अक्सर, इंतेहा वो लेता है,

इंतेज़ार तू कर, ऐतबार तू कर
तू अपनी मोहब्बत पूरी कर,
होती है मुराद, यहां पूरी,
जब सच्ची मोहब्बत होती है,

खुदा भी साथ में होता है,
जिस दिल में मोहब्बत होती है,
अक्सर, इंतेहा वो लेता है,
मुश्किल घड़ी, जब होती है।।

देव

अक्सर सुनती वो रहती है

सुबह की फैली लालिमा,
मुझसे ये अक्सर कहती है,
तू फ़िक्र ना कर, यार मेरे,
वो तुझसे मोहब्बत करती है,

बस वक़्त दे तू, थोड़ा उसको
वो यू ही यकीं नहीं करती है,
तेरे किस्से, बहुत फैले यहां,
अक्सर सुनती वो रहती है,

देव

कौन कहता है, अकेली है वो

कौन कहता है, अकेली है वो
यारो की टोली, साथ रहती है,
दो बूंद आंसू आ जाए तो,
घर में जमात लगती है,

फिर भी, ना जाने क्यूं,
हसीं में भी उदासी रहती है,
साथी का तो है इंतेज़ार उसे
दरवाजे नहीं खुले रखती है।।

देव

सपनों का, जहां वो रखती है

खुश तो है, दिखाने को,
फिक्र को छिपा रखती है,
उसकी अंगुलियों अक्सर,
आपस में खेलती रहती है,

जज्बातों को अपने काबू कर,
दुनिया से मुलाक़ात करती है,
अक्सर अपने जेहन में,
सपनों का, जहां वो रखती है

देव

बेफिक्र सी जिंदगी उसकी

बेफिक्र सी जिंदगी उसकी,
और लम्बा ये सफ़र,
ना वक़्त मिलता है पैमाने का,
ना फिक्र करती है जमाने की,

रुक कर, बस देख लेती है,
हर आने जाने वाले को,
गुजराती है शामे उसकी,
अक्सर झरोखे में घर के,

कभी निकल भी जाती है,
अफसानों का थैला लेकर,
बोलती यूं ही नहीं वो,
किस्से है सुनाने को बहुत।।

देव

Random thoughts feb2020

मेरी बज़्म में छिपे थे जज्बात उनके,
ना वो मंजूर हाल कर सके,
ना ज़रा सी वाह निकली।

देव

वो ना भी मिली, तो गम ना कर,
पाने की उसको है, जिद ना कर,
खुशी उसकी हो, यही इश्क़ है पगले,
तू बस दिल से, मोहब्बत कर।।

देव

रोक रही, दीवारों उसको,
जो कभी तूने ही बनाई थी,
आसान नहीं, उस पार है जाना,
वक़्त दे, थोड़ा, इंतेज़ार तो कर।।

देव

भर लो मोहब्बत की कहानी से

खो गया था वो कहीं,
अभी कुछ दिनों की बात है,
बिखरे पड़े थे यहां वहां,
उसकी याद के जज्बात थे,

छोड़ कर, बंधन थे सारे,
कितना खुश हूं मैं यहां,
क्यूं तुम रोती हो, याद में,
जीलो जीवन, अपना वहां,

बात अपनी का कर वो,
जाने कहा गुम हो गया,
देकर मुझे नया रास्ता,
खुदा में लीन हो गया,

फिर मिली, इक जिंदगी,
फिर से, यही इसी राह पर,
दे दिया दिल, फिर किसी को
कुछ पल की मुलाकात पर,

कौन कहता है नहीं,
इश्क़ फिर होता जिंदगी में है,
प्यार से, पिघले है पत्थर,
कहती हूं तुमको, सच ये है,

पल को रोना, पल में हसना,
पल भर ही है, जिंदगानी ये,
ना बिखेेरो, पन्ने जिंदगी के,
भर लो मोहब्बत की कहानी से।।

देव

मैं, मैं ना रहा

मैं, हमेशा से, ऐसा नहीं था,
ये तो वक़्त ने, मुंह मोड़ लिया,
कुछ पल के लिए, मैं, मैं ना रहा,

मुझे भी अरमान थे,
किसी को चाहूं,
शिद्दत से भी ज्यादा,
और चाहा भी तो था,
पर, कहीं गुम सा हुआ,
जिंदगी के सफ़र में,
के संग चले का, सफर ही ना रहा,
मैं, मैं ना रहा,

दर्द इतने मिले,
राह में मोहब्बत के,
तन्हा छोड़ गए,
करके वादे मोहब्बत के,
आंखे पथरा गई,
नम हो गई पलकें,
किया इश्क़ ने धोका,
मैं, मैं ना रहा,

तभी तो राह, जो ना थी
मेरी, मैं चल पड़ा,
हर बार उठाया किसीने,
हर बार था में गिर पड़ा,
जिसे देखो, नोचने की,
मुझे वो चाह रखता था,
मेरे कमजोर जज्बातों से,
खिलवाड़ करता था,
और मैं भी, यू ही खेलता गया,
मैं, मैं ना रहा,

मिले तुम है मुझे,
जाना फिर से था, मुझको मैंने,
आइने बन तुम अाई थी,
पहचाना था खुद को मैंने,
कहीं जो खो गया था, दर्द में
खुशी का नाम तुम लाई,
मुझे मुझसे मिलाने, मेरा
पुराना रूप तुम लाई,
सच कह रहा हूं,
जो मैं बन गया था, अब
मैं, वो मैं ना रहा।।

देव

हां, कह रही हूं,इसका मतलब हां भी नहीं है

कुछ वक़्त में, तुमने,
थोड़ी इज्जत कमाई थी
यही कारण है, मेरे मुंह से तुम्हे
ना नहीं निकल पाई थी,
तुम्हारी जिद के आगे,
में हताश नजर अाई थी,
मगर इसका मतलब, हां भी नहीं है,
हां, कह रही हूं,
इसका मतलब हां भी नहीं है,

माना, मेरे जीवन में कोई और नहीं है,
माना, मैं भी, चाहती हूं, पाना किसी को,
माना, मुझे प्यार का, अहसास नहीं है,
माना, जीवन मेरा उतना रंगीन नहीं है,
मगर,
और कुछ पल, बिता लिए, तुम्हारे साथ,
मगर इसका मतलब, हां भी नहीं हैं,

माना, कुछ दूर तक चली हूं तुम्हारे साथ,
माना, तुम्हारे गम में, थामा था तुम्हारा हाथ,
माना, तेरे आंसुओ को, पोछा था अपने हाथो से,
माना, हसीं थी मैं खुलकर, तुम्हारी बातो में,
मगर इसका मतलब, हां भी नहीं है
हां, कह रही हूं,
इसका मतलब हां भी नहीं है।।

देव

अब ना सुनने की, आदत भी डाल लो..

