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रुक रुक कर चला,
चल चल कर रुका,
जाने कितना चला,
जाने कितना रुका।।
कभी सांसे चढ़ी,
कभी सांसे थमी,
डगमग डगमग,
कभी चाल हुई।
कभी सूरज था,
कभी रात हुई,
कितनी शाम सुबह,
कब निकल गई।
मैं चलता गया,
बस चलता गया।।
कुछ साथ मिले,
कुछ। छूट गए,
कुछ अनजाने थे,
पर। चलते। रहे,
कभी नज़रे उठी,
कभी नज़रे झुकी,
कभी नज़रे मिला,
नज़रों बेगानी हुई।
मैं चलता गया,
बस चलता गया,
जाने कितना चला,
जाने कितना रुका।।
देव
06 August 2020
