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क्या, तू यू ही डर जाएगी

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थपेड़े खा कर, तूफानों के,
पहुंची है तू , यहां तक,
कहां आंधियां, तुझे,
जरा हिला पाएंगी,
क्या, तू यू ही डर जाएगी।

अंधेरों में रही, मुश्किलें
कितनी सही, स्याह रातों में,
पलकें खुली रही, ये शाम
कहां तुझे भयभीत कर पाएंगी,
क्या, तू यू ही डर जाएगी,

कुछ बचा ना सुनने को,
सुना है तूने, जाने कितना,
अब इन लोगो की, बेतुकी बातें,
कहा कुछ बिगड़ पाएंगी,
क्या, तू यू ही डर जाएगी।

नहीं, तू नहीं, डर यूं सकती है,
तू ही शिव, तू ही शक्ति है,
तू प्रचंड है,तू अग्नि है,
तू ही दुर्गा, तू ही लक्ष्मी है,
काल तेरा भाग है,
तीनो लोको से अभाज्य है,
अखंड है, तू छंद है,
देव सारे, तेरे अंग है,

देव

15 जुलाई 2020

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