क्या मैं, बस एक वस्तु हूं,
जो चाहे, जैसे चाहे, यूज करें,
क्या मेरे ख़्वाब, मेरे अरमान नहीं है,
जो चाहे, अपने हिसाब से प्यार करे,

क्या मेरा कोई मान नहीं,
क्या मेरा कोई आत्म सम्मान नहीं,
क्यूं मैं किसी को नहीं चाह सकती,
क्यूं मैं, अपना वर नहीं पा सकती,

युगों से, धकेला है मुझे समाज ने,
कभी दोस्ती, कभी परंपरा के नाम पे,
माना अब जमाना, बदल गया है,
पर अब भी कायम, वही परंपरा है,
बस, जरा सा हंस दू, तो क्या मान लेते है,
मोहब्बत का बस, पैग़ाम छाप देते है,

अब नहीं चलेगा, मुझ पर तुम्हारा जादू,
अब हो गया है, अश्व ये बेकाबू,
अब वक़्त आ गया है, मुझे पहचान लो,
अब ना सुनने की, आदत भी डाल लो।।

देव

उसके घर तक का, सफर याद है…

अब कहां रास्ते याद रहते है,
बस, एक उसके घर तक का,
सफर याद है,
उसकी गली में लगा वो,
लैंप पोस्ट याद है
उसके इंतेज़ार में,
बिताए वो पल याद है,
उसकी हसीं सुनने वाले,
वो मंजर याद है,
हां, उसका मजाक में पागल,
बोलना याद है,
उसके हाथ का बनाया,
वो परांठा याद है,
कॉफी को, एक नए अंदाज़ में,
बनाना याद है,
हां, अब कहा रास्ते याद रहते है,
बस, एक उसके घर तक का,
सफर याद है।।

देव

प्यार है नाम, उसकी खुशी पर, कुर्बान हो जाने का

उसने बस इतना कहा था,
उसे पता नहीं, प्यार होता क्या है,
और जैसे सब बदल सा गया,
मेरा प्यार, उसके लिए और बढ़ गया,

कैसे बताऊं, प्यार होता क्या है,
मैं तो बस इतना बता सकता हूं,
मैं क्या समझता हूं,

साथ में जब वो हो, तू सुकुं मिलता हो,
उसकी आवाज सुनने को, दिल करता हो,
वो पास हो, या दूर कही हमसे,
दिलो में नजदीकियों का रिश्ता रहता है,

प्यार जब साथ हो, खुद पर भरोसा रहता है,
हर मुश्किल काम, बड़ा आसान लगता है,
तन्हा हो, पर नहीं डर तन्हाइयों से लगता है,
सूखी आंखो में भी, खुशनुमा बूंदों का,
बसेरा रहता है।

प्यार वो है, जिसमें कोई उम्मीद ना हो,
प्यार की खुशी में ही, अपनी खुशी हो,
कौन कहता है, प्यार है नाम पाने का,
प्यार है नाम, उसकी खुशी पर,

कुर्बान हो जाने का।।

देव

थाम कर हाथ तेरा, बैठा रहूंगा….

वो एहसास ही कुछ अलग था,
जब हाथ पकड़ कर तुम्हारा, में बैठा था,
जाने कैसा जादू सा चल गया था,
दिल का सारा डर निकल गया था,
मेरी हथेली में, तुम्हारी अंगुलियां
मुझे ढांढस दिला रही थी
और तेरी सांसों की आवाज, जैसे
तेरी आंखो में रुके आंसुओ की,
कहानी बता रही थी,

तेरी दिल की धड़कने,
पहले कभी इतनी साफ कहा सुनी,
हां, सुना था मैंने,
तेरे जज्बातों की लहरों में,
उठे तूफान को बता रही थी,
आंसू तो मुझे आ रहे थे,
मगर लगा, रोए तू जा रही थी,

तुमने कहा था, तुम्हे
पता भी नहीं, प्यार
क्या होता है,
यही तो प्यार है,
जिसका पता नहीं होता है,
बस हो जाता है,
हम रिश्तों में इसे खोजते रहते है,
और दिल किसी से लग जाता है,
वो जब सामने होता है,
तो ध्यान कहीं और नहीं जाता है,
दूर जाते ही उसके,
यादों का सिलसिला
चालू हो जाता है,
कुछ कहने को, दिल बहुत चाहता है,
और जताने में मोहब्बत,
दिल घबरा जाता है,

हां, मैं प्यार करता हूं तुझसे,
मगर जानता हूं, बड़ा मुश्किल है,
तेरे जीवन में, जगह बनाना,
तेरा यकीन जीत पाना,
ऐसा नहीं कि तुझे मुझ पर यकीन नहीं,
पर मुश्किल है तेरा, दोस्ती को,
प्यार में तब्दील कर पाना,

फिक्र ना कर, मेरा प्यार बस रूहानी है,
इसमें नहीं भूख, कोई जिस्मानी है,
गर नहीं चाहती, रिश्ते को कोई नाम देना,
बस, एक दोस्त बन,
मुझसे प्यार करती रहना,
जब भी चाहे, मेरे कंधे पर,
रख सिर अपना,
अपने दिल का बोझ हल्का करती रहना,
जब भी मंडराए तेरे जीवन में,
दुख के बादल,
इस यार को आवाज देना,
कुछ पल, मेरी बाहों में सुस्ता लेना,

तब भी, थाम कर हाथ तेरा
बैठा रहूंगा,
समेट लूंगा गम सब तेरे,
बदले में बस, खुशी दूंगा।।

देव

भाई, कभी रो भी लिया करो

मैंने पहले भी कहा है,
अब भी का रहा हूं,
मर्द को भी दर्द होता है,
और मर्द बन दबा कर दर्द रखते हो,
तो कभी अपने अंदर की,
औरत को भी जगा लिया करो,
भाई, कभी रो भी लिया करो।।

माना, तुम्हे कंधे नहीं मिलते,
मिलती है तो बस, तुम्हारे
दर्द पर हसने वाले चेहरे,
अक्सर, हमारे पास रहने वाले,
होते है दर्द सुनने को बहरे,
इसीलिए, जरूरी नहीं,
हर लड़की को बस गर्ल फ्रेंड बनाया जाए,
कभी, दोस्त बन कर भी,
महफिलों में, परचम लगाया जाए,

झगड़े, फसाद और गुस्सा करने में,
हिम्मत दिखाने वालो,
कहीं ज्यादा हिम्मत चाहिए रोने में,
किसी नाजुक से कंधे पर,
रख सिर अपना,
कभी दर्द भी हल्का करो,
भाई, कभी रो भी लिया करो।।

देव

हमारी दोस्ती की कसम दी

शायद, कुछ ग़लत समझ लिया था,
मैंने उसकी दोस्ती को, प्यार समझ लिया था,

और लगा, पागलों की तरह, उसे प्यार करने,
चाहने लगा था, बेइंतेहा उसे मन ही मन में,

लगी आदतें कुछ, धोका खाने के बाद जो,
उसकी मोहब्बत में, वो गलियां छोड़ दी,

हिम्मत करके, जब किया, इजहार हमने,
उसने अफसोस जता, हमारी दोस्ती की कसम दी।।

देव

शायद, ये मेरा शहर नहीं है

शायद, ये मेरा शहर नहीं है,
शायद, ये मेरा शहर नहीं है,
यहां तो प्यार को, ब्रांड्स की
तराजू में तोला जाता है,
जो ज्यादा महंगा गिफ्ट देता है,
वही, शायद क्या प्यार दे पाता है,
मेरे शहर में तो वक़्त में मायने थे,
घंटो बागीचे में बैठ,
बस एक दूसरे के देखने,
के भी बहुत मायने थे,
मोहब्बत बस आंखो से
बयां हो जाती थी,
आई लव यू, बोलने की,
जरूरत भी नहीं आती थी,

इश्क़ जरा छिप कर होता था,
बुरी नजर ना लगे प्यार को,
चिठ्ठी में भी, काला तिल होता है,
बड़े इत्मीनान से, लव लेटर्स
लिखे जाते थे,
गली य मोहल्ले में, कोई तो
डाकिया का रोल करता था,
एक टाफी के लालच में,
हाल ए दिल लिखकर,
पहुंचाए जाते थे,

माना, पाबंदियां थी प्यार पर,
मगर, तभी तो मजे आते थे,
लोगो से नज़रे बचा,
चेहरे को छिपा नकाब से,
शहर से दूर खोपचे ढूंढे जाते थे,

अब इन शहरों में कहा इश्क़ बचा है,
यह मोहब्बत से पहले,
रूप देखा जाता है,
बैंक बैलेंस चेक किया जाता है,
रिलेशन पहले बनती है,
लव यूं बाद में बोला जाता है,

