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खुश रहने का, रहस्य।।

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एक हाथ में लाठी, और
कमर पर बच्चा लिए खड़ा था,
वो अपने वर्तमान और
भविष्य साथ लिए चला था।
बाल उलझे, पावों से चप्पल नदारद
बदन पर बस चंद कपड़े थे,
मगर चेहरे पर मुस्कान,
और हौसले उसके बड़े थे।
शायद, पेट आज भी, आधा ही भरा था,
बच्चा उसका कुछ कमजोर लग रहा था,
मगर शिकन एक नहीं थी,
जिंदा है, आज का दिन निकल गया,
ये भी खुशी कम नहीं थी।
सब ठीक है मगर हम परेशान है,
वो भूखा है, मगर मस्त मुस्कान है,
चंद लम्हों मे, उसने क्या सीखा दिया,
खुश रहने का, रहस्य बता दिया।।
देव
10/02/2021, 12:05 am

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