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बस, इतना ही सफर है,
इतना ही साथ हमारा,
मंजिले हमारी, अनजान बहुत है,
बड़ना तो, दोनों को है आगे,
पर रास्तों में, अलगाव बहुत है,
सबब जिंदगी का, अलग,
बना बैठे है हम लोग,
मोहब्बत के पैमाने, अलग
बना बैठे है हम लोग,
कोई शोहरत का दीवाना,
कोई रंजो गम का,
कोई नफ़रत चाहता है,
कोई बगावत,
कोई माया में है फंसा,
कोई माया में,
इश्क़ में भी तो दिमाग,
लगा बैठे है हम लोग,
दिल को तो कभी का,
भुला बैठे है हम लोग,
कहा था ना, ना करो इश्क़,
टूट जाओगे,
महफ़िल तो क्या, बाज़ार में भी,
खुद को तन्हा पाओगे।।
देव
