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राखी का धागा पाती हूं।

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जाने कब से तमन्ना लेकर बैठी हूं,
कोई तो मेरे सपनो का राजा होगा,
उसके आने से, रोशन मेरा जीवन होगा,
मगर, कमबख्त, वो कसम याद आ जाती है,
जो कभी, बचपन में दिलवाई थी,
समस्त भारतीय मेरे भाई बहन है,
भरी स्कूल में, मास्टर साहब के,
कहने पर खाई थी,

सोच कर ही, परेशान हो जाती हूं,
सपने मोहब्बत के देखती हूं,
मगर अपने हाथो में,
राखी का धागा पाती हूं।

देव

12 may 2020

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