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दिल वाले रहते है।

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इमारतें बड़ी है, मगर
मकान खाली लगते है,
इस शहर में, अब कहाँ,
दिल वाले रहते है।

हर घर में, रहता है
मायूसी का साया,
कुछ उखड़ा उखड़ा सा है
हर शख्स यहाँ।

निकला हूँ आज, फिर ढूंढने,
फिर वही दिन,
अब नहीं, बागीचे में,
कबूतरों का झुंड रहता है।

चलो, चलते है, नई गलियों में,
कुछ नए दोस्त बनाते है,
जो गुजर गया, वो हसीन था मगर,
जाने पहचाने चेहरों में,
अनजान परिंदा रहता है।।।

देव

19/12/2020, 12:50 am

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