देव

तेरे सपनों में खो जाता हूं

जरा बता तो सही, क्या तू भी,
कभी सोचती है, मेरे बारे में,
क्या, सुनते हुए तराने,
मैं आता हूं, तेरे ख्यालों में,

वक़्त था, जब मैं कुछ और था,
नहीं था शौक मुझे नगमो का,
अब सुनता तो हूं, पर कहा सुन पाता हूं,
अंतरा आते ही, तेरे सपनों में खो जाता हूं।।

देव

पर ये दिल भी तेरा ठिकाना है

आज नहीं तो कल, कभी तो वो मानेगी,
मेरे प्यार को वो, कभी तो पहचानेगी,

क्यूं छोड़ दूं उम्मीद, यही तो एक सहारा है,
माना, दूर तुम रहती हो, पर ये दिल भी तेरा ठिकाना है।।

देव

जिंदगी के हर हालात में खुश हूं,

हर बात में खुश हूं, हर हाल में खुश हूं,
जिंदगी के हर हालात में खुश हूं,

सब साथ है मेरे, उस साथ में खुश हूं,
तन्हाई का आलम क्या, खुद के साथ खुश हूं,

वो नहीं मिली, पर कहीं तो होगी,
जहा होगी, उसके हालात पे खुश हू,

मिल भी गई, और मिलती नहीं,
उसके ताउम्र इंतज़ार में खुश हूं,

कोई बात नहीं, गर वो चाहती है किसी को,
गर, वो खुश है, उसकी खुशी में खुश हूं,

बहाना तो मुझे, रोने का नहीं मिलता,
रोया गर प्यार में, यूं आंसुओ पर खुश हूं।।

देव

ख़्वाब

बस एक टेलीफोन कॉल ही तो किया था उसने और वह इतना परेशान हो गई, जाने कबसे वह उसके बारे में सोचे जा रही थी। उसका चेहरा जरा बुझा बुझा सा दिख रहा था। आंखों में आंसुओं की बूंदें इस तरह से जमा हो गई कि लगा अब तो बस सैलाब आने वाला है। हाथ जुल्फों में उलझे हुए थे और वह अपनी उंगलियों से बालों को सुलझाने की कोशिश में और उलझाये जा रही थी। चेहरे पर खुशी और गुस्सा दोनों साथ दिखाई दे रहे थे। झुकी हुई पलकों में ना जाने, कितनी बातें घूम रही थी। और हाथों में कपकपी सी फैली हुई थी, जैसे ना जाने क्या हो गया। उसके चेहरे के हाव भाव से उसके रूप की रंगत भी कुछ बदली सी लग रही थी। जाने कितने ही दिनों से उसके मन में कशमकश चल रही थी कि कब वह उससे अपने दिल की बात कह पाएगी और जब आज उसका फोन आया, तो फिर क्यों यह परेशान हो गई। वैसे ऐसा होना तो नहीं चाहिए था क्योंकि उसने भी वही कहा जो वह चाहती थी। लेकिन फर्क यह था की क्या यह तरीका सही था उसको अपने दिल की बात बताने का। बड़े अरसे से अरमान लेकर बैठी हुई थी कि जब उस के सपनों का राजकुमार आएगा कुछ अलग तरीके से उससे पूछेगा। हां हर लड़की का तो यह सपना होता है कि उसका राजकुमार घोड़े पर बैठकर आए उसे बांहों में उठा कर ले जाए और एक बहुत ही खूबसूरत सी जगह ले जाकर अपने प्रेम का इजहार करें। पर यह क्या, इसने तो बस फोन पर ही अपना प्रस्ताव रख डाला। वह अपने ख्वाबों को टूटते हुए देख रही थी अब आगे न जाने क्या होगा।

वो अपने कमरे मैं लगी घड़ी को एकटक ताके जा रही थी वक्त बीते जा रहा था उसकी घर की दीवारें हैं उसकी कहानी बता रही थी ऐसा नहीं था कि वह अपने कमरे को और अपने जीवन को वक्त नहीं देती थी जब भी थोड़ा सबक मिलता था वह ने सजाने संवारने में जुट जाती थी और उसका कमरा उसके कमरे में रखा सामान सामान को रखने का तरीका और हर एक चीज का सही जगह पर हो ना उसके जीवन उसकी आदतों उसकी पसंद उसकी नापसंद को भी बता रहा था मैंने देखा था उसके कमरे में एक कौन है मैं रखा हुआ वह फूलदान। रोज सुबह माली काका बगीचे से तोड़कर ताजा फूल आते थे वह रोज सुबह बड़े तरीके से एक एक फूल की डंडी से कांटो को हटाकर गुलदस्ता तैयार करती थी यह जरूर ध्यान रखती थी कि कोई भी सड़ी गली पत्ती उस फूल ना रहे। फुला के पास उसकी स्टडी टेबल जो किताबों से भरी हुई थी। लगता है उसे रोमांटिक किताबें बहुत ज्यादा पसंद है। यूं ही नहीं तो इतनी रोमांटिक है और प्यार को अपनी जिंदगी में इतनी अहमियत देती है। जाने कितनी ही बार वह शेक्सपियर पड़ चुकी है और उसी स्टडी में एक छोटा सा हिस्सा जिसमें उसने पसंदीदा मूवीस का कलेक्शन रखा है। कोई शक नहीं फिर से वही रोमांटिक फिल्में। और वहां दूसरे कोने में उसका बड़े सलीके से लगाया होगा बेड रखा है। रूस भी उठके अपने बेड को अच्छी तरह से मारती है दिल की शेप का पिलो आज भी उसे बहुत पसंद। जब 16 की हुई थी तो बड़ी खुश होकर उसने वह पिलो खरीदा था और आज भी उसे उसके बिना नींद नहीं आती है और ना ही उसे किसी के साथ शेयर करना चाहती है। दीवार पर कुछ पेंटिंग्स टंगी है कभी कभी वक्त मिलता है तो कुछ बना लेती है। अपने सपनों को कैनवास पर उन्हेल देती है और बस उन्हीं में से कुछ कहानियां निकल आती है यह कहा नहीं अभी उसकी कहानी बताती है उस के सपनों को बयां करती है उसके मासूम दिल को दिखाती है पर हर कोई नहीं समझ सकता। उसे समझने के लिए उसके जैसा दिल की तो होना चाहिए। बस उसी उम्मीद में जो साइड की टेबल पर बहुत सारे फोटोस लगा रखे हैं उन्हीं में से एक फ्रेम आज भी खाली है। वह फ्रेम उसी सपनों के राजकुमार के लिए है जो कभी आएगा और इसके दिल को चुरा कर ले जाएगा।

बस, इक बार, मुझपे तू यकीं तो कर

तहेदिल से, बेपनाह, चाहूंगा तुझे,
बस, इक बार मेरा यकीं तो कर,
हर सांस में, होगा नाम तेरा,
तू इक बार, मुझपे यकीं तो कर,

पहले भी कर चुका हूं इश्क़, किसी से
पहले भी हदें पार करी मैंने पाने को उसे,
पहले भी, सालो सांस में, आवाज थी उसकी,
फिर ना निकली कभी, जब एक बार टूटी,
हरकते मैंने करी है, बेजान जब दिल था,
तूने आकर, फिर से इसमें है जां फुकी,
अब बस तू, हां एक तू ही है, दिल में मेरे
तू इक बार, मुझपे यकीं तो कर

मानता हूं, तेरा दिल है, नाजुक बड़ा,
सालो से है, या मासूम, तन्हा पड़ा
खो चुका था, ख्वाहिशें, पाने की कभी,
आज फिर है जगा, सपनों में पड़ा,
ना रोक इसे, अब भी है वक़्त काफी,
जी ले जिंदगी, वरना बीत जाएगी जवानी,
देख कब से हूं मैं, रास्ते में तेरे खड़ा,
बस, इक बार, मुझपे तू यकीं तो कर।

