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कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते

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कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते,
जिंदगी खुद की, जी लेती,
भूल कर, हर जख्म, जो मिले,
कुछ पल, सांस ली होती।

हर कोई हक, जताने को है बैठा,
कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी,
और कभी मां का फ़र्ज़,
निभाने तक की है, यहां आशा।

मुझे मैं बनने का, मौका दिया होता,
अपने अफसानों में, मेरा नाम लिया होता,

मेरी ख्वाहिश, कभी पूछी होती,
मेरी धड़कने, क्या कहती है,
किसी ने आवाज तो सुनी होती।

कुछ पल, मुझे मेरे मिले होते,
जिंदगी खुद की, जी लेती,
भूल कर, हर जख्म, जो मिले,
कुछ पल, सांस ली होती।।

देव

27 May 2020

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