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बड़े मोहक से,
राधा में कृष्ण बसे,
मुरली की धुन पर देखो,
कैसे गोपियां चले।
रंग राधा का पाया,
कृष्णा स्वरूप अपनाया,
बांसुरी दाले कमर में,
मोर पंख माथे लगाया।
रूप कैसे ना होवे,
कृष्णा जो आन बसे,
राधा स्वयं, क्यूं ना दिखे
कृष्णा का, रूप धरे।
रूप तेरा प्रखर है,
स्वयं प्रभु का, स्वर है,
तेरी आभा प्रचुर है,
राधे – कृष्ण का ये रूप है।।
देव
