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स्त्री भी, स्त्री को अपशब्द कहे

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तू है तो अस्तित्व मेरा है,
और तू अपना अस्तित्व ढूंढ रही है,
जाने, कैसी ये परीक्षा की घड़ी है,
जो सदियों से चल रही है,

सीता ने कब चाहा,
रावण उसका हरण करे,
एक राक्षस के वध के लिए,
नारी, क्यूं अपमान सहे,

क्यूं कंस का अंत, था करने को,
देवकी इतना दर्द सहे,
क्यूं नहीं जन्मे कृष्ण,
पहली संतान का रूप धरे,

क्यूं द्रोपदी यू ही बांटी गई,
बस, एक बात के कहने से भला,
गलती पांडवो के करने पे,
क्यूं भला वो अपमान सहे,

कहते है वक़्त है बदल चला,
स्त्री का सम्मान है वापस मिला,
फिर भी क्यूं आज भी देखो ज़रा,
स्त्री भी, स्त्री को अपशब्द कहे।।

देव

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