Site icon DevKeDilSe

आंसू झलक जाते है!

Advertisements

आज भी, आंखो से उसके,
आंसू झलक जाता है,
जब कभी, अपनी अलमारी,
सम्हालते वक्त, वही
लाल दुपट्टा हाथ आता है।

बहुत वक्त हो गया, मगर
सजो के अभी भी रखा है,
बहुत कुछ पाया, और
इन सालो में,
बहुत कुछ छूटा भी है,

बेगाने, जिन्हें पल में,
अपना बनाया था,
जिनके लिए, वो प्यार,
वो राज दुलार, ठुकराया था,
आज वो भी,
दुत्कार कर यू चले गए,
जैसे, उन्होंने कभी नहीं,
मुझे अपनाया था।

छुप छुप कर, उसी घर,
जो मुझ पर तरस खाता था,
मगर वो भी तो पत्थरों का था,
साथ कहा दे पाता था,
के किसी कोने में,
दबा कर सिसकियां अपनी,
आंसू बहा लेती थी,
और फिर नकली सी,
मुस्कान लिए,
फिर नौकरानी बनती थी,

बस, वो आंसू ही तो थे,
जो साथ थे, मगर,
अब वो भी परेशां हो गए,
लगता है, वो भी मुझे छोड़ गए।

बड़ी जद्दोजहद के बाद,
अब खुद को, खुद से,
आजाद कर पाई हूं,
जह़न मे जो जम कर,
बैठी परंपरा थी,
उस छोड़ आईं हूंँ
दिल, दिल तो कब का,
मर चुका था, अब उसे
फिर से जलाने आईं हूंँ,

हाँ माँ, माँ ने है तो,
उड़ाया था, दुपट्टा मेरा,
और कहा था बेटा,
हमेशा खुश रहना,
मुस्कुराती रहना,
अब मां का, वही सपना
पूरा करने आईं हूंँ।

बहुत हो गई, परतंत्र जिन्दगी,
अब मैं, अपनी जिन्दगी,
जीने आईं हूंँ,
माँ, अब मैं अपनी,
जिन्दगी जीने आईं हूंँ।।।

देव

11/01/2021, 10:53 pm

Exit mobile version