,
यूं ही नहीं तू है, तुझमें है कुछ खास।।

Dev
[20/06, 3:05 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

ख्वाहिशें हजार है, मगर कुछ खास नहीं,
दोस्त तू नहीं, तो मुझमें कोई बात नहीं।।
देव
[20/06, 3:06 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

यार तू साथ है, तो घबराना कैसा,
तू जो नहीं, तो अफसाना कैसा।।
Dev
[20/06, 3:07 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरी शर्माहट पर, कर दे फिदा ये जहां,
जरा गौर से देख, तेरे लिए भी होगा, कोई यहां।।
Dev
[20/06, 6:49 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

फांसले दरमियान, अब रहे ना कहीं,
तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी
[23/06, 12:19 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

दूर होकर तुझसे, क्यूं तन्हा होता हू,
ये इश्क़ है, या यूं ही, दिल्लगी तुम करते हो
[24/06, 1:45 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरी खुशमिजाजी पर, यूं ही कसीदे कसते है,
ना जाने, हंसना मुश्किल क्यूं लोगो को लगता है।।

देव
[24/06, 1:47 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

हमे तो तन्हाई, नागवार लगती है,
यूं ही लोग, तन्हाई से मोहब्बत करते है
[24/06, 2:02 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

एक शाम ही काफी है, जीने के लिए,
कभी, गुजारो जिंदगी, कुछ पलो के लिए।।

देव
[24/06, 2:13 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अंगुलियों से बालो को मेरे, सहलाते हुए,
कह दिया उसने, मोहब्बत है, इतराते हुए।

लबों से गुनगुनाती रही, वो नज़्में,
मैं तकता रहा उसे, फिर जाते हुए।
[24/06, 6:03 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

रंग ए इश्क़ है मेरा,
यू ही नहीं उतरेगा।।।

देव
[24/06, 6:04 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

जबान नहीं, ये नजर है जनाब,
कभी झूठ नहीं बोलती।।

देव
[24/06, 11:07 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तुम बस मुस्कुराते रहो, हर क्षण,
फिक्र तो, मगशूल है मेरे संग।

देव
[24/06, 11:20 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

आइना को भी खुद पर, गुरूर होगा,
तेरे हुस्न, जब सामने, संवरता होगा।।

देव
[25/06, 1:32 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उन आंसुओ पर तो यकीं कर,
जो यार के दीदार की खुशी में,
कब से, थमे बैठे है।

देव
[25/06, 2:46 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तवस्सुर उसका, हो जाए, कुछ पल की सही,
हर नमाज में, दुआ उसकी करता हूं।।

देव
[25/06, 9:08 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

बस अल्फ़ाज़ ही तो थे, और
कोई बन गया, कोई गया बिगड़।।

देव
[27/06, 2:27 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरा नज़रे उठा कर,
झुकाना हुआ,
तेरे इश्क़ में दीवाना,
जमाना हुआ।।

देव
[27/06, 2:30 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

शराब भी कितनी, पी कर देखी मैंने,
तब भी, उतनी ही, मोहब्बत करता हूं।
देव
[27/06, 2:34 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

लोग यू ही नहीं, बेदर्द कहते मुझे,
जिस्म है यहां, दिल दे दिया है तुझे।।

देव
[27/06, 9:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

हर रोज, उससे इश्क़, फिर से शुरू करता हूं,
उसके आने का इंतजार करता हूं।।
[27/06, 9:13 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उनकी चाहत का आलम ये है, कि,
हर सुबह, फिर से इश्क़ शुरू करते है।।

देव
[27/06, 9:14 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उनकी चाहत का आलम ये है,
हर सुबह, इश्क़ शुरू करते है,
हर रात, इंतेज़ार में जगते है।।

देव
[28/06, 12:06 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

जिंदगी यू ही गुजरती रही,
वो अपने में मगशूल रही,
और हम उनमें।।

देव
[28/06, 12:08 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

करीब तो सब थे,
बस, वो ही ना थे,
जिनके हम थे।।

देव
[28/06, 12:10 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

आज तो हद ही होगी,
जाने कब रास्ता गुज़र गया,
सब हमसे गुफ्तगू करते रहे,
और हम उनमे खोए रहे।।

देव
[30/06, 12:14 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

जिंदगी बिंदास सी, जीती है तू,
गानों में तेरे, बसती है रूह,
जीना किसे कहते है, जाना है तुझसे,
हरदम यू ही, बस हंसती रहे तू।

देव
[01/07, 12:09 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

टूटे हुए दिल को, सीने की कवायद कर रहे है,
कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

देव
[02/07, 1:36 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कर फरियाद तू फिर से,
खुदा फिर से सुनेगा,
जब कोई ना होगा साथ,
तेरे साथ रब होगा।।

देव
[02/07, 1:38 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

भीड़ से दूर हट के सुन जरा
खामोशियां भी बोलती है।।

देव
[02/07, 1:39 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मंजिल को ढूंढ़ते ढूंढ़ते,
रास्तों में ना भटक जाना,
सफ़र में जिंदगी के,
जिंदगी ना तू भूल जाना।।

देव
[02/07, 1:42 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मायूस ना हो जरा,
उससे यू बिछड़ कर,
वक़्त नहीं वो, जो
बस गुज़र जाए।।

देव
[04/07, 2:10 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

यकीं कर खुद पर, खुदा पर,
गर ख्वाबों को हकीकत बनाना है।।

देव
[04/07, 2:55 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तुझमें क्या खोया… मैं भी,
मेरा….. ना रहा।

देव
[06/07, 5:06 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

रंग मेरा उस पर चढ रहा है,
लगता है, उन्हें भी प्यार हो रहा है।।

देव
[06/07, 5:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

सुलझती जिंदगी को, फिर से उलझा रहा हूं,
इक बार फिर से, इश्क़ में डूबे जा रहा हूं।।

देव

हां, इश्क़ है, अब तुझको, भुलाया नहीं जाता

जेहन में, लिखा, नाम तेरा, मिटाया नहीं जाता।
हां, इश्क़ है, अब तुझको, भुलाया नहीं जाता।

तू दूर है जितनी भी मगर, पास, बहुत है,
दिल में है मेरे, बसर तेरा, बताया नहीं जाता।

हर वक़्त, गुजारता है, मेरा, केशुओ में तेरे,
अब दिन है, या रात है, जताया, नहीं जाता।

मंदिर कभी, मस्जिद कभी, हर चौखट को चूमा,
सलामत तू रहे, हर पल, मगर मांगा, नहीं जाता।।

देव

इश्क़ सुकून है,

इश्क़ सुकून है,
इश्क़ इबादत है,
इश्क़ खुदा की दी,
अनमोल इनायत है।

इश्क़ बंदिगी है,
इश्क़ शराफत है,
इश्क़ अल्लाह,
इश्क़ ईश्वर का नाम है।।

जो इश्क़ नहीं,
नहीं मेरा नाम है,
मेरा इश्क़ मुझसे बेहतर है,
इश्क़ पर सब कुर्बान है।।

देव

प्यार में हिसाब करने लगा है

जिसे देखो, इम्तेहा ले रहा है,
अपनी तराजू पर, तोल रहा है,
पैबंद लगी चादर, ओढ़े बैठा है,
मखमल में कमियां ढूंढ रहा है।

मुसाफिर है सब, यहां मिले है,
कुछ पल को, सफ़र में, कर ले,
सफ़र ले हमसफ़र, तू क्यूं,
तन्हा सफर कर रहा है।

इश्क़ में खुदा है, इक बार,
दिल, लगा कर तो देख, मिलेंगी,
खुशियां बेहिसाब, तू क्यूं,
प्यार में हिसाब करने लगा है।

