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तेरा दिल, कभी तो, मुझे अपनाएगा

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वो भी कितनी नादान है
बस बातों ही बातों में,
कुछ पल की मुलाकातों में,
कुछ हंसी कुछ ठहाको में,
साथ बैठे गुनगुनाने में,
कुछ नए तरानों गाने में,
कुछ पुराने अफसाने सुनाने में,
कुछ दूर साथ चलने में,
कुछ रुक कर बतियाने में,
जाते हुए हाथ हिलाने में,
और फिर मिलना, बोलकर जाने में,
यूं ही दिल चुरा कर ले गई,
और उसे पता भी नहीं,
या बस अनजान बनती है,
या तो मुड़कर देखती नहीं,
और देखती है, तो हंसती भी है,
क्या बताऊं उसको,
एक वही तो था, जो मेरा अपना था,
टूटा था, पर एक सपना था,
तन्हा होने पर, तसल्ली देता था,
अनजान भीड़ में भी, मेरे संग रहता था,
चल, कोई बात नहीं,
गर अब मेरा दिल मेरे पास नहीं,
जगह तो है,

आज नहीं तो कल,

एक दिन आयेगा,
तेरा दिल, कभी तो,
मुझे अपनाएगा।।

देव

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