Site icon DevKeDilSe

वक़्त कैसे गुजर गया, कुछ पता ना चला…

Advertisements

वक़्त कैसे गुजर गया
कुछ पता ना चला
जो जानते भी ना
कभी थे एक दूसरे को
एक दिन मिले कॉलेज
की सीढ़ियों पर
चलने लगे बेपरवाह से
कभी सीधे कभी बेढंग से राहों पर
कभी रास्ता मिल गया
कभी रास्ता बनाते गए

वक़्त कैसे गुजर गया
कुछ पता ना चला

पर एक डोर ने बांधे रखा
साथ ना छूटने दिया
लाख रिश्ते बन गए
पर यारी को ना मिटने दिया
बातों में रखी लाख गालियां
दिल में बस था वहीं बसा
आवाज जब अाई एक जरा
निंदे भुला, हर एक चला

वक़्त कैसे गुजर गया
कुछ पता ना चला

देव

Exit mobile version