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अश्क कब तक बहें!

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अश्क कब तक बहें
और क्यूं बहें,
जो नहीं है तेरा,
उस का गम क्यूं करे।

हाथ से थाम कर,
हाथ अपना जरा,
बढ़ चल तू जरा,
जिन्दगी क्यूं रुके।

जरा इधर भी तो देख
हम भी है संग तेरे,
तन्हा है तू यहां, ये
फिक्र क्यूं तू करे।

सपने देखे है जो तूने,
तो यकीं भी तो रख,
वो हक़ीक़त बनेंगे,
यकीं खुद पर तो रख।

देव

10/01/2021, 2:11 pm

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