अहम ब्रह्मस्मी

जला मशाल जरा, सुकून की
विश्वास तू कर जरा
जरा बैठ तू चैन से
दे दुनिया को कुछ पल भुला
मैं तेरी रूह ही तो हूं
तू है अंश मेरा ही
रहता हूं मैं तो हर वक़्त साथ तेरे
ना तू भटक यहां वहां

माना, है पड़े तूने ग्रंथ हजार यहां
हजार यतन है लिखे,
पाने के मुझको बार बार
कोशिश की गई है
मुझे पाने की लाख बार
हर किसी को है मेरी यहां तलाश
पर, में नहीं पत्थर
या किसी मूरत में हूं समाया
तूने बनाया मुझको
नाकी, मैंने तुझे बनाया
खुद ही भुला बैठा है
अपने किए जतन
अब ढूंढता फिरता है मुझको
करके ढोंग प्रपंच

मैं ही तू हूं, तू ही मैं हूं
तुझमें मैं हूं समाया, मुझमें है तू
फिर अलग क्या है
क्यूं ढूंढ़ता है मुझको पगले
कभी मंदिर, कभी मस्जिद
कभी गुरुद्वारे में
बंद कर नजरें जरा अपनी
मैं समाया हूं, तेरे मन के गलियारे में

देव

यू ही लोग दीवाना, नहीं बन जाते है।

कुछ है, जो मुझे तुझसे मिलाता है,
कुछ है जो, पास तेरे ले आता है।
दूर कितना भी जाना चाहते है हम,
वक़्त हमे और करीब ले आता है।।

दर्द जब भी तुझको होता है
क्यूं मेरी आंखो में पानी होता है
खुशी आंगन में जब तेरे आती है
क्यूं मेरे चेहरे पे खिलखिलाहट आती है

तेरी गलियों से जब गुजरता हूं
क्यूं नज़रे तेरा दीदार चाहती है
जब भी पास तेरे आता हूं
तुझे छूने को, क्यूं उंगलियां बढ़ जाती है

मैं ढूंढ़ता फिर रहा हू जवाब सवालों के
क्यूं कदम मेरे,हर बार तुझ तक ले आते है
लोग कहते है, इश्क़ है मुझको
यू ही लोग दीवाना, नहीं बन जाते है।

देव

तू है तो मैं हूं, मेरी मोहब्बत है

तेरा होना, सबूत है, कि मैं हूं
मेरा सुकून तू है, जुस्तजू तू है

तू नहीं तो मेरी जिंदगी, क्या है
एक फितूर है, बस दस्तूर है

आने पर तेरे, रोशन जहां मेरा हुआ
तेरे दीदार को, मैंने समंदर पार किया

बांहों में भर, तुझे बेपनाह प्यार किया
तेरी हसीं पर, न्योछावर ये जहां किया

तू मेरे घर की, रौनक है
तू है तो मैं हूं, मेरी मोहब्बत है

देव

अब भी, चंद दोस्त मिल ही जायेंगे।।।

फ़ुरसत निकल, कुछ वक़्त गुजार
अब भी, चंद दोस्त मिल ही जायेंगे

जो दूर ना कर सके परेशानियां तो क्या
निस्वार्थ हो, तुझे कुछ पल हसाएंगे

तेरे किस्से सुनेंगे, कुछ सुनाएंगे
तेरे गम को, अपना हिस्सा बनाएंगे

तेरी धड़कनों को पड़ सकेंगे वो
अपनी धड़कनों को सुनाएंगे

तू एक बार, बच्चा बन के दिखा
हम तुझे तेरा बचपन याद दिलाएंगे

फ़ुरसत निकल, कुछ वक़्त गुजार
अब भी, चंद दोस्त मिल ही जायेंगे

देव

जागो, उठो, बड़ों आगे।।

कब तक यू ही सोते रहोगे,
जागो, उठो, बड़ों आगे
कब तक तकदीर के भरोसे बैठे रहोगे।
कहते है, खुदा भी उन्हीं की सहायता करता है
जो पहले खुद अपनी किस्मत लिखता हैं
क्यूं फिर औरों के भरोसे बैठा है
क्यूं अपनों पे आस का ठेका है
क्यूं कल पे अपने रोता है
क्यूं कल के लिए परेशां होना है

हर आज एक नया सवेरा है
नए दिन से नया काम शुरू होना है
कल रात थी तो क्या
अब भोर का उजाला होना है
साहस ला तो सही एक बार जिगर में
दिल से डर का खात्मा होना है

अब बस पाने की बारी आती है
ये ना सोचो तू क्या खोओगे
जागो, उठो, कदम आगे बढ़ाओ तो सही
दुनिया अपनी मुट्ठी में कर लोगे

देव

बंधन, रेशम के धागे का।।

बंधन, रेशम के धागे का
प्यार के अल्फ़ाज़ का
परिवार के प्यार का
बहना के इंतजार का
भाई की फटकार का
मां के दुलार का
पिताजी की फटकार का
गुरुजी की डांट का
शिष्यों के समर्पण का
यारो के साथ का
अपनों के विश्वास का