देव

A short story by Dev

क्रमशः

यही कोई पिछले 25 दिनों से वह अपनी किताब लिखने में व्यस्त थी। इन 25 दिनों में उसने कई उतार-चढ़ाव अपनी किताब में लिखे थे। कहानी को कई मोड़ों से मोड़कर यहा तक लेकर आई थी। बड़ी प्यारी सी कहानी लिख रही थी वह, दो दिलो की दास्तान, जो जिंदगी के सफ़र में काफी ठोकरे खाने के बाद एक मोड़ पर मिले थे। अब बस किताब के अंतिम कुछ पढ़ने बचे थे, लेकिन इस मोड़ पर आकर वह बड़ी शंका में थी कि आखिर इस कहानी का अंत कैसे किया जाए। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। पिछले 3 दिनों में वह 4 से ज्यादा बाहर कहानी का अंत लिख चुकी थी। लेकिन हर बार उसे कुछ अधूरापन सा लगता था। जैसे अभी और कुछ लिखना बाकी रह गया है। इसी कमी पेशी के चलते हुए अंत्य है उसने क्रमशः लिखकर किताब ही कर बंद कर दी।

देव

4 जुलाई 2020

लिहाफ ओढ़े बैठोगे कब तक

लिहाफ ओढ़े बैठोगे कब तक,
रातों में तन्हा, रहोगे तुम कब तक,
नहीं जिंदगी, गुजरनी है ऐसे,
बहाने बनाते, रहोगे यूं कब तक।

तुम है नहीं तन्हा, हम भी यहां है,
मोहब्बत की ये इक, अजीब दास्तां है,
उमर है गुजरी, फिर भी जवां है,
बतादो ये चालीस नहीं, साल बीसवा है।

खबर है क्या उनको, क्या हमने किया है,
ग़ज़लों में किए, अपने किस्से बयां है,
तुम भी करो, कुछ तो करके दिखाओ,
बचे जो पल है, उन्हें जी कर दिखाओ।।

देव

4 जुलाई 2020

अम्माA short story by Dev

अम्मा
A short story by Dev

अम्मा काफी बूढ़ी हो चली थी। उसके चेहरे पर झुर्रियों की कतारें लगी हुई थी। यूं तो उसकी उम्र 65 साल थी मगर झुर्रियों ने उसके चेहरे पर कुछ ज्यादा ही उम्र लिख डाली थी । काफी सालों से अपने उस छोटे से मकान में अकेली रहती थी। हां अकेली थी मगर वह अकेली कहां थी।। उसके मकान के बाहर एक बड़ा सा नीम का पेड़ था रोज सुबह वह अपने घर को साफ करती थी और साथ ही नीम के पेड़ के नीचे गिरी हुई पत्तियों को झाड़ एक जगह इकट्ठा करके एक छोटे से गड्ढे में डाल देती थी। उसका रोज का नियम था सुबह जल्दी उठना फिर अपने घर की सफाई करना घर के कोने में छोटी सी रसोई बनी हुई थी, जिसमें अपने लिए दो रोटी सेक लेती थी। यूं तो उसके पास पर्याप्त धन था, जिससे वह अपना गुजर-बसर चला लेती थी। लेकिन चैन से बैठने की आदत नहीं थी। इसलिए दिन में मोहल्ले में निकल जाती थी और औरतों से मिलती थी। उनकी बातें सुनती थी, उनके किस्से सुनती थी, और अपने बालों की सफेदी के हिसाब से उन्हें सलाह मशवरा भी दे दिया करती थी। मोहल्ले की सारी औरतें उसे इतनी इज्जत देती थी। हां वह अकेली रहती थी मगर ऐसा नहीं था कि उसके संतान नहीं थी। काफी सालों पहले जब बच्चे छोटे थे उसका पति उसे छोड़कर जा चुका था। और धीरे-धीरे उसने अपने बच्चों को पाला, पढ़ाया बड़ा किया और 1 दिन बच्चे भी उसे छोड़ कर चले गए थे। एक बार गए तो कहां वापस आते थे। वह अपनी दुनिया में रम गए थे। और यह थी एक आस लगाए बैठी थी कि दिन उसके बच्चे आएंगे। और यूं ही इतने साल गुजर गए कि अब तो शायद बच्चे चेहरा भी ना पहचान पाए। लेकिन उसने मोहल्ले के बच्चों में अपने बच्चों को देखा और उनकी सहायता करने में जुट गई।

कोने वाले घर में नई नवेली दुल्हन शादी होकर आई थी। बड़ी प्यारी सी थी छोटी सी बच्ची, लेकिन कुछ ही दिनों में उसका चेहरा मुरझाया हुआ सा दिख रहा था। अम्मा ने जब जाने की कोशिश करी तो हतप्रभ रह गई। उस छोटी सी बच्चे को घर में काफी प्रताड़ित किया जा रहा था, क्योंकि वह अपने साथ दहेज नहीं लाई थी। जब अम्मा ने उसके ससुराल वालों से बातें करी तो काफी खरी-खोटी सुनने को मिली। लेकिन अभी कहां चुप बैठने वाली थी और उस छोटी सी बच्ची की सहायता करने की ठान ली। एक दिन तो कुछ अनर्थ होते होते रह गया । उसे उस बच्ची की आवाज सुनाई दी। वह उस घर तक गई तो देखा बच्ची के चिल्लाने की आवाज आ रही थी।

हाय रे यह क्या अनर्थ हो रहा है तुम लोग इतनी बुरी तरह से इस छोटी सी बच्ची को क्यों पीट रहे हो क्या इनकी जिसकी जान ले लोगे।

उसे लगा कि यह तो इस बच्ची को जान से मार डालेंगे। किसी तरह से छुड़ाकर वह उस बच्ची को अपने घर ले आई। लेकिन उसके ससुराल वाले कम नहीं थे और रात के अंधेरे में अम्मा के घर में आग लगाने का षड्यंत्र बनाया। रात में एक बच्चे ने भागकर आकर अम्मा को बताया तो अम्मा परेशान हो उठी और तुरंत अपने पलंग के नीचे से संदूक निकाला। अपनी सारी कमाई उस बच्ची के हाथ में रख कर बोली, बेटा तो तुरंत यहां से भाग जाओ और लौट कर मत आना। वह बच्ची परेशान अम्मा की तरफ देखने लगी । अम्मा ने कहा तू मेरी फिक्र ना कर। मुझे कोई कुछ नहीं कहेगा और बच्ची को आश्वासन देकर रात के अंधेरे में भगा दिया। लेकिन अब क्या कर सकती थी और थोड़ी देर में उसके घर मैं आग लगी हुई थी सुबह तक सब कुछ खत्म हो चुका था।

कुछ दिनों बाद वह बच्ची अपने माता-पिता के साथ अम्मा को संभालने आई। उसके माता-पिता अम्मा को धन्यवाद देना चाहते थे। लेकिन जो कुछ हुआ वह देखकर माता-पिता हतप्रभ रह गए। जब पड़ोसियों से पूछा तो किसी ने अम्मा के जले हुए घर में से बचा हुआ सामान दिखाया। उन्हीं में से बच्ची के पिता को एक फोटो दिखी और उसके पैरों के तले से जमीन खिसक गई। शायद उसके बच्चों ने पहली बार अपने पिता की यह हालत देखी थी। 25 साल बाद उस पिता ने अपनी मां की सूरत देखी थी।

देव

2 जुलाई 2020

हिन्द ही हिन्द है चमका, जग में है अब

देश वही है, बस सोच बदल गई अब
देश भक्ति जताने की, रीत नई अब,

राम की मर्यादा निभा चुके काफी है हम,
कृष्ण का दर्शन समझ, चले है हम अब।

अन्याय के आगे झुकते नहीं है हम अब,
कर सकते एक और, महाभारत हम अब,

अर्जुन, अग्नि, तेज से सजी है सेना अब
कदम नहीं अब पीछे, करेंगे हम अब।

बिना अस्त्र शस्त्र के भी, जीते हम अब,
शास्त्रों से भी धूल चटा सकते है हम अब।

दुनिया ने माना है, अपना लोहा हमसे अब,
हिन्द ही हिन्द है चमका, जग में है अब।

देव

2 जुलाई 2020

मेरी ख्वाहिश, यही चाहेगी

अश्क तेरे बहने से पहले,
आंखे मेरी भर आएंगी,
तेरा चेहरा मुस्कुराता रहे,
मेरी ख्वाहिश, यही चाहेगी।

