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सफर कुछ यूं गुजरने लगा

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सफर कुछ यूं गुजरने लगा,
वक्त हाथो से फिसलने लगा,
महफिल है पर तन्हा रहे हम,
तलाशने खुद को, चलते गए हम।

मिली मंजिले, रास्ते भी हजारों,
करवों में कभी, कभी अकेले चले हम,
मिले राह में, साथी अनेक फिर भी
सरायों में कुछ पल, ठहराते रहे हम।

कोई हमसे बेहतर, किसी से हम बेहतर,
मिला हर कोई, तराजू था लेकर,
खरा मैं नहीं, कहता हूं मैं खुद,
चले साथ में, झूठी उम्मीदें लेकर।

है इश्क़ तो ही, इश्क़ तुम जताना,
नहीं झूठे वादों का, ठेका उठाना,
मोहब्बत हुई तो, लूटा दूंगा जां भी,
बेकार में ना वक्त यू लुटाना।।

देव

05/10/2020, 1:15 pm

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