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कब होगा वक़्त, कब होगा मिलने का सपना पूरा

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तुम कहां हो, झांक कर देखती हूं,
दिल की दीवारों में बनी खिड़कियों से,
नजर तो तुम आते नहीं,
मेरी मोहब्बत भरी आंखो से,
लगता तो है, तू हो आसपास कहीं,
छिपे हो क्या, इन परेशानियों की झाड़ियों में,
काश, हटा सकूं मै, इस हिचकिचाहट के बादलों को,
तसव्वुर तेरा करू, इक बार, तू जो मिल जाए,
इश्क़ मेरा करता है, इंतेज़ार तेरा,
कब होगा वक़्त, कब होगा मिलने का सपना पूरा।।

देव

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