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शेरो की धरती पर, अब शेरो का रुतबा है।।

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No more Artical 370, congratulation India on historical day,

आज नहीं मैं रुकने वाला, हुंकार भरूंगा।
है भारत मां के लाल, तेरी जय कार करूंगा।।
सेना के रक्त से सींचा, जिस उपवन को हमने।
आज उसी उपवन में, मैं जय हिन्द कहूंगा।।

वर्षों पहले, कुछ को थी, सत्ता की भूख।
कर डाला, कुछ पल में, मां के टुकड़े यू।।
लिया जन्म राक्षस ने, थी उसे खून की भूख।
रखा नाम था पाक, और पीता था लहू।।

यहां भी कुछ थे, दानव के जो थे पुजक।
जिस देश की थे खाते, उसी के थे वो निंदक।।
देशद्रोही थे वो को, देश को लूट गए।
धारा 370 दुश्मनों को उपहार कर गए।।

जो ताज था मां का, उसी धरा को किया कलंकित।
काफिरों को घुसा घरों में, होकर पुलकित।।
पर, खुदा भी तो खुदा है, कब तक सहेगा।
इंसाफ जो कल ना मिला, अब सबको मिलेगा।।

दहाड़ हुई सालो पहले, कहीं कच्छ के रण में।
सबने सोचा, क्या होगा, ये हैं नन्हे बच्चे।।
वो बच्चे देखो, अब बड़े हो गए।
भारत मां के सपूत, भारत के रक्षक हो गए।।

थर थर थर थर कांपे, देखो वो पूत कपूत।
अपनी मां को ही बेचा जिसने, खा गए सबूत।।
पर सिंह की गर्जना, सबको पल में हिला गई।
जो सालो से थी सरकार, वहीं लाचार हो गई।।

मारने को सिंह, चली लकड़बग्घों की टोली।
निकल पड़ी, जंगल में खेलने खून की होली।।
पर भूल गए, जनता नहीं है इतनी भोली।
धूल चटा कर उन्हें, फिर बड़ी शेरो की टोली।।

इस बार, गरज कुछ ज्यादा थी थर्रा हट वाली।
निकल गई दुश्मनों की, जमा थी हवा सारी।।
सावन के महीने में कर दी बारिश भारी।
पहले तीन तलाक़ हटे, अब धरा 370 खारिज।।

अभी तो बस आधा, सावन बीता है।
शिव जी की जटा में, अभी काफी गंगा है।।
अभी तो बस कश्मीर के पड़ी गीता है।
अभी तो पाक में होनी हवन पूजा है।।

मेरे देश को मिली, अब सही दिशा है।
शेरो की धरती पर, अब शेरो का रुतबा है।।

देव

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