देव

अब, पैरों की जूती नहीं मानो

बस हंस कर क्या बोल ली,
कुछ बातें क्या कर ली,
थोड़ा मजाक, थोड़ा गुनगुनाना,
एक शाम साथ, पब में बिताना,
थोड़ा पीना, थोड़ा बेहकना,
थोड़ी सी शरारत करना,
और बस, मान लिया,
की मेरी हां है,
कितनी गलतफहमियां पाल रखी है,
हमारे जरासे खुलेपन ने,
तो जान ले रखी है,
ना को ना कहा समझते है,
ना कहने पर भी, पीछे पड़ते है,
तुम चाहते हो, मतलब ये नहीं,
हम भी वही चाहे,
जरूरी नहीं, की तुम्हारे सुर
में हम ताल मिलाए,
वक़्त बदल गया है यारो,
तुम भी जागो,
नारी को, अब तो अपने
पैरों की जूती नहीं मानो।।

देव

पैरों की जूती नहीं मानो

बस हंस कर क्या बोल ली,
कुछ बातें क्या कर ली,
थोड़ा मजाक, थोड़ा गुनगुनाना,
एक शाम साथ, पब में बिताना,
थोड़ा पीना, थोड़ा बेहकना,
थोड़ी सी शरारत करना,
और बस, मान लिया,
की मेरी हां है,
कितनी गलतफहमियां पाल रखी है,
हमारे जरासे खुलेपन ने,
तो जान ले रखी है,
ना को ना कहा समझते है,
ना कहने पर भी, पीछे पड़ते है,
तुम चाहते हो, मतलब ये नहीं,
हम भी वही चाहे,
जरूरी नहीं, की तुम्हारे सुर
में हम ताल मिलाए,
वक़्त बदल गया है यारो,
तुम भी जागो,
नारी को, अब तो अपने
पैरों की जूती नहीं मानो।।

देव

कब होगा वक़्त, कब होगा मिलने का सपना पूरा

तुम कहां हो, झांक कर देखती हूं,
दिल की दीवारों में बनी खिड़कियों से,
नजर तो तुम आते नहीं,
मेरी मोहब्बत भरी आंखो से,
लगता तो है, तू हो आसपास कहीं,
छिपे हो क्या, इन परेशानियों की झाड़ियों में,
काश, हटा सकूं मै, इस हिचकिचाहट के बादलों को,
तसव्वुर तेरा करू, इक बार, तू जो मिल जाए,
इश्क़ मेरा करता है, इंतेज़ार तेरा,
कब होगा वक़्त, कब होगा मिलने का सपना पूरा।।

देव

या, जिंदगी बाहर निकलती है

ये लो, फिर आ गया,
कहने को तो मोहब्बत,
इजहार करने का मौसम है,
दिल में छिपी जज्बात,
बताने के दिन है,
लेकिन इन्हे भी तो किश्तों में बांट डाला,
लगता है, प्यार पर भी,
ब्याज लगा, लोन दे डाला,

अहा, रुक जाओ,
क्या करते हो,
अरे, सब सात दिन का कोटा
एक दिन में पा लोगे,
बात कुछ, रोज डे से शुरू होती है,
ये ही तो पहला, कठिन मुकाम है,
वरना मोहल्ले में झाड़ू से
पिटाई होती है,
अगर, रोज, रोज ही रहा,
तो प्रपोज तक,
हड्डियां साबुत रहती है
चॉकलेट और टैडी डे तो
आसानी से गुजर जाते है
मगर प्रोमिस डे में,
कन्फ्यूजन की भरमार होती है,
फिल्मी डायलॉग्स की,
बौछार शुरू होती है,

बड़े अरसे से, बस जरा सा,
छू लू उसको, ये अरमान,
लेकर भटके थे आगे पीछे,
इस मोड़ में आकर,
कुछ हालत खराब होती है,
डर भी लगता है,
ख़ुशी भी मिलती है,
गर बाकी दो दिन,
सही गए तो, या तो,
जिंदगी भर बहार रहती है,
या, जिंदगी बाहर निकलती है।।

देव

जाने कहा, जिंदगी मुझे, ले जा रही थी

पुरानी किताब के फटें पन्नों को,
बड़ा सम्हाल के, पड़े जा रहा था,
बड़े इत्मीनान से, वो सुन रही थी,
मैं अपनी कहानी कहे जा रहा था,

यूं तो वो, बहुत कम बोलती थी कभी,
मगर, कुछ वक़्त से अंदाज अलग था,
किस्सों के उसके पास, हुजूम बहुत था,
लेकिन, आज फिर शांत सुने जा रही थी,

कुछ बचपन की बातें, जवानी के किस्से,
वो जाड़े की रातों, में बाहर था सोना,
बताएं उसे, घरवालों के नखरे,
उस छोटे स कमरे से, फिर जिंदा होना,

उसकी अदाएं, जो मुझको रिझाएं,
नज़रे झुका कर, जब फिर से उठाए,
हाथो से उसके, हाथो का मिलना
तरंगों का इक, लय के साथ उठना

देखे है मैंने, उन बूंदों के नखरे,
रुकी थी नयनों में, गिरने से बचने,
ख़ुशी के थे, या गम के थे आंसू
कैसे कहे, जो कहते ये आंसू,

उधेड़ बुन थी दिल में, चली जा रही थी,
उसकी बातों से, समझ आ रही थी,
दिल की धड़कन मेरी, बड़े जा रही थी
जाने कहा, जिंदगी मुझे, ले जा रही थी,

क्रमशः

देव

उसकी याद बाकी है

बेसब्र सा दिन,
बेतरतीब सी रातें
और कुछ अधूरी मुलाकातें,
कुछ अधसिले से सपने,
कुछ बिनकहे किस्से,
उसकी आधी हसीं
मेरी आधी बातें
खो गए है कहीं
उसके तराने,

पर फिर भी,
आस एक बाकी है,
करीब ना सही वो,
उसका अहसास बाकी है,
मेरे जेहन में,
उसकी याद बाकी है।।

देव

वो प्रेम कहानी अधूरी है

जाने कब से थी, मंजिल की तलाश,
नहीं पता था, वो है इतनी पास,
मगर, पास होकर भी, है कितनी दूर,
इश्क़ में मुझे भी, मीलो चलना है मंजूर,

बात, बस पाने की नहीं है,
सजा रखे है, ख्वाब उसने भी,
कसौटी पर उसके, खरा उतरे,
अपनाए मुझे, वो भी जरूरी है,

यूं तो इल्ज़ाम, मुझ पर,
लगा दिए है, जमाने ने हजार,
मगर, जिस प्यार में किस्से,
ना बन जाए, ना याद रह पाए,
वो प्रेम कहानी अधूरी है।।

देव

ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है

ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है,
आज ही कभी,
की थी शुरू,
जिंदगानी नई,
आज ही, लगता है,
हो रही है शुरू,
कहानी नई,
बस, वक़्त के साथ,
अंदाज बदल गया है,

ना कोई नाम, ना इशारा
पर, किसी ने, जोर से पुकारा,
बस ढूंढ़ती सी रह गई,
और रात, यूं ही निकल गई,

समझ तब कुछ ना आया था,
आज, कुछ ना समझ आया,
आंगन में रखे, मरतबान से,
जैसे, फिर वही,
पुरानी खुशबू का,
उड़ता हुआ सौंधा आया।