बेवजह क्यूं तुम शरमाते हो,
यूं दिल में, उतर जाएगी,
तेरा चेहरा मुस्कुराता रहे,
मेरी ख्वाहिश, यही चाहेगी।

हाथ अपना, ना बढ़ाना जरा,
थाम लूंगा तो, उम्र गुज़र जाएगी,
तेरा चेहरा मुस्कुराता रहे,
मेरी ख्वाहिश, यही चाहेगी।

शौक मोहब्बत का, लगा है मुझको,
इश्क़ बेपनाह, तू पाएगी,
तेरा चेहरा मुस्कुराता रहे,
मेरी ख्वाहिश, यही चाहेगी।

देव

2 जुलाई 2020

प्यार बांटता चला।

ना मायूस, ना बैचैन, ना निराश हूं,
जीता हूं जिंदगी अपनी,
बंदा मैं बिंदास हूं,

इश्क़ खुद से भी है, और खुदा से भी,
प्यार मिलता रहा और मैं,
प्यार बांटता चला।।

देव😉

2 जुलाई 2020

मैं जरा उड़ना चाहता हूं।।

परिंदा बन, दूर तक जाना चाहता हूं,
मैं जरा उड़ना चाहता हूं।

कब तक रहूंगा, बंदिशों में जमाने की,
कैद हो घर की, चारदीवारी में,
दूर, बहुत दूर, तक जाना चाहता हूं,
मैं जरा उड़ना चाहता हूं।

फिक्र सारी जला, बेपरवाही की आग में,
ख्वाबों जो सजाए है अपने वास्ते,
उन ख्वाबों को जीना चाहता हूं,
मैं जरा उड़ना चाहता हूं।

परिंदा बन, दूर तक जाना चाहता हूं,
मैं जरा उड़ना चाहता हूं।।

देव

3 जुलाई 2020

A very very happy, doctors day

To beautiful and handsome doctors….

If needed life line,
You brings life in that line,
Some times with your loving words,
Some times with just a glass of wine,

People say, an apple in a day,
Keeps the doctor away,
So i dont eat apple as,
You are the people,
I wanna meet everyday,
How can i be away,

We have lots of pain,
But it is said,
Love heals every pain,
So i love you all, everyday
A very very happy, doctors day.

Dev

1 जुलाई 2020

कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

टूटे हुए दिल को, सीने की कवायद कर रहे है,
कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

कांच के टुकड़ों को जुड़ते, क्या देखा है कभी,
टूटे ख्वाबों को मेरे, जोड़ने का जतन कर रहे है।
कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

चोट दिल पर है लगी, मरहम लगाते है बदन पर,
कर बातें पुरानी, जख्मों को हरा कर रहे है,
कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

घर शीशे का बना, मुझ पर कसीदे कर रहे है,
घोप खंजर पीठ में अपनों के, मेरे यार बन रहे है,
कुछ लोग मुझसे, झूठी मोहब्बत कर रहे है।

देव

1 जुलाई 2020

दिन में अक्सर, तुझे देखता हूं।

ये मेरा पागलपन है,
या तेरी मोहब्बत का असर,
तेरी तस्वीर लिए फिरता हूं,
दिन में अक्सर, तुझे देखता हूं।।

जख्म खाए है इश्क़ में मैंने,
फिर भी तुझपर यकीं करता हूं,
रूबरू तुझसे मुलाक़ात नहीं,
तेरी तस्वीर लिए फिरता हूं,
दिन में अक्सर, तुझे देखता हूं।।

अक्स मेरा हो , तू नजर आती है,
घड़ी भर ना, तू दूर जाती है,
तुझसे बेपनाह मोहब्बत करता हूं,
तेरी तस्वीर लिए फिरता हूं,
दिन में अक्सर, तुझे देखता हूं।।

देव

1 जुलाई 2020

मगर तुम साथ होती,तो कुछ और बात होती

सफ़र तो यू भी, कट जाएगा,
तुम्हारी यादों के सहारे,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

महफ़िल थी, मगर तनहाई भी थी,
लोग थे बहुत, कोई हमसफ़र ना था,
अब मैं हूं और तेरी यांदे है,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

वक़्त भी है अब, और मौसम भी,
शराब है और जाम भी,
पी रहा हूं, नाम तेरा लेकर,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

सफ़र तो यू भी, कt जाएगा,
तुम्हारी यादों के सहारे,
मगर तुम साथ होती,
तो कुछ और बात होती।

देव

30 जून 2020

मुझे कुछ हो गया था

खुली जुल्फों को लहराते हुए,
झुकी पलको को उठा, हौले से,
तुमने जब देखा मुझे, मुस्कुरा कर,
सब कुछ तब ही बदल गया था,
मुझे कुछ हो गया था।

दबा कर ख्वाहिशों को, बैठा था कबसे,
जमाने में खोया था, लेकिन
ना थी मोहब्बत खुद से,
मिलकर तुझसे, कुछ पल,
मैं खुद से मिल गया था,
मुझे कुछ हो गया था।

कभी तलाश थी तेरी,
अब इंतेज़ार है तेरा,
तेरा तुझको पता होगा,
अब ये दिल नहीं मेरा,
तुझमें मेरा बहुत कुछ, खो गया था,
मुझे कुछ हो गया था।।

देव

29 जून 2020

ख्वाब

ख्वाब,
काश! ख्वाब,
बस ख्वाब ही जिंदगी होते,
हम हर पल, तेरे करीब होते,
तेरे पहलू में रख सिर अपना,
ख्वाबों में फिर खो रहे होते।

ख्वाबों में सही, हकीकत होती
तेरे चेहरे पर, मुस्कुराहट होती
बंद दरवाजे, गमों को होते,
खुशियां तेरे आंगन में, खेलती होती।

ख्वाब तेरे, मेरी तमन्ना होते,
तेरे क़दमों में, जहां सारे होते,
खुदा ख्वाहिश कभी को पूछता,
तेरे ख्वाबों, की फेरहिस्त देते।

देव

28 जून 2020

कुछ अनसुलझे से किस्से

कुछ अनसुलझे से किस्से,
कुछ अनकही बाते,
कुछ अनजान रिश्ते,
बचे है तेरे मेरे बीच,

थोड़ा वक़्त निकाल लो,
जरा पास बैठो तो कभी,
माना, हो दूर बहुत,
थोड़ी बातें तो कर लो कभी,

कभी याद भी कर लिया करो,
कभी, कुछ और भी पूछा करो,
अच्छा हूं, तो सब जानते हो,
क्या सोच रहे हो, पूछ लिया करो,

अभी है वक़्त, थाम लो,
फिर गुज़र जाएगा,
जो आज है, क्या पता,
कल ना वो रह पाएगा,

इसीलिए,
थोड़ा वक़्त निकाल लो,
जरा पास बैठो तो कभी,
माना, हो दूर बहुत,
थोड़ी बातें तो कर लो कभी।

देव

28 जून 2020

ये आबरू है मेरी, कब तुम्हे नीलाम हुई

जरा सा बात हुई, आंखे चार हुई,
जरा सा मुस्कुराने में, मोहब्बत बदनाम हुई।

हाल ही तो पूछा था, यू ही दो पल को
जरा सा छू क्या लिया, नींद उनकी बर्बाद हुई।

इंसा मैं भी हूं, थोड़ा जीना देदो मुझे,
मेरी बिंदासी पर, क्यूं सवालों की बौछार हुई।

बेसबर वो है, और कहते है बे अदब मुझे,
ये आबरू है मेरी, कब तुम्हे नीलाम हुई।।

देव

26 जून 2020

बस, अब और ना बदलना

तुम पहले तो कभी ऐसे नहीं दिखे,
जो अब दिख रहे हो,
सोचा ही ना था, कभी तुम्हे प्यार करूंगी,
हां, कोई वक़्त था जब लगता था,
थोड़े खुसंट से होगे, और कपड़े,
पहनने का सलीका भी कहा था,
धीरे धीरे वक़्त निकलता रहा,
सोच बदलती रही, तुम्हे और जाना,
बड़े सीधे से थे तुम, बड़े सच्चे से,
सच कहूं, वो तो अब भी हो,
मगर अब बहुत बदल गए हो,
प्यार तो होना लाजमी है,
मगर अब पा नहीं सकती,
तो बस, चाहती हूं, दिल से,
चाहती हूं, एक दोस्त की तरह,
बस, यू ही रहना, ये शायद
तुम्हारा सबसे प्यारा वर्जन है,
बस, इसे ना बदलना,
बस, सच्चे ही रहना,
बस, अब और ना बदलना।

