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तमाशा बना रखा है

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तमाशा बना रखा है,
बस, मुद्दा चाहिए,
और शुरू हो जाते है,
किताबो को रख ताक में,
रोड पर आ जाते है,
जैसे, पढ़ाई नहीं,
बस पॉलिटिक्स करनी है,
देश को कुछ दे तो ना सकते है,
बस, मौका मिलते है,
नारेबाजी करनी है,

बेदिमाग लोग, बेकार ही,
तवज्जों लेकर बैठ जाते है,
कुछ रुपयों के खातिर,
पल में बिक जाते है,
खाते है मुल्क का,
और मुल्क के खिलाफ,
आग उगलते जाते है,

कुछ नहीं जाना इनका,
बस यूं ही उछल कूद मचाएंगे,
दिलो में डर, समाज में नफरत फैलाएंगे,

पर भाई, ये इंडिया है,
देख चुके है हम,
कई बारीशें ऐसी,
खोखले बदल है,
फूंक मारते ही उड़ जायेंगे,

इरादे हमारे बुलंद है,
किसी से नहीं हम कम है,
जाने कितने आए, कितने चले गए,
नींव हमारी नहीं कम है,
यूं ही नहीं हिलने वाले,
अब, अडिग है,
नहीं ट्स से मस होने वाले,
अब वही होगा, जो चाहेंगे,
हिन्दुस्तान हमारा है,
इसे अब हम ही चलाएंगे।।

देव

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