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इस जमीं की, तू अप्सरा है।।

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तेरी ये मंद मंद मुस्कुराहट,
देती है, दिलो पर दस्तक,

और कांधे पर, झूलते ये बाल,
कर देते है, कितनो का, हाल बेहाल,

खुदा से क्या पूंछू, खास क्या है,
तेरे लिबास का, अंदाज जुदा है,

और ये, रोशनदान से, झांकता सा लाल रंग,
छुपी इसमें भी कहीं, तेरी अदा है।।

लोग कहते है, तू इंसान है,
सच कहूं, इस जमीं की, तू अप्सरा है।।

देव

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