देव

कितना, अनजान है वो

भेज कर निशानियां,
मोहब्बत जताता है वो,
ना जाने क्यों, सामने
नहीं आता है वो,

बेनाम से खत लिख,
छोड़ जाता है वो,
कश्मेकश सी, जेहन में,
मचाता है वो,

कैसे, इश्क़ कर लू,
कैसे, दिल अपना दे दूं,
ना जान, ना पहचान,
कितना, अनजान है वो।।

देव

थामने हाथ तेरा, होगा हाथ मेरा

कर चुका हूं, गलतियां,
अपने ही हाथों से,
अब लबों पर मेरे,
बस नाम होगा तेरा

अरमान है तेरे हजार,
बंद दिल की तिजोरी में,
हर ख्वाहिश अब तेरी,
मेरा ख्वाब होगी,

नहीं जानता, गर
तुझको भी है, मोहब्बत मुझसे,
पर तेरी ख़ुशी में छिपी,
मेरी खुशी भी होगी,

माना, नहीं दे सकता हूं,
चुटकी भर सिंदूर तुझे,
यकीन कर, पर प्यार मेरे
बस हक होगा तेरा,

हर राह में, होगा साथ तेरा,
थामने हाथ तेरा, होगा हाथ मेरा।।

देव

मेरी मोहब्बत को, अपने इश्क़ से, मिला सकती है

तुम यही तो थी, हरदम,
मेरे सामने, देखा तुम्हे,
बस, नजर नहीं पड़ी,
और हां, दिल की आवाज,
याद है, सुनाई तो दी थी,
और घंटी भी बजी थी,
पहली मुलाक़ात में,
लेकिन, मेरे हालात,
और तुम्हारी आकांक्षाओं,
में मिलाप नहीं था,
वक़्त मेरे पास भी नहीं था,
और शायद, तुम्हे
इंतेज़ार का वक़्त नहीं था,
शायद, बस इसी शायद,
ने मुझे रोका रखा,
देखता तो रहा,
पर बड़ ना सका,
तुम पास थी, और
मैं हर एक में,
तुम्हे खोजता रहा,
पर, अब शायद नहीं,
यकीं है, वो तुम ही हो,
तुम है वो हो,
जो मुझे, मुझसे मिला,
मेरे जज्बातों को समझ,
अपने प्यार से,
मेरे अरमानों को,
सजा सकती है,
मेरी मोहब्बत को,
अपने इश्क़ से,
मिला सकती है,

देव

थामने हाथ तेरा, होगा हाथ मेरा

कर चुका हूं, गलतियां,
अपने ही हाथों से,
अब लबों पर मेरे,
बस नाम होगा तेरा

अरमान है तेरे हजार,
बंद दिल की तिजोरी में,
हर ख्वाहिश अब तेरी,
मेरा ख्वाब होगी,

नहीं जानता, गर
तुझको भी है, मोहब्बत मुझसे,
पर तेरी ख़ुशी में छिपी,
मेरी खुशी भी होगी,

माना, नहीं दे सकता हूं,
चुटकी भर सिंदूर तुझे,
यकीन कर, पर प्यार मेरे
बस हक होगा तेरा,

हर राह में, होगा साथ तेरा,
थामने हाथ तेरा, होगा हाथ मेरा।।

देव

इश्क ए इजहार कर देता हूं

इंतेज़ार ख़तम हुआ,
इम्तेहान हो गए बहुत,
इश्क़ की राह में,
खो गए है, हम अब,

या यूं कहूं, उनकी अदाओं में
उसके अंदाज में,
उसकी ना ख़तम बातो में,
और शांत से, अफसानों में,
कभी बेसब्र से इंतेज़ार में,
कभी ना मिलने की बात में,
नजर आते उस इंतेज़ार में,
कुछ तो बात है,
जब से देखा है उसे,
इस दिल को बस
उसका इंतजार है,

पर जाने क्यूं,
कुछ डर भी तो लगता है,
उसके लायक, हूं या नहीं,
पता नहीं चलता है,
उसकी पवित्रता में,
मुझे खुदा दिखता है,
पर, मेरी मोहब्बत पर,
कुछ तो यकीं,
मुझे लगता है,
अब वक़्त है,
पूछ लेता हूं,
मौसम भी मोहब्बत का है,
इश्क ए इजहार कर देता हूं

देव

मेरा जिक्र था,

आलम ही कुछ अलग था,
महफ़िल में आज का,
हमें उनका जुनून था,
अंदाज उनका भी, हसीन था,

जबां पर था नाम,
नज़रों में सलाम था,
किस्से में उनके आज,
मेरा जिक्र था,

देव

बस, तेरे पहलू में,मिल जाए वक़्त जरा

बस, तेरे पहलू में,
मिल जाए वक़्त जरा,
आंखे जब खुले,
या बंद हो पलकें जरा,
देखता रहूं, बस तुझे,
तू मेरे पास रहे सदा,

ना तेरा कल, ना मेरा कल,
बस हमारा दीवानापन,
और मोहब्बत का मौसम,
खिले गुल, गुलशन गुलशन,
चांदनी हो रात,
सितारों की बरसात,

ये दूरियां मिट जाए,
ये धड़कने मिल जाएं,
थामे हाथ, हाथो में,
कहीं दूर निकल जाए,

कुछ तो कहो,
कुछ तो बतलाओ,
आज मौका भी है,
और दस्तूर भी,
तुम बस, यूं ही मिलती हो,
या है मोहब्बत तुम्हे भी,

देव

बिन पाए, एक दूजे के हो ले

उलझे उलझे में कितने सुलझे है,
अड़चने हजार, और प्यार ने ढूबे है,
नाम नहीं रिश्ते का कोई,
पर जग सारा, इनको पूजे है,

राधे बोल कृष्ण से पहले,
प्रेम रंग में, जग में है फैले,
प्रेम की क्या परिभाषा बन बोले,
बिन पाए, एक दूजे के हो ले।।

देव

थोड़ी मोहब्बत बिखेरो, थोड़ा इश्क़ भर लो

माना, कुछ गम अभी भी है बाकी,
चाहत के अरमान, नहीं है काफी,
पर तन्हाइयों से डर, लगने लगा है
ढूंढने को हमसफ़र, दिल चल पड़ा है,

ख्वाहिशों की फेरहिस्त बनाई उसने,
खूबियां चुन चुन कर, सोची थी उसने
खूब रखा ध्यान, पिछली गलतियों का,
क्या होगा रूप, क्या फितूर होगा,

बाज़ार में, इंसान के चल पड़े वो,
परखते हर नजर को, निकल पड़े वो,
मिला ना कोई, शख्स, भरी भीड़ में,
ख्वाहिशों पर उसकी, खरा रहे जो,

भुला कर दिल को, दिल ढूंढ़ना क्या,
इश्क़ ना हो जब, फिर हमसफ़र क्या,
एक बार, प्यार की नजर से, परखो किसी को,
थोड़ा वक़्त दो, जो चाहता है तुमको,
ख्वाहिशों का झोला, जरा खाली कर लो,
थोड़ी मोहब्बत बिखेरो, थोड़ा इश्क़ भर लो।।

देव

तेरे अहम के आगे, हुस्न,तेरा बेकार हो गया।

बस, उनकी तारीफ में,
कुछ लिख क्या दिया,
उन्हें अपने हुस्न पर,
घमंड हो गया,

जो, अक्सर, गुजरते हुए,
दुआ सलाम करते थे
अब तो दीदार ही उनका,
दुश्वार हो गया,

जाने क्यूं, बेकार बेसबब
किस्से बना डाले, इस कदर,
तारीफे करने वालो का,
मुंह बंद हो गया,

क्यूं, और कौन लिखेगा,
तेरे हुस्न की तारीफ में,
तेरे अहम के आगे, हुस्न,
तेरा बेकार हो गया।