बड़ी खुश हू, तुम्हे प्यार ही गया,
उम्र के इस पड़ाव में,
तुम्हे कोई अपना सा मिल गया,
जानती हूं तुम्हे, तुम चाहते हो,,
यकीं करो, आज नहीं तो,
कल उसे अहसास होगा,
हां, यकीं है, उसे भी प्यार होगा,
तहे दिल से, बस,
उस यू ही चाहते रहना
तुम बिल्कुल ना बदलना,

तुम्हारी कविताओं से खींचा है,
मैंने चित्र उसका, सच में,
हंसी नहीं है कोई दूजा उससा,
उसकी हर अदा को तो,
लिख डाला तुमने,
हर लब्ज़ में अपने,
उस उतारा तुमने,
यूं ही उसके खातिर,
लिखते रहना,
बस, अब और ना बदलना।।

देव

26 जून 2020

डिजिटल शिक्षा

टेकनोलॉजी का प्रसार,
काम कर रहा है, कंधो के भार,
जो पहले विरोधी थे, वही
दे रहे है, डिजिटल से शिक्षा अपार।

डॉक्टर द्वारा दिए, लेक्चर्स अपार
जिसे देखो, भेजने में लगा था,
मेसेज हजार,
कभी आंखो की, तो कभी दिमाग,
हो जाएगा खराब,
बच्चो को बचाओ अपने,
करो कम, मोबाइल लैपटॉप
टीवी पर बिताया वक़्त अपार।

और कांधे पर लेकर जाते जब,
भारी भरकम बस्ते का भार,
माता पिता समाजसेवक का
हुआ स्कूल में प्रदर्शन अपार।

अब जब, बात भविष्य की आईं
इंटरनेट की बारी आई,
देखो, नहीं बुरा है डिजिटल,
पड़ रहे है बच्चे अब घर पर।

देव

25 जून 2020

बस, एक बहाना ही तो चाहिए

बस, एक बहाना ही तो चाहिए,
तुझसे बात करने को,
यूं ही कहा अब तुझसे,
बात होती है।

यूं तो अक्सर,
कुछ पल गुज़र जाते थे साथ,
अब कहा तुझसे, हर रोज
मुलाक़ात होती है।

देव

25 जून 2020

ठंडी आइसक्रीम, और यार, तेरा साथ

तुझसे वो अचानक मुलाक़ात,
कुछ बातें, कुछ अल्फ़ाज़,
थोड़े जो बांटे हमने जज्बात,
कुछ गर्म हवा, कुछ ठंडा अहसास,
तुम्हारी, वो छोटी छोटी बात,
बस, इस शहर में, यही तो है याद
ठंडी आइसक्रीम, और यार, तेरा साथ ।

देव

क्यूं तेरे नाम को, ढूंढता हूं,

क्यूं तेरे नाम को, ढूंढता हूं,
पल दो पल में अक्सर,

क्यूं याद तेरी, आती है,
मेरे जेहन में अक्सर,

क्यूं पूछता हूं हाल तेरा,
लोगो से अक्सर,

क्यूं, देखता तस्वीर तेरी,
दिन में कई बार अक्सर,

क्यूं खोजता हूं, तेरा चेहरा,
हर चेहरे में अक्सर,

क्यूं रहता हूं, बेकरार तुझसे,
मिलने को अक्सर।।

देव

वो प्यार नहीं तो क्या है।।

तेरे हाथो को थाम, कुछ पल बैठा था,
सबसे सुकून भरे थे वो लम्हे।

कुछ अश्क तेरी आंखो से भी बहे थे,
बता दे, वो प्यार नहीं तो क्या था।

तेरा बातों को, गहराई से बोलना,
और मेरा तुझे, एक टक सुनना,

तेरी आवाज़ में खो जाना, तेरा मुस्कुराना
बता दे, वो प्यार नहीं तो क्या है।।

Dev

ना करो वक़्त जाया

मौत जिंदगी से बेहतर है,
या जिंदगी मौत से,
बेसिरपैर की बातो में,
ना करो वक़्त जाया,

मिला है जो, अपनालो,
बेझिझक, जो आज है,
वही है तेरे पास, कल
क्यूं ना छोड़ दे, कल पर।।

देव

यूं ही लोग, इश्क़ को छिपाए फिरते है।।

दर्द कहा किसी को, अच्छा लगता है,
यूं ही लोग, खुशमिजाजी पर, कसीदे कसते है।

हमे तो तन्हाई, नागवार लगती है,
यूं ही लोग, तन्हाई से मोहब्बत करते है

इश्क़ है तो जताने में क्या हर्ज है,
यूं ही लोग, इश्क़ को छिपाए फिरते है।।

देव

यकीं कर, एक दिन, मुझे ही पाएगी

तेरी महफ़िल में, जो खाली है, एक जगह,
यकीं कर, एक दिन, मुझे ही पाएगी।

माना, बाहें बहुत मिल जाएंगी, तुझे,
चैन की नींद, मेरे आगोश में ही आएगी।

अश्क तेरे, यू ही ना, बहा रोने में,
काम आएंगे, जब, तू खिलखिलाएगी।

डर मत, कदम आगे तो बड़ा, क़दमों में,
तेरे हथेलियां मेरी, बिछ जाएंगी।

देव

बेसब्र सी जिंदगी, और तेरा साथ

बेसब्र सी जिंदगी, और तेरा साथ,
कुछ पल ही सही, जीया तो सही।

बेमानी सा वक़्त, और तेरे कुछ पल,
कुछ और ना मिले, कोई गिला नहीं।

ख्यालों के भंवर में, तेरी एक याद,
भुला दू सब कुछ, कोई शिकवा नहीं।।

देव

तू अभ्र है, मैं सब्र हूं

तू अभ्र है, मैं सब्र हूं,
तू जिंदगी, मैं ख्याल हूं।
तू रूह है, मैं नाम हूं,
तू शराब है, मैं जाम हूं।

तू नहीं तो, मैं किस काम का,
मैं नहीं तो, तेरा नाम क्या,
मिल जाए गर, दोनों कभी,
मिसाल देगा, ये जहां।।

देव

रोज करेंगे, सब संग मिलकर, प्राणायाम

नमस्कार, जोड़े दोनों हाथो को, करे प्रणाम,
अब इसमें भी है क्या ज्ञान,

साधारण सा आसान, मगर गूढ़ है विज्ञान,
करता है शरीर में, ऊर्जा का संचार,

किसने जाना था, बस संसो की लय से,
बना सकती है, ये दुर्ग अभेद,

अब विज्ञान भी मानता है वैज्ञानिक भी,
योग से बढ़कर नहीं है कोई, इलाज अभेद,

चलो करते है सब मिलकर, प्रण ये आज,
रोज करेंगे, सब संग मिलकर, प्राणायाम।।

देव

तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

फांसले दरमियान, अब रहे ना कहीं,
तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

उम्र काफी, गुज़र गई, और बची, है अभी,
चाहत इस दिल में, कुछ कम, ना हुई,
तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

इश्क़ था, हुआ कभी, दिल ये भरता नहीं,
ये दिल, है फिदा, तुम पर, जोहराजबी,
तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।

फांसले दरमियान, अब रहे ना कहीं,
तुम मिलोगे मुझे, फिर कभी ना कभी।।

देव

लगता है उसके आज, जुल्फे अपनी खोली है।

मौसम तो गर्मी का है, पर ये सर्द हवाएं कैसी है,
लगता है उसके आज, जुल्फे अपनी खोली है।

चांद को ढूंढा आसमां में, आंख मिचौली खेली है,
उसके नूर से मेरे जहां में, रोशनी कैसी फैली है।

