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दिन कुछ तो जीने दो

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अभी तो चार दिन भी
नहीं गुजारे साथ में
और वो मेरी वक़्त का
हिसाब मांगती है
मोहब्बत में जां दी जाती है
वो हमसे हमारी जान मांगती है

कुछ हसी बातें कुछ मुलाकाते
कुछ पल गुजरा साथ में
बड़ी जल्दी गिनाए उसने
गिले शिकवे शिकायते

मेरे रिश्तों की अहमियत
कौन जानेगा मुझसे ज्यादा
लगा कर दाम रिश्तों का
चंद सिक्को में, बेच डाला

सब्र, बस वहीं तो कहा था करने को,
अभी ही तो टूटा हूं मैं
मुझे कुछ वक़्त जीने दो
अभी सांसे तो लेने दो
मोहब्बत से मुंह ना फिर जाए
इश्क़ बीमारी ना बन जाए
कभी जो छूट गया था, गलियों में
वहीं दिन कुछ तो जीने दो

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