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रात का आलम

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आज रात का आलम भी,
कुछ और था,
ना वो, वो थी, ना मैं, मैं था,
कुछ बिखरे हुए पन्नों को,
सम्हालने में, तू भी,
और में भी, मुगशूल था।।
देव

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