ना फूल है यहां, ना बगिया, कैसे खुशबू ये फैली है,
उसकी सौंधी सोंधी सुगंध से, मेरी बगिया महकी है।

ना सोचा कुछ, ना पड़ पाया, फिर कैसे नज़्म ये निकली है,
उसकी सूरत बस सोच सोच कर, हाथो ने कविता ये लिख दी है।।

देव

ये दोस्ती, ही तो है, जिंदा हूं मैं यहां

तुम हो तो मैं हूं, वरना मैं, मैं कहा,
तुम है तो मै हूं, वरना, दो पल का मेहमा।

ये दोस्ती, ही तो है, जिंदा हूं मैं यहां,
नहीं दोस्ती, तो तू कहां, मैं कहां।

मुझको मैं बना कर, कहीं चल ना देना तू,
तू नहीं, तो जहां में, मेरा है क्या।।

देव

यार छूट गए जो पीछे,कुछ ना बाकी, रह जाएगा

कभी रातें भी, इतनी स्याह होंगी,
सोचा ना था,
अक्स भी साथ ना छोड़ जाएगा।

तब भी होगा, तो बस यार साथ,
पकड़ कर हाथ,
तुझे सुबह तक ले जाएगा।

जरा, सम्हाल कर चल ए जिंदगी,
यार छूट गए जो पीछे,
कुछ ना बाकी, रह जाएगा।

देव

है पिता, तुम्हे शत शत नमन करता हूं।।

Who loves their dad pls read it, and if not, still pls read it, my contribution to all father or mothers playing role of father as well….

कब का बड़ा हो गया मै,
और वक़्त तुझे जरा ना मिला,
अक्सर, कौनसी क्लास में आगाया,
तुम्हारे मुंह से ये प्रश्न निकला,

ये शिकायत रही, मगर जानता हूं तुझे,
ताउम्र, तू हमें खुश देखने की कोशिश में,
खुद की जरूरतों को भूलता रहा,

चाहता तो तू भी है हमे, सबसे ज्यादा,
मगर, हमारी ख्वाहिशें कहीं अधूरी ना रह जाए,
तू अपने प्यार को, जाहिर, वक़्त देकर ना कर सका,

याद है, कैसे, कुछ वक़्त संग बिताने को,
रात डर से सोने पर भी, तू जल्दी उठता था,
मुझे स्कूल के लिए तैयार करने में ही,
जाने कितनी अठखेलियां करता था,
बस कुछ और वक़्त और मिल जाए साथ,
बस को सामने से जाने देकर, स्कूल तक,
छोड़ने का सबब करता था,
ये प्यार ही तो था,

हमने तो हमेशा, तुम्हे एटीएम समझा,
जब कुछ चाहिए, झट से बोल दिया,
कभी, प्यार से तो कभी गुस्सा जाहिर किया
और तुमने ना भी तो ना किया,
जो मांगा, बस दिला दिया, ये प्यार ही तो है

पूरा दिन काम में व्यस्त, शाम थका हारा,
घर आता था, भुला अपने शौक को,
हमारी ख्वाहिशों को पुलंदा सुनता जाता था,
पूरी करने ख्वाहिशें, तू फिर नींद की
परवाह किए बिन, आगे बढ़ने की
तैयारी में लग जाता था, ये प्यार ही तो था,

जाने कितनी नज़्म सुनी मां पर,
और कितने त्याग गिनाए गए,
अक्सर, पिता पर बस इल्जाम लगाए गए,
पर ना जीना, पिता का त्याग जरा,
जो जिंदगी की जद्दोजहद में,
सबसे दूर होता गया, ना अच्छा बेटा,
ना पति, ना अच्छा बाप कहला पाया,
ये कविता में तुझको अर्पित करता हूं,
है पिता, तुम्हे शत शत नमन करता हूं।।

देव

पर्यावरण का हर कण खुश है।

ये क्या महामारी आईं है,
क्या सच में महामारी आईं है,
या धरा को बचाने, भगवान ने,
कोई नई चाल चलाई है,

क्यूं फिर से आकाश, नीला है,
क्यूं नदियों का जल, निर्मल सा है,
क्यूं, जंगल फिर से हरे भरे,
क्यूं, मौसम बदला बदला सा है,

क्यूं, कलरव करते पक्षी फिर से,
क्यूं, बादल आ गए, बिन मौसम के,
क्यूं, क्रीड़ा करते, घूमे बछड़े,
क्यूं, जानवर, शहरों को मुड़ गए,

क्यूं, दिखता नहीं प्रदूषण जरा सा,
क्यूं, हो गया, हिमालय बड़ा सा,
क्यूं, हवा में घुली, मिठास है अब,
क्यूं, छत पर सोने में, आए मजा सा,

क्यूं, नई सुबह, हर शाम नई है,
क्यूं, बच्चो के मुख, मुस्कान नई है,
क्यूं, सूने घर, अब दीप जले है,
क्यूं, बिन चिंगारी, दीवाली मने है,

धरती खुश, अब अम्बर खुश है,
नदियां खुश, अब जंगल खुश है,
खुश है जीव, जंतु भी खुश है,
पर्यावरण का हर कण खुश है।।

देव

ये मां कहलाती है।।

सम्हाल कर, पतेली में, चम्मच चलाती है,
एक एक ग्रास, नन्हों की थाली में डालती है,
कहीं भूखे ना रह जाए, बड़े प्यार से खिलाती है,
और खुद, बचे कणों में मिला पानी जरा,
पीकर सी जाती है, ये मां कहलाती है।

ना जाने कितनी रातें, गीले में खुद सोकर,
सूखे में सुलाया हमे, खुद जाग कर,
राते काली, लोरी गा, सुलाया हमे,
अपने सपनों को कर अलविदा, मेरे
सपनो में खो जाती है, ये मां कहलाती है।

है बुढापा मगर, कम कहा प्यार हुआ,
हो गए बड़े तो, बचपन तो नहीं खो गया,
आज भी, चाए की प्याली, दो पल में,
लेकर आती है, बड़े चाव से, खाना
बनाती है खिलाती है, ये मां कहलाती है।

व्यस्त है हम, जिंदगी में अपनी इस तरह,
ना वक़्त देते है, ना प्यार के दो बोल बोल पाते है,
बड़े हो गए, बस अपनी जिंदगी जीते जाते है,
महीनों में गलती से मिलता है जब नंबर,
तू फ़िक्र ना कर, मैं ठीक हूं, ख्याल रखना,
मुस्कुरा कर बोल जाती है, ये मां कहलाती है।।

देव

फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

कहते है सब, तू बसा है हर कण में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।

प्रथ्वी तेरी, अम्बर तेरा, तेरी ही सब माया,
सांसे तेरी, जीवन तेरा, तेरी आंखो काया,
फिर क्यूं ढूंढे इंसा तुझको, जल थल में।

तुझमें मैं हूं, मुझमें तू है, तू ही मै, मैं ही तू है,
बसा है तू, इस जग के, हर शब्दन में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मूरत में।

कहते है सब, तू बसा है हर कण में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

देव

स्त्री बस स्त्री नहीं, अर्धांगिनी है

भारतीय संस्कृति में कभी भी पर्दा प्रथा नहीं थी। बल्कि स्त्री को अर्धांगिनी माना गया है। प्रथम गुरु मां, एक स्त्री होती है। बेटियां देवी के रूप में पूजी जाती है। पत्नी का स्थान, पति के साथ होता है। फिर पर्दा क्यूं।।।

कुछ पेश है।।

बेगैरत कहने वालो, जरा नज़रे घुमा लो,
पर्दा क्यूं मै करू, जब जरूरत है तुम्हारी।

मेरी नज़रे तो झुकी है, उठी पलकें तुम्हारी,
ख्यालातों को क्यूं इतना, उड़ाते हो यहां तहा।

