हर साल, और निखर जाती है

ऑफिस की फाइल के पन्नों को पलटते हुए
चश्मे को आंखो के बीच एडजस्ट करते हुए
तिरछी नज़रों से कभी नजर मिलाते हुए
मिला था मैं आज उससे, काफी की चुस्की लेते हुए

आज भी, चेहरे पर वहीं रौनक रहती है
मुस्कुराती है, तो हल्की से हंसी निकलती है
आज भी, चलते हुए थम जाते है पांव
जब भी वो लंबी आह लेती है

कौन कहता है, उमर बड़ने से
उमर बड जाती है
वो तो हर साल, और निखर जाती है
और बिजलियां गिराती है

देव

Random thoughts

पथराई सी तेरी आंखो में
दो बूंद बन, कुछ नमी का सकते है
माना, जो छोड़ गया तुझे राहों में
उस तो नहीं, पर तेरे चेहरे पर
थोड़ी हंसी, कुछ खुशी तो ला सकते है

देव

राज, बीती रात का

कुछ तो है, जो छूट गया, कहीं बीती रात को।
यू ही नहीं भूल सकता हूं, तुझ संग बिताई रात को।।

तेरे फसाने, अफसाने, और तेरे गाने
अब भी सुनाई देते है।
तेरे लबों से, छलकती हसी से, अब भी मदहोश होते है।।

माना, तू गैर है, पर पराई कभी लगती क्यूं नहीं।
तेरे आगोश में, क्यूं आऊ, नींद कभी पूछती नहीं।।

मैं तो यू ही, कुछ भी बोलता रहता हूं
पर तू नज़रे झुकाए, यू बैठी है,
क्यूं, मुझे यूं लगता है तू भी जानता है राज, उस बीती रात का।

देव

भूल खुदा, नाम आता तेरा, आवाज मेरी है

मेरी जिंदगी अब कहा मेरी हैं
तेरे अफसाने है, कहानी मेरी हैं

नहीं ख़तम होती, हैं अब रातें बातों की
मेरी हर बात में जिक्र तेरा, जुबां मेरी है

सर्द हवाएं कस के गुजरती, सुर्ख करती गालो को
भूल खुदा, नाम आता तेरा, आवाज मेरी है

देव

एक मुलाकात

कल रात, बड़े अर्सो बाद उससे बात हुई
उसके साथ बिताए उन पलो के यादों की बरसात हुई

हां, इस बार उसने मुझे याद किया था
अचानक से, मुझे उसका “hi” का मेसेज मिला था
बस, नींद आते आते रुक गई
दिल की धड़कने, पहले कम हुई, फिर बड गई
उसके मेसेज में भी, उसकी मुस्कुराहट थी
थोड़ी से गर्माहट, थोड़ी कसमसाहट थी
जैसे, आज भी, वो मुझे याद तो रखती है
मुझसे मिलने की, उसको भी, जल्दी है

आज भी याद है, जब भी नज़रे मिलती थी हमारी
परेशा लाख रहे हो, पर आ जाती थी हल्की सी हंसी
दुंडते थे बहाने से, लगा दफ्तर के चक्कर
काश दीदार हो जाए, उसका दिन में अक्सर
दो पल ही सही, बात उनसे मैं कर
उड़ जाता था, सपनों की दुनिया में अक्सर

पर, बहुत कश्मेकश थी, उसके जीवन में उस पल
उलझनों के दायरे में, जिंदगी थी हर पल
जिम्मेदारियों ने, हाथ था उसका रोका
इश्क़ ना कर, तेरे लिए नहीं है, करीबी ने टोका
और मैं भी, यू ही उसकी खुशी समझ के चल पड़ा
अब तक दर्द है, क्यूं नहीं में मर्द बना, आगे बड़ा

पर, जाने क्यूं, उसको देखता हूं,
तो आज भी खुश होता हूं
उसको खुश देख कर,
दिल को तसल्ली देता हूं
तू आबाद रहे हर वक़्त,
खुशियां रहे तेरी दोस्त हर पल
और जब भी देखूं तुझे
दिखे, तेरा मुस्कुराता चेहरा उमर भर

देव

दूर है तू बहुत, पर पास है प्यार तेरा।।

आज बड़े दिनों बाद, इक मुलाकात उससे हुई।
कुछ बीती बाते, कुछ यादें ताजा हुई।।

बेसब्र मुलाकातों का भी इक दौर था।
उसके साथ बिताया, हर एक पल अनमोल था।।

अब फिर, वहीं बातें, वहीं राते याद आती है।
तू सामने होती नहीं, तेरी तस्वीर कभी दिख जाती है।।

हो लेता हूं खुश, कर यार दीदार तेरा।
दूर है तू बहुत, पर पास है प्यार तेरा।।

देव

मेरे हर अंश में समाया, उसी का रंग है…

आज मैंने खुदा के आगे सिर झुकाया था
उसको, जल्दी बुला लो, ए खुदा
यही पुकारा था

शिद्दत से घूरती थी, नजर रखती थी
छत के निशानों पर
कहानी गड़ती थी, ग़ज़ल लिखती थी
बीती बातों पर

बड़ी उम्मीद में जीती थी, दुआ करती थी
मस्जिद की चौखटो पर
तवज्जो देती नहीं, अल्ला हाफ़िज़ कहती थी
मौत के फरिस्तो को

