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फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

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कहते है सब, तू बसा है हर कण में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।

प्रथ्वी तेरी, अम्बर तेरा, तेरी ही सब माया,
सांसे तेरी, जीवन तेरा, तेरी आंखो काया,
फिर क्यूं ढूंढे इंसा तुझको, जल थल में।

तुझमें मैं हूं, मुझमें तू है, तू ही मै, मैं ही तू है,
बसा है तू, इस जग के, हर शब्दन में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मूरत में।

कहते है सब, तू बसा है हर कण में,
फिर क्यूं ढूंढे, इंसा तुझको मंदिर में।।

देव

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