इतनी शर्म है तो, को देती हूं तुमको,
जरा अपनी हया को, पहनाओ शर्म का पर्दा।

सीता, राधा, पार्वती, लक्ष्मी या दुर्गा,
किसी के माथे पर देखा, क्या तुमने पर्दा,

जना स्त्री ने तुमको, करे स्त्री ही पर्दा,
कैसा धर्म है ये, कहा की है मर्यादा।

ये हिन्द है, यहां की संस्कृति यही है,
स्त्री बस स्त्री नहीं, अर्धांगिनी है।।

देव

मुझसे ना करो इश्क़, पछताओगे

मुझसे ना करो इश्क़, पछताओगे,
यहां सूखी नज़रे है, अश्क भी ना पाओगे।।

ढूंढ़ती सी कभी, जिंदगी आ गई थी,
खंडहरों में मेरे, उसको भी ना मिला बसर,

सब कुछ रुका सा है, थमा सा है यहां,
जब से वो गई है, वक़्त ठहर सा गया।

देव

मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं

खुद ही, खुद का, इम्तिहान लेता हूं,
कभी अव्वल, कभी नाकाम होता हूं,
मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं।

मोहब्बत है तो है, नहीं मैं डरता हू,
कुछ अपनाता हूं, कुछ छोड़ देता हूं,
मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं।

मुलाक़ात तो होती है, अक्सर उससे,
कभी देखता हूं, कभी कुछ बोल देता हूं,
मैं, अक्सर कुछ नया करता हूं।

देव

भगवान की भी, बोली लगा डाली

भगवान की भी, बोली लगा डाली,
सोने चांदी में, कीमत अदा कर डाली,
और जो बंदगी, लेकर खुदाई में लगे थे,
उन पर तोहमत, गरीबी की, लगा डाली।

मगर खुदा भी तो, तभी खुदा है,
हां, इस कदर सबसे वो जुदा है,
जिस्म सोने का सजा, आलीशान मंदिरों में,
जान दिल की मूरत में, समा डाली।।

देव

Random thoughts

[16/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

यूं तो इजाजत की उससे,
कभी जरूरत नहीं थी,
मगर आज, ना जाने क्यूं पूछ डाला,
तेरे आगोश में, जगह है तो बता,
[16/06, 11:54 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरे लब्जो पर, बस तेरा,
एक नज़र डालना काफी है।
तारीफ खुद बा खुद,
मुझ तक, पहुंच जाती है।।

देव
[17/06, 11:44 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

श्मशान की राख उठा कर,
उससे पूछा, क्या खाक में,
मिलने पर भी,
ख्वाहिशें बाकी रहती है।।

देव
[17/06, 11:45 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरे जीने की वजह,
मुझसे यूं ना पूछो,
बेवजह जीने का भी,
अलग मजा है मेरे यार।।

देव
[17/06, 11:49 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

Comparison of death, of a celebrity and a sipahi…

अश्क उसके क्या छलके,
क़यामत सी आ गई,
और कुछ रोते रहे,
नजर ना एक पड़ी।।

देव
[17/06, 11:53 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मोहब्बत और नफ़रत में,
बस नन्हा सा अंतराल है,
कुछ पास होकर है दूर बहुत,
कुछ दूर होकर भी, है इतने करीब ।।

देव
[17/06, 11:55 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उससे पूछ ही डाला,
बता, क्या है, मेरी खता,
बड़े अदब से उसने बोला
हद से ज्यादा, मोहब्बत।।

देव
[18/06, 12:27 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

वो सवाल पूछते रहे, और
मैं जवाब ढूंढता रहा,
वक़्त जो बचा था, बस,
यूं ही गुज़र गया।।

देव

[18/06, 10:28 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

ख्वाबों की हकीकत,
ख्वाहिशों का पूरा पन,
तुम हो, तभी तो है।।

देव
[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

लफ़्ज अल्फ़ाज,कागज,किताब सब बेमानी है..
तुम कहते रहो, हम सुनते रहें ,बस
इतनी सी कहानी है…


[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरी मुस्कुराहट पर ही तो,
नज़्में हजार लिख डाली,
वरना लब्ज़ ढूंढने में ही,
उम्र तमाम थी मेरी।।

देव
[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरी नज़्में पढ़े, गर कोई,
अक्स तेरा दिखेगा,
तुझसे जुदा हुआ तो,
ना लब्ज़ एक बचेगा।।

देव
[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरी महफ़िल का वो चिराग,
दूर ही सही, तपिश तो देता है।।

देव
[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

सफ़र संग हमसफ़र हो,
कम जरा ये सफ़र नहीं,
सफ़र में तू संग ना हो,
सफ़र उस सफ़र में हम।।

देव
[18/06, 10:38 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अजीज भी कहते हो,
और यकीं भी नहीं,
चाहत है अगर तो,
दम की परवाह क्यूं हो।।

देव

फिर से उससे, इश्क़ कर रहा हूं।।

अंतर्मन से मेरा द्वंद चल रहा था,
खुदा है या नहीं, जवाब ढूंढ रहा था,

कहने को तो, अहम ब्रह्मस्मी कहते है,
और में ही ब्रह्म हूं, तो ढूंढ क्या रहा था,

शायद, मैंने उसे अपने में ही, खो दिया था,
जो होना था मुझे, मैं नहीं रहा था,

ना खुद पर यकीं, ना उस पर यकीं था,
ख्वाहिशों का पुलंदा, ले, भटक रहा था,

बेखुदा को खुदा, खुदाई को भुला,
ना जाने कहां कहां, मथा टेक रहा था,

मगर अब समझा हूं, मै ही वो, वो ही मै हूं,
फिर से उससे, इश्क़ कर रहा हूं।।

देव

यूं ही तो नहीं, तुम जिंदगी हो

कल मिली थी रास्ते में,
बड़ी बदहवास सी चली जा रही थी,
जैसे कुछ छूट गया हो,
पसीने में तरबटर,
हांफती से, बड़े जा रही थी,
मैंने पूछा, क्या हुआ,
इतनी परेशान सी क्यूं हो,
उसके कहा, मेरी ख्वाहिशें,
मेरे सपनो को लेकर ,
जा रही है, क्या करूं,
बड़ी असमंजस में हूं,
ख्वाहिश को रखूं,
या सपनों को, कुछ
समझ नहीं आ रहा है,
इसी उल्फत में, सब कुछ
छूटता जा रहा है,
मैंने कहा, सपने तो
रूह देखती है,
जो अंतर्मन से आते है,
ख्वाहिशें दिमाग देता है,
जो हर पल बढ़ती जाती है,
बाकी, तुम समझदार हो,

यूं ही तो नहीं, तुम जिंदगी हो।।

देव

हमारे ख्यालात तो मिल सकते है।

मैं नहीं, कोई बात नहीं,
मेरे ख्यालात तो उड़ सकते है।

जो मैं नहीं कर सकता,
मेरे ख्यालात तो कर सकते है।

तू नहीं करीब मेरे, तेरे करीब,
मेरे ख्यालात तो रह सकते है।

तू नहीं बयां करती, तो क्या,
तेरे ख्यालात तो कर सकते है।

ये इश्क़ है, दो रूहों का मिलन,
जिस्मों की इन्हे क्या जरूरत,
जिस्म मिले या ना मिले,
हमारे ख्यालात तो मिल सकते है।।

देव

क्या कुछ पल सुस्ता लू

यूं तो इजाजत की उससे,
कभी जरूरत नहीं थी,
मगर आज, ना जाने क्यूं,
आज पूछ डाला,
तेरे आगोश में, रख कर सर
क्या कुछ पल बिता लू,
क्या कुछ पल सुस्ता लू,

नींद तो आईं है मुझको अक्सर,
पर सोया कहां हूं,
बहाने दर्द के वो पल,
चैन से रोया कहा हूं,
तू ही बता, तेरे कंधे पर,
रख के सिर,
क्या खुल कर रो डालूं।

यूं तो शांत दिखता हूं, मगर
कश्म ए कश बहुत है दिल में,
कोई अपना नहीं है यहां,
जो है महफ़िल में,
तू ही बता, क्या कुछ पल,
तुझे समा अपनी बाहों में,
दुनिया भुला डालूं।