पर आज, लेटी है, बड़े इत्मीनान से अपने
जैसे, कह रही हो,

बेटा,
बहुत कर ली मेरी सेवा
अब जा, जीले जिंदगी अपनी,
बाकी है, काफी उमर तेरी
ना रोना, मुझको कर याद तू
दर्द मुझको ही होगा यूं
जो ना खुशी चेहरे पे तेरे हो
भला मुझे जन्नत मिलेगी क्यूं

मैं अब भी उसका ख्याल रखती हूं
जहां भी वो हो, खुश उस रखती हूं
खुश हूं कि अब उस दर्द नहीं होता
जब भी आंखे मूंडती हूं
उसके करीब होने का अहसास है होता

वो मां है मेरी, मै उसका ही तो अंश हूं
मेरे हर अंश में समाया, उसी का रंग है
मेरे हर अंश में समाया, उसी का रंग है

देव

तेरे आगोश में समा ले

सदियों गुजर गई, मुझे चैन से सोए हुए।।
कुछ पल ही सही, तेरे आगोश में समा ले।

कब से घूम रहा हूं मै, लेकर फिक्र बोझ।
रख के सिर तेरी गोदी में, जरा बाल सहला दे।।

ख्वाहिश नहीं कि तू दे साथ उमर भर।
जब साथ हो मेरे, अपने हाथो से खिला दे।।

तेरे माथे पर शिकन, अच्छी नहीं लगती।
मेरी हसी है क्यूं की, तू मुस्कुरा दे।

देव

हमे तो दिल जवान चाहिए..

कोई वक़्त था, जब लोग सलाम ठोक कर जाते थे
जब भी कहीं मिल जाते थे
साहेब, कैसे है आप, कोई काम है तो बताना
ऐसी बातें कर जाते थे
पर अब, में ६० के पार चला गया हूं
और अक्सर, मोहल्ले के बीच में लगी
बेंच पे मिलता हूं
आज भी लोग सुबह शाम सामने से निकलते है
पर नज़रे नहीं मिलाते, नमस्ते बोलने में झिझकते है

मैं भी बस, घरों के रोशनदानों में बनी जालियों को गिनता हूं
और कभी, उनके आस पास मंडराती
चिड़ियाओं को तकता हूं
पर ये भी, नागवार गुजरता है
जब, इन्हीं घरों में रहने वाले बच्चो में से
हां, वो बड़े है, लेकिन मेरे लिए तो बच्चे हैं

जब इन्हीं घरों में रहने वाले बच्चो में से
कोई आकर मुझसे कहता है
बाबूजी, आप क्या दिनभर घर में झांकते रहते है
कुछ शरम करो, बहू बेटियां रहती है यहां
क्यूं ताड़ते रहते हो

कुछ तमन्नाएं, जो कभी रह गई थी अधूरी
पूरी करने की कोशिश भी करी
आजकल, अपने गले की, थोड़ा साफ कर
गाने की जुर्रत करी
पर ये भी, कहा बर्दास्त है जमाने को
क्या भूत चड़ा है बुडे को, जो अब गाने लगा है
बच्चो के साथ बच्चा भी बनने की कोशिश करी
पिछली बार, एक शाम, पब में कटी
आज तक ताने, लोगो के सुनता हूं
साठ के पार है, पर बहुत उछलता है

अब कुछ भी करे, सठिया गए है
का टैग, लग गया हैं
जमाने के साथ चले या अपने जमाने में चले
कुछ नहीं पता है

पर, किसी ने कहा है,
जिंदगी लंबी नहीं बड़ी जीनी चाहिए
इसीलिए, अब नहीं करता परवाह
बूढ़ा होगा तेरा बाप
हमे तो दिल जवान चाहिए

देव

तुझे मिलेगी मंजिल फिर से नई…

लोग क्या कहेंगे
यही सोचती रही वो
अपने से ही, अकेले में बाते
अपनों से ही मुलाकाते
करने को मजबूर है वो,

अभी ही तो उसका साथ छोड़
वो कही चला गया था
उसे, अपने हाल पर अकेले
यही छोड़ गया था
और वो है, कि आगे बढ ही नहीं पाई
जिन्हे अपना कहते है, उन्हीं ने
पावों में, लोग क्या कहेंगे,
की बेडिया लगाई

लोगो का क्या है, कुछ भी
कहते रहते है
उन्हें क्या पता, जो तन्हा होते है
दर्द क्या सहते है
आगे बढ, दो कदम जब तू बढ़ाएगी
एक मांजिल ही तो छूटी है
और मिल जाएगी

वो भी तो अकेला ही है
जिसने तुझे कॉफी पर बुलाया था
लोगो क्या कहेंगे, इसीलिए
हाल ए दिल ना कह पाया था
समझ उसका भी दर्द, तुझसे
कुछ ज्यादा ही होगा
उस पर तो उसके है घरवालों का भी
विश्वास नहीं होगा
आदमी है वो, आसान नहीं उसका जीना भी
इसीलिए कदम तुझको उठाना होगा
मुश्किल नहीं है ये इतना भी

तू बड तो सही, ऐतबार कर तो सही
तुझे मिलेगी मंजिल फिर से नई

देव