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हे अभिनन्दन

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पथ पर तेरे, करू मैं वंदन
हे अभिनन्दन हे अभिनन्दन

मां तेरी गर्व करे तुझ पर
नाज़ कोख पर करे निरंतर
धरा भारत की, हर्षित हो
बरसाए पुष्प हर क्षण

हे अभिनन्दन हे अभिनन्दन

मातृभूमि पर ऋण है चड़ाया
तूने सबका मान बढ़ाया
दुश्मन की ललकार तनिक
हिला ना बुर्ज का एक कण

हे अभिनंदन हे अभिनन्दन

देव

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