तेरे आगोश में, रख कर सर
क्या कुछ पल बिता लू,
क्या कुछ पल सुस्ता लू।।

देव

16june 2020

किताब के बहाने, हर शाम बैठती है

वो अब फिर से, आंगन के झरोखे में,
किताब के बहाने, हर शाम बैठती है,

जब गुजरता हू, उसकी गली से,
झुकी नजरो से, मुझे तकती है,

नजर मेरी, जब, उस पर, पड़ती है,
पशेमने पर उसके, सलवटें पड़ती है,

शरम और हया से, लाल चेहरे को,
उल्टी किताब से, पल में ढकती है।।

देव

16 june 2020

Random thoughts

[13/06, 12:05 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मेरे जेहन के दायरों में,
बस, तेरा ख्याल है,
चांद भी सोचता होगा,
तुझमें ऐसा क्या खास है।।

देव
[13/06, 12:09 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरे करीब, वक़्त कब गुज़र गया,
पता ही नहीं चला,
मै तुझे तकता रहा, तू मुझे देखती रही।।
देव
[13/06, 12:10 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अपने अश्कों की छिपाना,
कोई तुझसे सीखे,
बड़ी आसानी से, तू हंसा करती है।।

देव
[13/06, 12:11 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

बेतरतीब सी जिंदगी को,
जरा सवारने निकली है,
आज फिर से वही जिंदगी,
पाने निकली है।।

देव
[13/06, 12:13 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

यूं ही नहीं, जाया गया, इश्क़ मेरा यार,
आज फिर से, उसने मुड़कर, मुझे देखा है।।

देव
[13/06, 12:15 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उसके गेशुओं में, भी छिपी है दिल की बात,
यूं ही नहीं, उंगलियों से मेरी, खेलते रहे।।

देव
[13/06, 12:18 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कुछ अश्क उसके भी, खुदा दे दे मुझे उधार,
वो हंसती रहे सदा, मुझे रोने की आदत है।।

देव
[13/06, 12:22 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

बंद जरा कर, झरोखे नजरो के,
बस मै, मैं ही नजर आऊंगा तुझे।।

देव
[13/06, 12:25 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

बेफिक्र सी, थी ये जिंदगी,
तू आईं, फिक्रमंद हो गए।

देव
[13/06, 12:31 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरे दीदार को, ये दिल, अब भी तरसता है,
और तुम हो, अक्सर, दरारो से, झांकती हो।।

देव
[13/06, 12:32 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

यूं ही नहीं है, इश्क़ मैंने किया तुझसे,
कुछ तो तुझमें था मेरा, मुझको बुला रहा।।

देव
[13/06, 12:35 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

तेरे अश्कों को, समझे, नहीं शायद कोई दूजा,
मेरे दर्द को समझे, बस एक तू ही है।।

देव
[13/06, 2:53 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कहीं बदनाम ना हो जाए,
नाम तेरा, छिप कर जमाने से,
कलमें के नाम पर, चुपचाप,
नाम तेरा, लिया करते हैं।

देव
[14/06, 6:00 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

एक लब्ज़ बोल कर, तू तो निकल लिया,
अपने चाहने वालो का, ख्याल ना किया,
माना, तू रुसवा था, जिंदगी से तेरी,
मौत समाधान है, ये किसने तुझे कहा।।

देव
[14/06, 10:04 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

कुछ इस तरह से उसने,
दिल में मेरे रखा कदम,
धड़कने दिल की मेरी,
मेरे जिस्म को, चाहने लगी।

देव
[14/06, 10:06 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

धड़कने भी मेरी, उसका ख्याल रखती है,
जब वो होती है करीब, बड़ी धीरे धड़कती है।।

देव
[14/06, 10:08 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

जब से उसने, दिल में मेरे रखा कदम,
धड़कने मेरी, मेरे जिस्म को, चाहने लगी।

देव
[14/06, 10:10 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

सच में अलविदा किया है,
या यूं ही, किरदार में है वो।।

देव
[14/06, 10:51 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मरने के लिए जीना क्यूं है,
जीने के लिए, मरना क्यूं है,
इस जिस्म से इतनी मोहब्बत क्यूं है,
दिलों में है तू, फिर डरता क्यूं है।।

देव
[15/06, 12:40 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

हर रास्ता बदल कर देख लिया मैंने,
मेरा हर रास्ता, दर को उसके जाता है।।
देव
[15/06, 12:44 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

इश्क़ के नाम पर,
यू ही लोग तोहमत देते है,
हम तो यूं खुश है, कि
वो खुश रहते है।।

देव
[15/06, 12:44 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अश्क क्यूं बहे, आंखो से मेरी,
कहीं, बह ना जाए, नजरो से सूरत तेरी।।

देव
[15/06, 12:47 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

रूबरू थी वो मेरे,
सालो से, आस पास थी,
जितनी खास आज है,
ना जाने कल क्यूं ना थी।।

देव
[15/06, 12:52 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

बेमानी इश्क़ है, जिसमें भूख जिस्म की है,
मुझे तो प्यास, तेरे प्यार की, तेरे याराने की है।।

देव
[15/06, 1:10 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उसे पाने की जिद, ही तो नहीं,
तमन्ना है, तो बस, मैं उसमें खो जाऊ।।

देव
[15/06, 1:13 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

उसमे खोने के लिए,
उसकी इजाजत क्यूं लू,
जुनून भी मेरी, दर्द भी मेरा,
इश्क़ भी मेरा ही तो है।।

देव
[15/06, 2:17 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अपने ख्यालों से,
उसके ख्यालों का सफर,
आसान नहीं, मगर,
नामुमकिन भी नहीं।।

देव
[15/06, 2:20 am] Dev… Devkedilkibaat.Com:

अब भी पड़ती है खत मेरा,
वो खोल कर लिफाफे से।
जिक्र करती नहीं, पर होता है,
एहसास उसकी आंखो से।।

देव
[15/06, 2:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

आज नहीं तो कल,
नसीब भी बदलता है,
गर, मोहब्बत हो सच्ची,
खुदा भी पिघलता है।।

देव
[15/06, 2:13 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

खुद ही आ जाऊंगा, एक दिन,
तेरे दर पर मैं,
यूं ना तस्वीर भेज कर मुझे,
तू रुसवा कर।

देव
[15/06, 10:09 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

पड़ते लेते दिल को,
हर रात हम, गर
दिल वो मेरा,
मेरे पास होता।।

देव
[15/06, 10:11 pm] Dev… Devkedilkibaat.Com:

मोहब्बत ही बहुत है बेहोश करने को,
इश्क़ करने वालो का, जहर क्या करेगा।।

देव

हर चेहरे के पीछे, एक कहानी होती है,

हर चेहरे के पीछे, एक कहानी होती है,
बस उसे लिखता हू, हां, मैं चेहरे पड़ता हू।

कभी छूट जाते है पीछे, मुसाफिर सफ़र में,
उनका साथ देता हूं, हां, मैं हाथ देता हूं।

अश्क जरूरी तो नहीं, अकेले में ही आए,
कभी कोई सामने रो लेता है, हां, मैं पोछ देता हूं।

देव

तू है साथ, भूल जाऊ मौशिकी मेरी

तू साथ है मेरे, ना डर कोई, ना फिकर,
हर महफ़िल में करता ही, बस तेरा जिकर,

तेरे आगोश में, कुछ पल ही सही,
बीता दूं गर, ऐ मेरे हमसफ़र,
जिंदगी का मेरा, पूरा हो जाए मकसद,

लोग यू ही, शुबा करते है,
आशिक़ी पर मेरी,
तू है साथ, भूल जाऊ मौशिकी मेरी।।

देव

एक बार मुझे तेरी, आशिकी दे दे

तख्त ओ ताज की ख्वाहिश,
नहीं खुदा के बाशिंदों को,
देनी है मुझे गर तो, खुदाई दे दे,
एक बार मुझे तेरी, आशिकी दे दे।।

चला था, मैं घर से, कितने मंसूबे लेकर,
तेरे दर तक, आते आते बिछड़ी सारी ख्वाहिशें,
बची है बस, बस तुझसे मोहब्बत बाकी,
एक बार मुझे तेरी, आशिकी दे दे।।

