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क्या कुछ पल सुस्ता लू

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यूं तो इजाजत की उससे,
कभी जरूरत नहीं थी,
मगर आज, ना जाने क्यूं,
आज पूछ डाला,
तेरे आगोश में, रख कर सर
क्या कुछ पल बिता लू,
क्या कुछ पल सुस्ता लू,

नींद तो आईं है मुझको अक्सर,
पर सोया कहां हूं,
बहाने दर्द के वो पल,
चैन से रोया कहा हूं,
तू ही बता, तेरे कंधे पर,
रख के सिर,
क्या खुल कर रो डालूं।

यूं तो शांत दिखता हूं, मगर
कश्म ए कश बहुत है दिल में,
कोई अपना नहीं है यहां,
जो है महफ़िल में,
तू ही बता, क्या कुछ पल,
तुझे समा अपनी बाहों में,
दुनिया भुला डालूं।

तेरे आगोश में, रख कर सर
क्या कुछ पल बिता लू,
क्या कुछ पल सुस्ता लू।।

देव

16june 2020

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