तुम ही बताओ
मैं कैसे तोड़ दू
कैसे मैं ये सारे रिश्ते छोड़ दूं

मैं बना हूं, मैं
जिसे तुम चाहते हो
मेरे खयालातों की
इज्जत कर पाते हो
मेरे लिए, अपना जीवन
कुर्बान करने की बात करते हो
और पल में मुझसे मुझको
जुदा करने का वचन लेते हो

नहीं, ये मुश्किल नहीं
पर नामुमकिन जरूर है
जिस बहन ने बंधी है राखी मेरे
उसी बहन का गुरूर हूं

हां, बनना चाहता हूं तुम्हारा
और पाना चाहता हूं तुम्हे
पर इतना भी खुदगर्ज नहीं हूं
कि राखी बांधी है इन हाथो में जिसने
उसे बीच राहों में छोड़ दू

देव

एक छोटी सी लव स्टोरी….

तेरा जिक्र हर बार आएगा
जब भी मोहब्बत के बारे में
मुझसे पूछा जाएगा।
मुलाक़ात, कुछ पल ही सही
बस एक झलक भर ही मिली
पर तेरा चेहरा, नहीं ओझल
अब हो पाएगा।।

वक़्त कुछ कम था
मैं, दोस्तो में जरा गुम था
यूं ही, जरा कुछ पल
रास्ते में ठहरा था
तू वही कहीं, बातों में मग्सूल
चली आ रही थी
बस, तभी, एक अहसास हुआ
तेरे छूने का आभास हुआ
मैं मुड़ा, तुम घूमी
तेरी नज़रे मेरी नज़रों से मिली
कुछ पल रुकी, फिर तेरी तस्वीर उतारी
तेरे कानों के, लटकते कुंडल
नाक की लौंग, होंठो की लाली
तेरी मेरे चेहरे को, टटोलती आंखे काली काली
सुर्ख गालो पर, आती शरम
तेरे लज्जा से, होता चेहरा गरम
सब कुछ बना डाली
तेरी तस्वीर अपने जेहन में उतारी

और फिर, हल्की सी मुस्कुराहट बिखेर
पलटी, तू अपने रास्ते पर चल दी
और पीठ पर एक थपथपाहट सी हुई
कानों में आवाज अाई, चल भाई
अभी दिल्ली जाना है
कहा खो गए, वो दाल किसी और की है
हमसे, नहीं गल पानी है।

देव

तेरे दीदार के बिना, रुखसत, तेरे शहर को किया।।

तुझसे मिलना, एक मुलाक़ात नहीं, सपना बन गया।
वक़्त,जाने कब, हाथो से फिसल गया।।

कुछ और पलो की आस में, दिन और रुक गया।
तेरे इंतज़ार में, रातों को मैं जगा।।

तेरे ना आने की खबर ने, बैचेन यूं किया।
तेरी झलक के खातिर, तेरे दर का रुख किया।।

झरोखे पे तेरे, टकटकी लगा बैठे रहे।
पता ना चला, दिन कब गुज़र गया।।

मजबूर हूं, चलना है आगे मुझे,
तेरे दीदार के बिना, रुखसत, तेरे शहर को किया।।

देव

तेरा शहर

तेरे शहर में, कदम उसके यूं ही नहीं पड़े।
खुदा ने, जरूर कोई मकसद, लिखा होगा।।

नहीं जो नाम लेता था, लबों पर तेरा।
तेरे नाम की माला से, अकीदत कर रहा होगा।।

तसव्वुर जब किया तेरा, तेरी गलियों में।
उसके जेहन में, तेरा रूप बस गया होगा।।

मैं पड़ नहीं सकता किस्मत, पर जानता हूं इतना।
ख्वाब तूने जो देखे है, पूरा पल में कर देगा।।

भूल कर अपने दर्दो को, बस तेरी एक आह पर।
जमाने भर की खुशियों को, तेरे नाम कर देगा।।

देव

मेरे हिस्से में तेरी, जरासी जिंदगी आ जाए।।

सितारे आसमां के, जमीं पर सजे बैठे है
यार, किसने बनाया, गुलसिता तेरा,
हम पल में, अपना दिल खो बैठे है।।

स्याह रातों में, चमचमाती वादियां तेरी।
हर ओर से आती, टकरा कर, आवाज है मेरी।।
बादलों ने जमीं पर है, डेरा यहां डाला।
सर्द हवाओं ने मौसम को, हसीं बना डाला।।

ओडे ओस की चादर, वादियां सुस्त लेटी है।
कहीं जाने के यहां नहीं, किसी को जल्दी है।।
जिंदगी लगती है यहां, कुछ थमी सी है।
जीने में हर पल को, मग्शूल हर कोई है।।

बला की खूबसूरत, जमीं पर, आज मैं आया हूं।
अपने सपने, जीने का जज्बा, साथ लाया हूं।।
काश! वक़्त थम जाए, घड़ी कुछ पल को रुक जाए।
मेरे हिस्से में तेरी, जरासी जिंदगी आ जाए।।

देव