खौफ में कौन नहीं, किसको खौफ नहीं,
बस मौत का नहीं, है जिंदगी का खौफ कहीं,
मेरी सब प्यार, मेरा सारा खौफ लेले,
एक बार मुझे तेरी, आशिकी दे दे।।

देव

15 june 2020

गर तू नहीं तो, किसके लिए जिए

बेरंग से सपनों में, रंग भर दिए,
तू जो आईं, नए रास्ते मिले,

भटका हुआ था, जिंदगी की रहा में,
तेरे सपनों में, नए रास्ते मिले,

ख्वाहिशें, कब की हो गई थी फना,
तूने, जिंदगी को नए, मंसूबे दिए,

तू है तभी तो, जी रहा हूं मैं,
गर तू नहीं तो, किसके लिए जिए।।

देव

15 june 2020

उसकी मोहब्बत दे देना

खुदाया, हो भी गया फना,
मैं कभी तो क्या,
बस, एक नमाज मेरे नाम की,
अदा तू कर देना।

कुछ अश्क बहा लेना,
तू जरा छिप कर,
मेरी तस्वीर नजरो से तेरी,
तू बहा देना।।

यकीं है मुझको, मिलूंगा
तुझसे, किसी जन्म में तो,
या खुदा, इक बार ही सही,
उसकी मोहब्बत दे देना।।

देव

15 june 2020

जहां को और हसीं बनाना

मैं कल जाऊंगा, तो अश्क ना बहाना,
मेरे चेहरे को देख, एक बार फिर मुस्कुराना,

यूं ही नहीं, कहना अलविदा, मुझको जरा,
कुछ लगा हो, अच्छा मुझमें, उसे अपनाना,

कुछ करना मेरे लिए, रोंतो को हसाना,
यही है ख्वाहिश मेरी, जहां को और हसीं बनाना।।

देव

15 june 2020

जाने वो यारी, कब की कहीं, खो सी गई

कभी यूं छोटे छोटे से, पड़ाव में भी तारीफें करते थे,
क्या बात है, बहुत अच्छे, कुड़ोस, अक्सर सुनाई देते थे,
वही तो था जो मेरे यार, अक्सर दिया करते थे,
सीढ़ी डर सीढ़ी, हम आगे बड़ा करते थे,

अब तो दस्तक भी, कभी होती नहीं, दरवाजों पर,
आता है डाकिया भी लेकर, पुलंदा शिकायतें भर,
अब नहीं मिलते है हम, यू चौराहों पर,
अब नहीं मिलती स्माइली, उन्हीं बातों पर,
हर कोई खो गया, मागशूल है और कहीं,
जाने वो यारी, कब की कहीं, खो सी गई।।

देव

14 june 2020

उड़ें जा रहे है

उन उड़ते परिंदो को तो देखो जरा,
बेखबर, हर फिक्र से, यहां की, वहां की,
संग ले साथियों को अपने, उड़ें जा रहे है,

माना, बनाए थे घोसले, बड़ी मशक्कत से,
प्यार उन्हें भी था, यूं अपनों से,
घरोंदो को छोड़ कर अपने, उडें जा रहे है,

चमन ये है सजा, सावन का मौसम है,
ऋतु जाड़े की लाएगी, बसर होना कठिन है,
एक नए सपनों के जहां को, उड़ें जा रहे है।

देव

14 june 2020

मैं मुझको छोड़ कर चला गया

कोई फितरे कस कर चला गया,
कोई इल्जाम है मड़ कर चला गया,
कोई हाथ पकड़ कर बैठा था,
वो हाथ छुड़ा कर चला गया,

कोई सपने दे कर चला गया,
कोई सपने तोड़ कर चला गया,
कोई सपनों में आता था कभी,
वो सपने छोड़ कर चला गया,

कोई मंजिल दिखा कर चला गया,
कोई मंजिल लुटा कर चला गया,
कोई राह में साथ था चलने लगा,
वो साथ छोड़ कर चला गया।

मैं चलता रहा, बस चला गया,
जो मिलते गए, संग चला गया,
कोई मुझको जुदा कर मुझसे गया,
मैं मुझको छोड़ कर चला गया।।

देव

ये पूरा जमाना खाली है

एक आस, बड़ी जालिम होती है,
कभी अपनी, कहां ये होती है,
बस, और पर लगाए रहते है,
और उन्हें अपना कहते है,
कुछ रिश्ते होते है,
जो हमेशा दर्द ही देते है,
कुछ लम्हे होते है,
जो अक्सर, मायूसी देते है,
बेकार ही, बैठें रहते है,
इंतेज़ार भी उनका करते है,
जो महफ़िल में भी होकर अपने,
नज़रे फिराए रहते है,
खाली जाम मिला मुझको,
मयखाना भी खाली है,
कैसे ढूंढे किसको ढूंढे,
ये पूरा जमाना खाली है,

देव

जेहन में उतरना चाहता था।

बस, तेरी एक झलक ही चाहता था,
तेरे करीब, कुछ पल बिताना चाहता था,
यूं ही नहीं, मैं तुझे निहारता था,
तेरी तस्वीर, जेहन में, उतारना चाहता था।।

तेरे चेहरे की वो हंसी, तेरी मुस्कुराहट,
तेरे लबों का हिलना, लब्जो का निकलना,
मैं यू ही नहीं, तुझे सुनता जाता था,
तेरी आवाज़, जेहन में उतरना चाहता था।

स्पर्श किया था तुझे, हाथ मिलाने के बहाने,
करीब था तेरे, कुछ पल तुझ संग बिताने,
मैं यूं ही नहीं, वक़्त तुझ संग बिताता था,
तेरी यादें, जेहन में उतरना चाहता था।।

देव

देव, किसके लिए लिखते हो

लोग पूछते है, अक्सर,
देव, किसके लिए लिखते हो,
किससे मोहब्बत इतनी करते हो,
किसने दर्द इतना दिया,
किस्से शिकायत इतनी है,
कि पल में, पन्ने भरते हो,

मैं तो बस खुश हूं,
अपने से मोहब्बत करता हूं,
सुकून मिलता है, मुझे लिखने से
खुद के लिए लिखता हू

कभी अपने, कभी अपनों के,
अफसाने बयां करता हूं
जो मुझे चाहते है,
उनके लिए लिखता हू,

इश्क़ तो कभी भी ही सकता है,
हां, मैं भी प्यार करता हूं,
मेरे प्यार के बदले में,
जो चाहते है मुझे,
और जो मोहब्बत नहीं पाते मुझे,
उनके लिए भी लिखता हूं,

सबसे करीब, तो यार होते है,
जब कोई नहीं होता,
वही तो पास होते है,
उदासी को हसीं, हसीं को
ठह ठहा बनाते है,
हां, यूं यारो के यार
उनके प्यार के लिए भी लिखता हूं।

देव

कुछ पल ही सही, हुई थी, तुझे, मोहब्बत मुझसे

रूह तेरी, सुन जरा, कह रही, कुछ तुझसे,
कुछ पल ही सही, हुई थी, तुझे, मोहब्बत मुझसे।

यूं ही नहीं, अक्सर, जेहन में तेरे, नाम मेरा आता है,
यूं ही नहीं, तुझे, मुझे सताने में तुझे, मजा आता है,
यूं ही नहीं, तू चुप होकर भी, बोलती है मुझसे,
यूं ही नहीं, नजरे तेरी, ठहरती है मुझपे,
यूं ही नहीं, तू मुझसे, दूर जाती है,
यूं ही नहीं, तू लौट कर, फिर आतीं है,
यूं ही नहीं, तू चलते चलते, रुक जाती है,
यूं ही नहीं, तू मुड़कर, मुस्कुराती है,
यूं ही नहीं, तू लब्ज़ मेरे, पड़ जाती है,
यूं ही नहीं, तू वाह वाह नहीं, लिख पाती है।।

रूह तेरी, सुन जरा, कह रही, कुछ तुझसे,
कुछ पल ही सही, हुई थी, तुझे, मोहब्बत मुझसे।

देव