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नज़रों में गहरी खामोशी लिए!

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नज़रों में गहरी खामोशी लिए,
सामने वो खड़ी थी, यूं तो,
पहचान पुरानी है, मगर
आज थोड़ी अनजान सी थी।

मगर, फिर भी, लगता है
बस अभी ही तो मिले थे,
कुछ लम्हों ने, ना जाने,
कितने अफसाने कहें थे।

ना जाने कितनी बातें,
पूछनी भी है और बतानी भी,
थोड़ी मायूस कहानी मेरी है,
तो गमगीन उसकी भी।

बहुत कुछ हुआ, मगर
वो फिर से अडिग खड़ी है,
जमीदोज कौन करेगा, जब
हिम्मत हिमालय से बड़ी है।

माना, उसका सूरज,
अस्त हुआ था कभी,
मगर, फिर एक नई किरण,
उसके कदम छू रही है।।

देव

27/11/2020, 8:46 pm

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