Site icon DevKeDilSe

अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है

Advertisements

कोशिश करी बांधने की,
बंध नहीं पाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

कभी सुन कर हाल ए दिल
यारो का,
कभी, किस्से मोहब्बत के
मारो का,
सब्र नहीं रख पाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

दर्द छिपा है, यहां,
हर नजर में,
हर नजर, सैलाब है,
आंसुओ का,
अक्सर, बह जाते है,
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

जीता भी हूं मैं,
कभी हारा भी हूं,
चुप चाप रहा, हरदम
कुछ ना कहा,
अब बहक जाते है
अल्फ़ाज़ है, निकल ही जाते है।

देव

15 may 2020

Exit mobile version