Site icon DevKeDilSe

एक दिन शून्य बन जाऊंगा

Advertisements

मुझे बांधने की कोशिश में
खुद ही उलझते जाओगे
लालसा अनंत की करोगे
अंत में शून्य पाओगे

पिंजरे में बंद तो कर लोगे
बड़ी आसानी से
पर मेरे दर्द से
तुम ही छटपटाओगे

दर्द देदो मुझे सारे अपने
भर लो खुशियां अपनी झोली में
डोर छोर दो जो पकड़ी है
किसी और को भी है जरूरत मेंरी

अभी वक्त है, जी लो जिंदगी
कल का क्या पता क्या हो जाएगा
जब तक है जां खुशियां बाट रहा हूं
फिर एक दिन शून्य बन जाऊंगा

देव

Exit mobile version