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कभी पास आती सी, कभी बहुत दूर दिखती है,
खुशियाँ अक्सर दिख कर, क्यूं मुंह फेर लेती है,
फिर ढूंढता हूंँ यही कहीं, अपने मे फिर से,
रहती है खुद में कहीं, बस छिपी रहती है।
देव
11/02/2021, 5:11 pm
कभी पास आती सी, कभी बहुत दूर दिखती है,
खुशियाँ अक्सर दिख कर, क्यूं मुंह फेर लेती है,
फिर ढूंढता हूंँ यही कहीं, अपने मे फिर से,
रहती है खुद में कहीं, बस छिपी रहती है।
देव
11/02/2021, 5:11 pm