मैं लगातार चल रही हूंँ।

ख़्वाब, देखती हूंँ बहुत,और पूरा भी कर रही हूंँ,धीरे धीरे चलना मेरी आदत है,और मैं लगातार चल रही हूंँ। लगातार चल रही हूंँ,जिन्दगी की रफ्तार से,ना थोड़ा आगे, ना थोड़ा पीछे,मिला कदम, ज़माने की ताल से, मगर ये क्या, जब भी,देखती हूं आइना, लगता है,कुछ ज्यादा मैं, बड़ी हो गई,उम्र जिन्दगी की रफ्तार से,कुछ ज्यादा … Continue reading मैं लगातार चल रही हूंँ।

फिर वही वक्त है!

फिर वही वक्त है,रात फिर से घिर आई है,और कुछ है,जो है बस तन्हा,और है तो बस,इंतज़ार, ना खत्म होने वाला,और ये दिल,ढूंढ रहा है, साथबहुत, हाँ,बहुत दूर तक चलने वाला,रोज, इसी इंतेज़ार में,फिर से शाम,रात का अंधेरा लेकर आती है,फिर से, करवटें बदलते हुए,एक और रात कट जाती है,मगर, हारें नहीं नहीं,नहीं हारे है … Continue reading फिर वही वक्त है!

आंसू झलक जाते है!

आज भी, आंखो से उसके,आंसू झलक जाता है,जब कभी, अपनी अलमारी,सम्हालते वक्त, वहीलाल दुपट्टा हाथ आता है। बहुत वक्त हो गया, मगरसजो के अभी भी रखा है,बहुत कुछ पाया, औरइन सालो में,बहुत कुछ छूटा भी है, बेगाने, जिन्हें पल में,अपना बनाया था,जिनके लिए, वो प्यार,वो राज दुलार, ठुकराया था,आज वो भी,दुत्कार कर यू चले गए,जैसे, … Continue reading आंसू झलक जाते है!

अश्क कब तक बहें!

अश्क कब तक बहेंऔर क्यूं बहें,जो नहीं है तेरा,उस का गम क्यूं करे। हाथ से थाम कर,हाथ अपना जरा,बढ़ चल तू जरा,जिन्दगी क्यूं रुके। जरा इधर भी तो देखहम भी है संग तेरे,तन्हा है तू यहां, येफिक्र क्यूं तू करे। सपने देखे है जो तूने,तो यकीं भी तो रख,वो हक़ीक़त बनेंगे,यकीं खुद पर तो रख। … Continue reading अश्क कब तक बहें!

थोड़ी जिन्दगी जी लेते है!

चलो, आज कुछ अच्छा करते है,थोड़ी जिन्दगी जी लेते है, बहुत हुई फिक्र कल की,आज की बात करते है,थोड़ी जिन्दगी जी लेते है। जो रह गया, सो रह गया,जो हैं, उनके साथ चलते है,थोड़ी जिन्दगी जी लेते है। गम है तो बहा लो आंसू,फिर ढेर सारा हंस लेते है,थोड़ी जिन्दगी जी लेते है। ये इश्क़ … Continue reading थोड़ी जिन्दगी जी लेते है!

ना मंजिल का पता!

ना मंजिल का पता,ना रास्तों का अहसास,ना फिक्र कल की है मुझे,ना वक्त पर है ऐतबार,ना संजीदगी सपनो मे,ना बेहोश जिन्दगी मे हूँ,ना बेकरारी दिल में है,ना पाने को हूँ मैं बेसबर, बस, यांदे है, यादों में तुम,तुम में खुदा हूं देखता,बस है इंतेज़ार, है तुझे प्यार,हूँ तेरा रास्ता देखता। देव 06/01/2021, 11:03 am

ख्वाब क्यूं देखना!

