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सपना मेरा, पल में, टूट गया

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उसके लिए तो बस, वो कुछ शब्द थे,
और मेराअरमान, चूर हो गया,
सपना मेरा, पल में, टूट गया।

कुछ ही तो वक़्त हुआ था,
उसने मुझे लव यूं, कहा था,
और में छोड़ कर सब,
उसके आंगन में आईं थीं,
अभी तो मेहंदी भी कहा,
रंग छोड़ पाई थी, कि,
उसका रंग पता चल गया,
सपना मेरा पल में टूट गया।

यूं तो, इज्जत का बोझ भी था,
कुछ, समाज का डर भी था,
दर्द भी सहना है, उफ्फ नहीं करना है,
बचपन से सिखाया यही था,
मरती थी रात में हर,
दिन साल जैसा गुजरा,
नन्ही जान लिए गोदी में,
वो घर, एक दिन था छोड़ दिया,
सपना मेरा, पल में टूट गया।

कितना तोड़ोगे, बहुत टूट गई,
अब तो बस है जुड़ना,
जख्मों को नहीं भरा मैंने,
वो देते है, मुझे चेतना,
अब मैं हूं, और बस मैं हूं,
मुझको नहीं किसी से घृणा,
खुश हूं मै, आजाद हूं,
खुद के लिए है अब जीना,
अब देखती भी हूं,
और जीती भी ही,
जो सपना, मेरा था पल में टूट गया।

देव

19 may 2020

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