देव

दीदार ए यार कैसे होगा

क्या लिखूं, कैसे लिखूं,
कुछ नहीं सूझता,
तेरे रूप को बखारे,
वो लब्ज़ नहीं मिलता,

मूरत ही तेरी, काफी है,
धड़कने बढ़ाने को,
सामना तेरा, किस तरह,
ये दिल करेगा,

और चार चांद लगा दिए,
इस सादा लिबास ने,
एक नजर भर में,
दीदार ए यार कैसे होगा।।

देव

परी बन, तू मेरे जीवन में अाई है

परी बन, तू मेरे जीवन में अाई है,
हर्ष और उल्लास से,
आंगन की रौनक सजाई है,
दिलो की तूने, हमारे धड़कने बड़ाई है,

तेरी किलकारी, तेरी मुस्कान प्यारी,
तेरा मचल कर रोना,
पापा की सिटी पर, यूं उछालना,
हाथ बढ़ाते ही, चलने का उतावलापन
तेरे नन्हे क़दमों को, झट से बड़ाना,
हर अदा पर तेरी, तारीफों का लग जाना,
यूं ही, कहीं नजर ना लग जाए,
दादी के चेहरे पर, प्यारी शिकन भी अाई है,

दादा के चेहरे को तो देखो,
देख तुझे, उन्होंने भी,
किलकारी सी लगाई है,
सारी चिड़ियाओं की आवाजे,
उनके गले से निकल अाई है,
हां, बड़ी दूर से उड़ कर,
महीनों बाद, अपने घर अाई है,
मोहल्ले में देखो तो जरा,
देखने वालो की जमात लगाई है,

तुझमें मैं हूं, मेरा हिस्सा है तू,
तुझमें मैंने खुद की छाया पाई है,

देव

थोड़ी सी, खुद से, मोहब्बत निभा लो

कभी कुछ वक़्त, गुजारो संग अपने,
फिर पछताओगे, गर ना हो पाओगे अपने,

खुद ही, खुद से मोहब्बत तो कर लो,
थोड़ा इश्क़, थोड़ी नफरत भी कर लो,

जो कर से घायल, दिल को अपने,
ऐसी आदत से, तौबा जरा कर लो,

तस्सली मिले, जिस फिकर से तुमको,
फिकर से ऐसी, झोली, तुम भर लो,

कहां ढूंढ़ते हो, ख़ुशी तुम बाहर,
भीतर ज़रा अपने, नजर तो तुम डालो,

तन्हा जो कहते है खुद को यहां पर,
थोड़ी सी, खुद से, मोहब्बत निभा लो।।

देव

हर बात पर जिद करते है,

क्यूं,क्यूं यू ही हर बात पर जिद करते है,
जमाना बदल गया है, तुम अब भी वही खड़े हो,

देखो, नियम कायदे कानून, अब नए हो गए,
जो कभी थे जुर्म, वही न्यायसंगत हो गए,

अब तो मोहब्बत भी, इंसाफ के तराजू में तुलती है,
इश्क़ करने वालो की, अब कहां बोलियां लगती हैं।।

देव

Random thoughts jan

खुदा तुझको माना, तभी तो फैसले कर लिए,
और, इश्क़ था तुझसे तभी तो,
तेरी बेरुखी पर, सिर झुका कर चल दिए।।
देव

बेखुदा पर, खुदाई का, ऐतबार था हमने किया,
हम उन पर मरते रहे, वो दिल तोड़ कर चल दिए।।

देव

कभी वक़्त था, वो सावन मानते थे, और यहां बरिशें होती थी,
मौसम ही तो है, वक़्त के साथ, ये भी बदल गया।।
देव

अब ना वो रहे, ना उनकी यादों से वाकिफ हूं,
जब घर नया है तो क्यूं, सामान पुराना हो।।

देव

खुश होने के लिए, किसी का इंतजार क्यूं,
मेरे यार की काफी है, हंसाने के लिए,
देते है मोहब्बत इतनी, हद है,
शुक्रगुजार हूं, हर पल को, खुशनुमा बनाने के लिए,

देव

यूं तो कहलाते है हम तन्हा,
कभी होते भी है, कुछ पल, हर दिन,
बड़े कमीनें है ये दोस्त,
समझ जाते है हाल ए दिल मेरा
आ जाते है, पल में, चाय के बहाने

देव

बच्चो को वक़्त ना देकर, मोबाइल दिलाए जाते है

अब तो ये रोजमर्रा की बात हो गई,
इंसान से ज्यादा,
मोबाइल से मोहब्बत हो गई,
अब आंख खुलते ही, गुड मॉ्निंग, बोला नहीं, लिखा जाता है
हाल, बाद में, करीबों का,
लोगो का, स्टेटस, ऑनलाइन चेक पहले किया जाता है,

चाहे कितनी भी भाग दौड़ भरी हो सुबह,
ऑनलाइन रहने के लिए,
वक़्त निकल ही जाता है,

रात में, बच्चों को सुलाने से पहले,
चैट का नंबर जरूर आता है,
अच्छे भले लोगो को,
इन्सोम्निया हो जाता है,

वैसे फायदा तो बहुत है,
अपने दोस्तो के, ग्रुप बनाए जाते है,
शौक और मिजाज के हिसाब से,
अलग अलग ग्रुप में,
लोग जोड़े जाते है,

हां, पार्टीज के प्रोग्राम भी
ऑनलाइन बनाए जाते है,
इन्विटेशन से लेकर, मेनू तक
ऑनलाइन, फाइनल किए जाते है,

पर हद है, भरी महफ़िल में भी लोग,
ऑनलाइन पाए जाते है,
जो बोल रहा होता है, उसके अलावा,
सबके सिर, हां में हिलते हुए,
मोबाइल की स्क्रीन पर,
झुके पाए जाते है,

अब कहां कॉम्पटीशन पढ़ाई का,
कुछ अच्छा करने का,
अब तो बस, कौन पहले पोस्ट करेगा,
की होड़ में, सब नजर आते है,

नज़रों से नजारें तो बाद में निहार लेंगे,
मोबाइल से पिक लेकर,
याद रहेगी हर पल की, के बहाने,
बेमिसाल, बहुमूल्य लम्हे,
बस फोटो खीचने में बिताए जाते है,

कहा है अब रिश्तों का मूल्य,
कहने को तो करते है अपनों की परवाह,
हद इस बात की है, अपने स्वार्थ में,
बच्चो को वक़्त ना देकर,
मोबाइल दिलाए जाते है।।

देव

हर पल को जीना सीख लो,

सीख लो,
कभी खुद के साथ
खुश होना सीख लो,
कोई जब ना हो पास,
खुश होना सीख लो,

अकेले आए थे, अकेले जाएंगे,
फिर क्यूं तन्हाई से डरते हो,
खुद का साथ, क्या पसंद नहीं,
जो औरों से उम्मीदें करते हो,

कुछ पल की खुशी,
महफिलें दे सकती है,
फिर रहना है खुद के साथ,
जश्न खुद ही, मनाना सीख लो,

वक़्त गुज़र रहा है,
जाने कब ख़तम हो, ये सफर,
खुद कें ख्वाबों को जियो,
हर पल को जीना सीख लो,

देव

तू नहीं किस्मत में, तो कोई और भी नहीं

पलकें मेरी….. अक्सर…. ठहर जाती है,
जब…सामने तस्वीर … नजर आती है,

कैसे रहे…. बिन उनके.. पल भर हम यहां
आंखे मुंदते है…. सामने… वो आ जाती है

मुद्दत…
मुद्दत हो गई….मुलाक़ात…. किए उनसे,
कब और कैसे कहे…. हाल ए दिल… उनसे,

ना वो नजर… आती है.. महफ़िल में मेरी
ना वो महफ़िल में…. अपनी….बुलाती है हमें

उम्मीद अब भी है.. कहां… छूटी है अभी,
सांसे कुछ और… मुझमें… बची है अभी,

कसम है खुदा की…चाहेंगे…हम, बस तुझे,
गर…तू नहीं किस्मत में, तो कोई और भी नहीं ।।

देव

खुशी का मोल, तू जानती है

खुशी का मोल, तू जानती है,
दर्द क्या है, तू पहचानती है,
माना, हंसी थोड़ी मंद है तेरी,
मुस्कान बिखेरना, आदत है तेरी,

