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गर है मानता भगवान को,तो फिर डरता क्यूं है,

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सब कुछ तो पहले से लिखा हुआ है,
फिर बदलता क्यूं है,
गर है मानता भगवान को,
तो फिर डरता क्यूं है,

माना परिस्थिति है विषम,
कोई नहीं है तेरे संग,
सेना ने समहाली कमान है,
तेरी नहीं कोई पहचान है,
माननी तुझे सब बात है,
पर दिल तेरा कहा गुलाम है,

उठ जा, बड़ आगे,
कोई है तेरे इंतेज़ार में,
वक़्त निकल गया गर अभी,
राह जाएगा, रख हाथ हाथ में,

और कुछ पल, जों मिले है,
जीले, थोड़ा पीले,
कल पता नहीं, वक़्त ही ना हो,
तेरे इंतज़ार में, कोई हो ना हो।।।

देव

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