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ये कोरोना कि, बदमाशी है।

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कुछ बेइंतेहा सी मोहब्बत,
करने की ख्वाहिश है,
मगर, ना जाने क्या,
ये कोरोना कि, बदमाशी है।
मुलाकात का तो,
जिक्र भर नहीं आता है,
और फोन पर लव यू बोलना,
कैजुअल में चला जाता है।
अब तो उनको बालकोंनी,
से देखने भी नहीं जा पाते है,
गेट पर ही चौकीदार से,
रोक लिए जाते है,
कहता है, भाई,
देख कर भी, क्या कर लोगे,
तुम भी मास्क में,
वो भी मास्क में,
ना एक्सप्रेशन समझोगे,
ना पहुंचा ही पाओगे,
और तुम्हारा कुछ नहीं जायेगा,
बेकार ही, हमारी नौकरी खाओगे,
एक बात बताओगे
क्या मोहब्बत का, इजहार ऑनलाइन कर पाओगे
हाँ हो गई तो ठीक, वरना
गाल को लाल होने से बचा पाओगे,

बस, कुछ इस तरह,
शुरू होने से पहले,
मेरी कहानी खत्म हो गई,
कोरोना की आग में, मेरी
तहेदिल वाली मोहब्बत की,
तमन्ना भस्म हो गई।।

देव

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