बांट देती है पल में, खुशियां सारी
बटोरने में दर्द सबके, है पहली तेरी बारी,
हां, सुनती भी है सबकी, हर बात,
और मस्त हो, जीती है जिंदगी बेबाक,

देव

फिर जी ले जिंदगी, यूं कह रहा है

दिल फिर से ख्वाहिशें कुछ कर रहा है,
उसके होने की, उम्मीद पर जी रहा है
बेकार वक़्त यू गवाना, मंजूर नहीं,
फिर जी ले जिंदगी, यूं कह रहा है,

यूं तो अक्सर, बन जाते है किस्से
कौन है यहां किसका, क्या है किसके हिस्से
तन्हाइयों को भी, अलविदा कह रहा है
फिर जी ले जिंदगी, यूं कह रहा है,

तकदीर मेरी, कुछ इस तरह, लिखता मौला मेरे,
चंद लम्हे ही सही, होते खुशी के,
अब सबर, मिलने का उससे, कम हो रहा है
फिर जी ले जिंदगी, यूं कह रहा है।।

देव

पहली बार पीने पर, क्या हुआ था

कल फिर वही किस्से पुराने,
बस इस बार, कुछ नया था,
पहली बार पीने पर, क्या हुआ था,

बताया था उसने,
पीकर क्या क्या हुआ था,
जब बैठ मां के सामने,
बेवड़े होने का पछतावा किया था,

वही किस्सा, भूलने का भी आया था,
कैसे, याद नहीं कुछ आज तक,
का जिक्र जुबां पर आया था,
और पहली बार, पीने का सबब जब बना,
किसी ने, पूरी बार का सेटअप,
घर पर लगाया था

कोई भूल जाता है,
कोई भूलना चाहता है,
और कोई जानना चाहता है,
कि ये सब कैसे हो जाता है,

कोई बात नहीं, ये सब किस्से पुराने थे,
अब नहीं कहानियां है,
जो बनेंगी और सुनाई जाएंगी,
अगली महफिल में,
इस महफ़िल की, बातें बताई जाएगी।।

देव

जाने, वक़्त कब निकल गया

कुछ पल, यारो के संग,
कुछ बातें, कुछ यादें,
कुछ किस्से, नए पुराने,
बातें यारो की, जज्बात यारो के,
कुछ इधर की, कुछ उधर की,
ना जाने किधर किधर की,
पहला प्यार, पहला इकरार,
पिछली गर्लफ्रेंड का,
गुस्से वाला किरदार,
कुछ नगमे, कुछ गाने,
कुछ मोहब्बत के फसाने,
कुछ चाहत की बातें,
कुछ सुनसान रातें,
कुछ बेकार बहाने,
कुछ बेसुरे तराने,
ना जाम, ना कोई काम,
होठों पर हसीं,
उसकी बातें, जों नहीं फसी,
और बचपन का क्रश,
पड़ोसन का बांकपन,
बहुत कुछ तो बांटा,
फिर भी कम पड़ गया,
जाने वक़्त कब निकल गया,
जाने, वक़्त कब निकल गया।।

देव

यूं रातों में जागना, कुछ खास हो

मैं तो कब से इंतेज़ार में हूं,
अब नहीं जागा जाता यू ही,
बिना बात के,
कोई सपनों में तो आए,
मुझे जगाए, अपनी हरकतों से,
फिर जागूं याद में उसकी,
तो कोई बात हो,
यूं रातों में जागना,
कुछ खास हो।।

देव

तेरा दिल, कभी तो, मुझे अपनाएगा

वो भी कितनी नादान है
बस बातों ही बातों में,
कुछ पल की मुलाकातों में,
कुछ हंसी कुछ ठहाको में,
साथ बैठे गुनगुनाने में,
कुछ नए तरानों गाने में,
कुछ पुराने अफसाने सुनाने में,
कुछ दूर साथ चलने में,
कुछ रुक कर बतियाने में,
जाते हुए हाथ हिलाने में,
और फिर मिलना, बोलकर जाने में,
यूं ही दिल चुरा कर ले गई,
और उसे पता भी नहीं,
या बस अनजान बनती है,
या तो मुड़कर देखती नहीं,
और देखती है, तो हंसती भी है,
क्या बताऊं उसको,
एक वही तो था, जो मेरा अपना था,
टूटा था, पर एक सपना था,
तन्हा होने पर, तसल्ली देता था,
अनजान भीड़ में भी, मेरे संग रहता था,
चल, कोई बात नहीं,
गर अब मेरा दिल मेरे पास नहीं,
जगह तो है,

आज नहीं तो कल,

एक दिन आयेगा,
तेरा दिल, कभी तो,
मुझे अपनाएगा।।

देव

चांद खुद है, आज शरमाया

आज फिर उसकी याद में,
उसकी प्रोफ़ाइल पिक देख डाली,
उसका मुस्कुराता चेहरा देख,
दिल ने एक आह निकली,

बला की खूबसूरती, खुदा ने
कैसे जमीं पर उतारी,
चमन में रोशनी फैली,
कलियां गुल बन गई सारी,

घनी जुल्फों से झांकता,
चेहरा उसका मुस्कुराता,
नजर भर देख क्या ले उसको,
चांद खुद है, आज शरमाया,

देव

हर दिल तन्हा होता है,

महफिलें तो बहुत सजती हैं यहां,
लोग की काफी होते है,
हर दिल तन्हा होता है,
हर रूह, पराई होती है,

अपना, कहने को, तो सब कहते है,
पलटते ही, सच्चाई निकलती है,
इश्क़ कैसे बसेरा करें वहां,
नफरतें जहां पर बसती है,

बांटे प्यार तो दीवाना,
ना बांटे तो, काफिर कहते है,
खुदगर्ज जमाना है इतना,
तारीफे कहा अब रहती है,

देव

नन्हों को भी, भुला जाते है,

भूलने की कोशिशें करी हजार,
मगर भुला ना सका, उस पल को, शाम याद है मुझे आज भी,
जब दिल मेरा, टूटे शीशे की तरह
बिखर गया था,
कुछ पल ऐसा लगा, जीवन
अधजली लाश बन गया था,
घिन्न सी आने लगी,
जीने की चाह मिट सी गई,
बस, तुम ही तो थे,
मासूम, नटखट, अनजान नफरतों से,
तुतलती सी आवाज में,
और प्रखर अंदाज में,
पापा की आवाज से जागा, उठा,
फिर चल पड़ा,

चला नहीं था, अकेला,
तुम भी तो साथ थे,
तुम्हारे मासूम हाथो में
पकड़ी मेरी अंगुली,
काफी थी मगर गिरने से बचाने को,
और तुम्हारे चेहरे से आती हसीं,
काफी थी, जिंदगी आगे बढ़ाने को,
प्रश्न तो थे, मगर उत्तर कठिन थे,
पूछता भी किस्से, मामले संगीन थे,
लोग तो बहा देते है, गम आंसुओ में,
हालात ये थी, की आंसू भी मजबूर थे,
तब ही जाना मैंने, मुश्किल वक़्त में
कांधे भी साथ छोड़ जाते है,
जो निभाने की बात करते है रिश्ते,
अपने अहम के खातिर,
नन्हों को भी, भुला जाते है,

