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कुछ बुलबुले सी बन गई ये जिंदगी,
देखने में खूबसूरत, मगर नाजुक बहुत,
होले से करीब आना ए दोस्त मेरे,
ना जाने, कब फट जाए पल में,
और छोड़ दिया, गर यू ही इसे
हवा का झोंका, कब उड़ा ले जाए पल में,
खुद बेरंग सा, जीवन जीता है और,
किरण को, सतरंगा बना देता है पल में,
वक़्त कम है, खुश हो लो, लुप्त हो जाएगी
या कहीं दूर निकल जाएगी, पल में।।
देव
17/08/2020, 12:22 am
