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उठ चल बड़, उड़ती चल

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ये जमीं तेरी, आसमां तेरा,
रास्ते तेरे, मंजिले तेरी,
तू बस उठ चल बड़,
तू बस उड़ती चल,

प्यास जब भी लगेगी,
चिलचिलाती धूप में,
ठोकरें, भी मिलेंगी,
रास्ते, अनजान से,
तू गिरके, उठकर चल,
तू बस उड़ती चल,

बढ़ेगी जब बिंदास तू,
पड़ेंगे, फंदे जज्बात के
पतंग बन, होगी आसमां पे
रोकेगी, डोरी रिश्तों की,
तोड़ कर, सारे बंधन,
तू बस उड़ती चल

ये जमीं तेरी, आसमां तेरा,
रास्ते तेरे, मंजिले तेरी,
तू बस उठ चल बड़,
तू बस उड़ती चल,

देव

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