देव

बसा लो एक नई बस्ती

यह दिल, एक बार नहीं, कई बार टूटा है,
इन्हीं हाथों से दामन, कई बार छूटा है,
जो करते थे वादा, सात जन्म साथ निभाने का,
उन्होंने ही अपने हाथों से, पीठ में खंजर घोपा है,

बन जाओ तुम भी जिद्दी,
ना समझो इसे हर अपनी,
खोने के रोने में, ना बर्बाद करो वक़्त
मंजिले नई बना को, रास्तों से तुम अनजान नहीं,

जैसे पुरानी डाली पर, नई कोपल है खिलती,
तोड़ कर सख्त दीवारें, कोमल सी, बाहर निकलती,
नया जीवन, नई रोशनी, है हर तरफ से फूटती,
जिंदगी भी, ना रोको तुम, बसा लो एक नई बस्ती।।

देव

बचपन भी, पाबंद ही गया है।

तुम्हे याद है, वो गुजरे हुए दिन,
सर्दी के दिन, खिलती हुई धूप,
मां का आंगन में बैठ, तिल कूटना,
गुड का अंगीठी पर चढ़ाना,
और तिल के लड्डू बनाना,

हफ्तों पहले, शुरू हो जाता था,
बेसब्र इंतेज़ार, संक्रांत का,
अरे वाह, तिल के लड्डू खाएंगे,
और लेंगे मजा, पतंगबाजी का,

बाज़ार से सूत का लेना,
पुरानी ट्यूब लाइट से पिसा कांच बनाना,
लड्डू से बचे गोंद का गलाना,
गली में फैला सूत को,
हाथो से मांजा बनाना,
मेरा मांजा, सबसे अच्छा हो,
इसी ख्वाहिश में, नई तिकड़म लगाना,
और भारी धूप में, सर्दी की फिक्र छोड़,
छत पर चढ, पतंगों से पेच लड़ना,
वो काटा, वो मारा, की आवाजे सुनना, सुनाना,
अरे ध्यान से, गिर नहीं जाना,
नीचे से मम्मी का चिल्लाना,
छोटे बच्चो का फायदा उठाना,
पतंग उड़ाने के लालच में,
कभी पापा, कभी भैया,
कभी पड़ोसी की, चखरी पकड़,
पूरा दिन, मांजा बटोरना,

बस, अब कहा, बड़ी बड़ी मंजिलों,
की भीड़ में, खो गए है,
जाने कब वो दिन, बड़े शहरों की,
आगे बढ़ने की, जिद में खो गए है,

अब तो ये जुनून भी, मजाक
हो गया है,
और डर इतना है, कि बचपन भी,
पाबंद ही गया है।।

देव

कुछ कदम चलो साथ

पल दो पल तो गुजारो साथ,
कुछ कदम तो चलो तुम साथ,
जाने क्यूं, पल में गायब हो जाते हो,
हवा की तरह, गुज़र जाते हो,

मैं कहता हूं, ना यकीं करो यू ही,
कुछ तो विश्वास करो खुद पर,
काबिल तुम हो, ये जान लो एक बार,
जमाना बोलता है, कभी इस पार, कभी उस पार,

करवाते बदलते है लोग पल में,
जो कहते थे अपना, तोड़ते है सपने,
आशा, का फिर भी ना छोड़ो हाथ,
कुछ पल गुजारो, कुछ कदम चलो साथ।।

देव

देव बाबू, हां यही नाम दे दिया है

देव बाबू, हां यही नाम दे दिया है,
और कुछ अंजाम भी, ऐसा ही कर दिया है,
जो हमे चाहते है, उन्हें हम चाह नहीं सकते,
और जिन्हे चाहते है, वो इसी बात में मागशूल है,
की हम उन्हें क्यूं नहीं चाहते,
जोभाने चाहते है या
हम उन्हें चाहते है तो क्यूं चाहते है,

वही देखो, कुछ यार ऐसे है
जो कभी हमे खास मानते थे,
और अब हमारे पहुंचने के पहले ही,
तारीफों के पुल, बांध देते है,
और जो कभी, हमारी महफ़िल
में आने को उतावले होते थे,
अब, महफिलें हजार करते है,
जब पूछते है, तो अनजान बनते है

हमने कब कहा था उनसे,
कि हम उन्हें प्यार करते है,
बस, दोस्त ही तो थे,
और वो दोस्ती में भी आस कर बैठे,

चलो छोड़ो, आदत हैं उनकी,
मैं क्या, सबके साथ है वो ये करते,
तभी तो जिंदगी की शाम में,
तन्हा वही रहते।।

देव

जिंदगी की आपा धापि में खो गई है

जब से वो गया है,
वो कुछ अधूरी सी हो गई है,
सपनों को कर विदा अपने,
जिंदगी की आपा धापि में खो गई है,

सुबह सुबह, शुरू हो जाती है दौड़,
बच्चो को उठाना, तैयार करना,
टिफिन बनाना, स्कूल भेजना,
फिर खुद के ऑफिस की तैयारी करना,
बेतरतीब से बालों को झट से समेटना
बिना मैचिंग के कपड़े पहनना,
अब कहा आइने के सामने,
खड़े होने की फुरसत मिलती है

सपनों को कर विदा अपने,
जिंदगी की आपा धापि में खो गई है,

ऑफिस में भी, सुंदर दिखने की
नहीं कोशी होती है अब
लोगो की नज़रे भी खा जाती है,
जैसे दया दिखा रहे हो सब,
जिनकी औकात नहीं थी कभी,
वो भी सत्वना दे जाते है,
कुछ चाहिए तो बताना,
दिन में एक बार पूछ जाते है,
उसकी याद से बचने,
अपने काम में उलझ सी गई है,

सपनों को कर विदा अपने,
जिंदगी की आपा धापि में खो गई है,

फिर शाम, वही जिम्मेदारियां लेकर आ जाती है,
सुबह की तैयारी में यूं ही निकल जाती है,
और ये कमीनी रात, क्यूं इतना जुल्म ढाती है,
आंखो से नींद गायब,
दिमाग में हलचल सी मच जाती है,
फिर वही चेहरा, तस्वीर तेरी सामने आती है,
जब भी नज़रे मुंदती हूं,
गुजरे वक़्त की फिल्म चल जाती है,
पता ही नहीं चलता, अक्सर उसको
कब सुबह हो गई है,

सपनों को कर विदा अपने,
जिंदगी की आपा धापि में खो गई है,

देव

मेरा चेहरा, अपने चेहरे में, देख पाओगे

नफरतें कर ले हम किस से, और क्यूं करले,
इश्क़ जो कर ले फिर, तुम यूं ही तड़प जाओगे,

छोड़ कर मुझको, तुम खुश कहा रह पाओगे,
इश्क़ की आग में, तुम खुद ही झुलस जाओगे,

लोग कहते है के, प्यार, खुदा होता है,
नफरतें दिल में हो तो खुदा क्या पाओगे,

रोज देते है दुआएं, उन्हें हम जीने की,
उम्र भर याद रखोगे, और भुला ना पाओगे।

जब भी देखोगे आइना, तुम तारीफ में अपनी,
मेरा चेहरा, अपने चेहरे में, देख पाओगे।

देव

तू है या नहीं

यूं ही नहीं मैं, तुझसे हूं इश्क़ करता,
तू कुछ खास है, तुझमें कुछ बात है,

ये नहीं है हुस्न तेरा, जो बुलाता है मुझे,
तेरी अदा, तेरा दीवानापन, भाता है मुझे,

पता है, मैं नहीं आता, तेरे ख्यालों में,
पर पाएगी मुझे, तू सपनों में अपने,

अमानत है, तू किसी और की, या
किसी और को तू चाहती है,
पता नहीं, मेरी तकदीर में, तू है या नहीं,

देव