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लकीर के फकीर, क्यूं बन जाते है लोग।
नए जमाने में, क्यूं पुराने तरीके आजमाते है लोग।।
माना, पुराना चावल, ज्यादा खिलता है।
और वाइन पुरानी, ज्यादा भाती है।।
पर आजकल कार के बिना, कौन बाहर निकलता है।
और मोबाइल के बिना, किसकी जिंदगी चलती है।।
किन्तु, नई तकनीक नई परेशानियां भी लाती है।
आजकल, अनजान नंबर, ही पहचान बन जाती है।।
इसीलिए, फ़र्ज़ अपना निभा रहा हूं।
सो रहे है जो, उन्हें उठा रहा हूं।।
ऐसा ना हो कि, देर काफी हो जाए।
दर्द तो है ही इतना, कहीं कोई जख्म ना दे जाए।।
देव