बस, ख्वाब क्यूं देखना,जब सच तुम कर सकते हो,क्यूं अधूरे जीते हो,जब पूरे हो सकते हो। वक्त है, अभी, और बस अभी है,कल क्या होगा, किसको यकीं है,सांसे, अभी है, जिंदा तभी है,गर खुश है, तो जिन्दगी है। देव 05/01/2021, 11:00 pm

कायम है ऐतबार किया।

आज फिर बरसा है, आसमान,फिर से, बे छिछक, बे शुमार,आज फिर, याद आया है मुझे,तुझसे मिलना, वो एक बार। आज फिर, तेरे होने का शुक्रिया,खुदा को नज़र, फरमा दिया,आज फिर, तेरी मोहब्बत पर,कायम है ऐतबार किया। आज फिर, तुमने मुझे जह़न मे,कुछ पल को, याद किया,आज फिर, अपनी मुस्कुराहट को,तुमने मेरे नाम किया। आज फिर, … Continue reading कायम है ऐतबार किया।

बस तुम्हारा नाम लेता हूंँ।

तुम हो यहीं कहीं, पहचान लेता हूँ,तुमसे मिलना हो, तो दिल में झांक लेता हूंँ।। कुछ धुआ धुआं सा, बिखरा है हर तरफ,बड़ा कर हाथ अपना, तुम्हे थाम लेता हूँ। गुस्ताखियां करी है मैंने, और कुछ तुमने भी,गुस्ताखी यों में छिपा प्यार, पहचान लेता हूँ। बोलने को यूं तो, बहुत कुछ है मगर,लब खोलता हूँ, … Continue reading बस तुम्हारा नाम लेता हूंँ।

एक और नया साल है!

लो, फिर से आ गया, नया साल,अभी पिछले साल ही तो आया था,उमंगे उम्मीदों सपनो को उड़ान देने,कुछ पूरी हुई, कुछ वही रुकी है,जाने किसका इंतज़ार कर रही है,अब एक और नया साल है,उम्मीदों का भंडार है, और जो गया,उससे कोई शिकायत भी नहीं है,क्यूं की उसने, इतनी अनमोल,कुछ घड़ियां भी दी है।कौनसी, अरे माना, … Continue reading एक और नया साल है!

सर्द मौसम है!

सर्द मौसम है, मगर तपिश अब भी है,मेरे ख्वाबों में, ललक अब भी है। टूटी तो कई बार हूँ मैं, मगर टूट कर,फिर जुड़ना मुझे आता है,बहाव तेज सही, तैरना अब भी आता है। कहने को तो चालीस, बहुत लगते है लेकिन,इस दिल को, चहकना अब भी आता है। अब भी, वही चमक है आंखो … Continue reading सर्द मौसम है!

बस, तुम यहीं हो।।

बस, तुम यहीं हो।। आज भी, उसी तरह से,सजा कर रखा है,उस कमरे को,जैसा, तुम छोड़ गई थी,कुछ पल ही रही थी,मगर तुम रही थी। उन्हीं पलों की यादों को,सजो के रखा है,यू ही नहीं,दीवारों पर, ये रंग लगा है,हाँ, वही जहा तुमने,अपना हाथ रखा था,गीली मेहंदी के लगने पर,सॉरी कहा था। अभी भी सलवटे, … Continue reading बस, तुम यहीं हो।।

मैं पुरुष हूंँ !

तुम क्या समझोगे मुझे,तुमने तो वही देखा है,जो मैंने दिखाया है,क्या कभी, मेरे अंतर्मनमें उबलते, ज्वालामुखीका अंदेशा लगाया है। मैं पुरुष हूंँ हाँ सही कहा,जकड़ रखा है मुझे भी,तो बंदिशों में, बचपन से,मर्द को दर्द नहीं होता,यहीं सिखाया है, औरजो झलकना चाहते थेमेरे आंसू, उन पर,मर्दानगी के नाम का,अंकुश लगाया है। कभी कोशिश भी,करी होती … Continue reading मैं पुरुष हूंँ !

