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सुकून

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हर लम्हा मुझे अब
हसीं लगता है
तेरे करीब होना
क्यूं, सुकून देता है

तुझे बहो में भरने की
तमन्नाएं करता हूं
तेरे आगोश में समा कर
क्यूं मैं खो जाता हूं

हर लम्हा मुझे अब….

तेरी मदहोश हसी
जब भी सुनाई देती है
वीरान सी महफ़िल में भी
क्यूं मैं हसता जाता हूं

हर लम्हा मुझे अब….

तेरी नजरो की गहराइयों में
काश उतर पाता
तेरी, फिकरो को मिटाना
क्यूं, मैं चाहता हूं

हर लम्हा मुझे अब….

तू वहीं है, जिससे
मिला था बस कुछ पल कल
याद जब भी आती है तेरी
क्यूं मैं खुद को भूल जाता हूं

हर लम्हा मुझे अब
हसीं लगता है
तेरे करीब होना
क्यूं, सुकून देता है

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