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पथ भूल गया था, बहुत कुछ छूट गया था

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पथ भूल गया था, बहुत कुछ छूट गया था
पाने की कुछ चाहत में
लौटा हूं आज, फिर बचपन में, लिए हाथ फिर हाथो में

उंगली पकड़कर चलना सिखलाया, अपने हाथो, निवाला खिलाया
तुटलाती आवाज में जब भी पुकारा, पास उन्हें था हर पल पाया
गुल्ली डंडा, छुपम् छुपाई, राजा जी की बारात है अाई
खेल खेल जिस घर चौबारे, उसी से था मैं दूर हुआ रे
फिर उस दौर की यादों में

लौटा हूं आज, फिर बचपन में, लिए हाथ फिर हाथो में

मां का लाडला, पिता का दुलारा, भाई का प्यारा, बहनों का राजकुमार
बैठाए साइकिल के पीछे, घुमाएं जो, गालियां शहर की यार
जेब थी खाली, दिल था अपार, पड़ोसियों को जी भर के प्यार
बजी शहनाई, खुशियां अाई, चंद सालो में, दूरियां छाई

अब जाके फिर आया पास में

लौटा हूं आज, फिर बचपन में, लिए हाथ फिर हाथो में

देव

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