तुम हो तो मैं हूंँ !

तुम हो तो मैं हूंँ वरनाकब का मिट जाता,टूट तो मैं गया था,ख़ाक में मिल जाता। तुम ही तो थे, जो खड़े थे,मिला कांधा मुझसे,तुम्हारी नज़रों मे ही तो,देखा था जीवन मैंने। तुम्हारी बिंदास हसीं ने,मुझे फिर हसना सिखाया,भूला गम अपने फिर,आगे बढ़ना सिखाया। तुम ही तो थे, थामहाथ मेरा हाथो में अपने,जोड़ा हर टुकड़े … Continue reading तुम हो तो मैं हूंँ !

कुछ अधूरी मुलाकाते!

कुछ अनकही बातें,कुछ अधूरी मुलाकाते,कुछ अधबुने सपने,कुछ अधसोई रातें, कुछ आधे लिखे पन्ने,कुछ अधूरे किस्से,कुछ अंतहीन कहानियां,कुछ खोए से अपने, कुछ दबे जज़्बात,कुछ छूटता सा हाथ,कुछ तन्हा शामे,कुछ अधबुने तानेबाने, बहुत कुछ, छूट सा गया,वक्त हाथो से, यू निकल गया,फिर भी, तुम वही हो,अब भी, जह़न में, बसी हो।। देव 26/12/2020, 6:35 pm

खौफ, खौफ किसका है!

पाक दामन को, दागदार कर जाते है,कुछ लोग, बेवजह छींटे उछाल जाते है। कब तक रहेंगे बंदी, बेमोल असूलो के,सलाम है उन्हें, जो बंधन तोड़ जाते है। वक्त आ गया, दिखा दो, फिर ज़माने को,बेवजह नहीं, हम किसी रास्ते पर जाते है। खौफ, खौफ किसका है, और क्यूं कर है,हम खुद बोतें है, और खुद … Continue reading खौफ, खौफ किसका है!

चले जा रही है।

मुस्कुरा कर हर मुसीबत से,लड़े जा रही है,कुछ पल ठहर, रास्ते,तके जा रही है। मंजिल पता तो है, नज़रनहीं आ रही है,ज़मीं और गगन के बीच, कहींबुला तो रही है। थमे कदम है कुछ पल,रुके तो नहीं है,सांसे भरी है मगर अब भी,चले जा रही है। अकेली है वो यहां पर,तन्हा नहीं है,नक्शे कदम पर … Continue reading चले जा रही है।

खुला आकाश है, छू जाने दो!

खुला आकाश है, छू जाने दो,पर ना कतरो, उड़ जाने दो। जह़न मे जो, बसाया है, बचपन से,उन बेमानी मकसदों को हटाना है,गिराकर दीवारें बेमानी,हवा के साथ, बह जाने दो।। सही गलत के मायने, समझते है,नफ़रत को इश्क़ में, बदलते है,तोड़ कर बंदिशे, ज़माने की,हमे भी कुछ, कर गुजर जाने दो।। खुला आकाश है, छू … Continue reading खुला आकाश है, छू जाने दो!

किसी का इश्क़ बेमानी है।

कहो कौन शख्स है यहाँ,मुकम्मल है जहाँ जिसका,किसी का घर अधूरा है,किसी का दिल अधूरा है। मोहब्बत पर यकीं कर लू,मोहब्बत गर मिले मुझको,किसी पर दिल नहीं आता,किसी का इश्क़ बेमानी है। देव 20/12/2020, 7:44 pm

यहाँ हो तुम!

यहाँ हो तुम,यहीं तो हो तुम,जहां मोहब्बत है मेरी,गुफ्तगू तुमसे है करती, कहीं महफिल में क्यूं,क्यूं जमाने में ढूंढू,तुम हो जुस्तजू मेरी,मेरे ख्वाबों में हो मिलती।। देव 19/12/2020, 12:56 am